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बारिश के मौसम में आम बुखार और थकान को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक, जानिए रैट फीवर के बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों का कहना है कि लेप्टोस्पायरोसिस इन्फेक्शन, जो आम बुखार की तरह शुरू होता है, अगर समय पर इलाज न किया जाए तो लिवर और...

Ignoring common fever and fatigue during the rainy season can be dangerous; find out what doctors say about 'Rat Fever'.
बारिश के मौसम में आम बुखार और थकान को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक, जानिए रैट फीवर के बारे में क्या कहते हैं डॉक्टर? (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 24, 2026 at 6:16 PM IST

6 Min Read
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मानसून का मौसम चल रहा है, जिससे देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. जलभराव और बारिश की वजह से कई इलाकों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. डेंगू, पीलिया और दस्त जैसी बीमारियों के साथ-साथ, इस मौसम में रैट फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि लेप्टोस्पायरोसिस का संक्रमण आम बुखार की तरह शुरू होता है, लेकिन अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह लिवर, किडनी और दिमाग जैसे जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है.

रैट फीवर क्या है?
रैट फीवर, जिसे वैज्ञानिक भाषा में लेप्टोस्पायरोसिस कहा जाता है, एक खतरनाक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो जानवरों (जैसे चूहे और चमगादड़) से इंसानों में फैलता है. यह न सिर्फ चूहों के काटने से फैलता है, बल्कि चूहों के पेशाब और मल से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से भी हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग मानसून के मौसम और बाढ़ के दौरान रुके हुए पानी के संपर्क में आते हैं, उन्हें रैट फीवर होने का खतरा ज्यादा होता है.

लेप्टोस्पायरोसिस कैसे फैलता है?
लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा नाम के बैक्टीरिया से होता है. ये बैक्टीरिया ज्यादातर चूहों के शरीर में पाए जाते हैं और जानवरों के यूरिन, मल और लार के जरिए बाहर निकलते हैं. ये बैक्टीरिया गंदे पानी, कीचड़ या गीली मिट्टी में कुछ समय तक जिंदा रह सकते हैं. ऐसी जगहों पर नंगे पैर चलने से बैक्टीरिया पैरों में छोटे कट या दरारों के जरिए शरीर में घुस जाते हैं, जिससे इंफेक्शन हो जाता है. खेत में काम करने वाले किसान, सफाई कर्मचारी, नगर निगम के कर्मचारी, मछुआरे और बाढ़ वाले इलाकों से गुजरने वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है.

इसे आम फ्लू समझकर नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक
रैट फीवर के शुरुआती लक्षण आम वायरल बुखार जैसे ही होते हैं. तेज बुखार, शरीर और अंगों में दर्द, थकान और सिरदर्द इसके कुछ लक्षण हैं. अगर संक्रमण बना रहता है, तो इससे लिवर खराब हो सकता है और पीलिया हो सकता है. कुछ मामलों में, यह किडनी, फेफड़ों और दिमाग पर भी असर डाल सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि इलाज में देरी होने से बीमारी के गंभीर और जानलेवा होने का खतरा बढ़ जाता है.

रैट फीवर से बचने के लिए सावधानियां
बारिश के मौसम में जितना हो सके नंगे पैर चलने से बचें. जो लोग खेतों या कीचड़ वाली जगहों पर जाते हैं, उनके लिए जूते पहनना बेहतर है. पीने के पानी को उबालकर और फिल्टर करके पीना चाहिए. चूहों की आबादी को नियंत्रित करने और घर के अंदर व आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के उपाय करना जरूरी है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर आपको बुख़ार हो, तो खुद से दवा लेने के बजाय नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाएं या जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लें.

लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है जानलेवा
दक्षिण कन्नड़ जिले के हेल्थ ऑफिसर डॉ. एच.आर. थिमैया के अनुसार, 'रैट फीवर' भले ही एक आम संक्रमण जैसा लगे, लेकिन नजरअंदाज करने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है. हालांकि, शुरुआती दौर में डॉक्टरी सलाह के अनुसार इलाज कराने पर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. घरेलू नुस्खे आजमाने या खुद से दवा लेने के बजाय, लोगों को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. बारिश के मौसम में जितना हो सके नंगे पैर चलने से बचना चाहिए. पानी उबालकर ही पीना चाहिए. मॉनसून के दौरान, हल्का बुखार भी कभी-कभी गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है, इसलिए इसे मामूली बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. वे सलाह देते हैं कि तुरंत मेडिकल जांच करवाना जरूरी है.

भारत के वे राज्य जहां लेप्टोस्पायरोसिस तेजी से फैल रहा है
भारत में मॉनसून और भारी बारिश के मौसम में लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है. यह बीमारी देश में आम है और हर साल हजारों लोगों को प्रभावित करती है, खासकर केरल, महाराष्ट्र (मुंबई), गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे तटीय और ज्यादा बारिश वाले इलाकों में. इस साल (2026) भी, जैसे-जैसे मॉनसून आगे बढ़ रहा है, देश के तटीय और ज्यादा बारिश वाले राज्यों में रैट फीवर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. मुंबई, केरल, कर्नाटक और दूसरे तटीय इलाकों में भारी बारिश और जलभराव के कारण स्वास्थ्य विभाग लगातार चेतावनी और एडवाइजरी जारी कर रहे हैं.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी हेल्थ जानकारी और सुझाव सिर्फ आपकी समझ के लिए हैं. यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दी जा रही है. हालांकि, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.)

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