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अगर आप रोज खाते हैं रेड मीट, तो हो जाएं सावधान! इन तीन बीमारियों का हो सकता है खतरा

एक रिसर्च में वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग ज्यादा रेड मीट खाते हैं, उन्हें कई बीमारियां होने का खतरा रहता है, जानिए यहां...

If you eat red meat every day, be careful! You could be at risk of these three diseases.
अगर आप रोज खाते हैं रेड मीट, तो हो जाएं सावधान! इन तीन बीमारियों का हो सकता है खतरा (ETV BHARTA AND GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Health Team

Published : December 25, 2025 at 2:48 PM IST

5 Min Read
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आजकल, बिजी लाइफस्टाइल, खराब खाने की आदतों और एक्सरसाइज की कमी के कारण, डायबिटीज और दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही, लोगों को याददाश्त की समस्या या मेंटल फॉग भी हो रहा है. ऐसी स्थिति में, इन समस्याओं को कंट्रोल करने के लिए सही डाइट बहुत जरूरी है. किसी भी चीज का ज्यादा सेवन काफी खतरनाक हो सकता है.

दरअसल, अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी के 15 जनवरी, 2025 के ऑनलाइन इश्यू में छपी एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग बहुत ज्यादा रेड मीट खाते हैं, उनमें कॉग्निटिव डिक्लाइन और डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में ज्यादा होता है जो बहुत कम रेड मीट खाते हैं. असल में, रेड मीट मैमल्स का मीट होता है- इसमें बीफ, बछड़ा, मेमना, मटन, पोर्क, बकरी और हिरण का मांश शामिल होती हैं. रेड मीट को रेड मीट इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि यह दिखने में लाल होता है. कहा जाता है कि मीट जितना लाल होता है, उसमें उतना ही ज्यादा फैट होता है.

लाल मांस खाने से न सिर्फ याददाश्त पर असर पड़ता है, बल्कि इससे डायबिटीज और दिल की बीमारियां भी होती हैं.
इस स्टडी के लेखक और बोस्टन के ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल के MD, SCD, डोंग वांग के मुताबिक, रेड मीट में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है, और पिछली कई स्टडीज से पता चला है कि रेड मीट अधिक खाने से टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. डोंग वांग का कहना है कि रेड मीट खाने से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और स्ट्रोक जैसी खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं. इससे खून की नसों को नुकसान और शरीर के कई हिस्सों में सूजन भी हो सकती है. खून की नसों में पुरानी सूजन और नुकसान से डिमेंशिया हो सकता है.

इस नई स्टडी में पाया गया कि प्रोसेस्ड रेड मीट से सोचने-समझने की क्षमता में कमी और डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि यह भी पाया गया कि इसकी जगह नट्स, मछली और पोल्ट्री जैसे हेल्दी ऑप्शन खाने से व्यक्ति का खतरा कम हो सकता है.

ऐसी स्टडी की गई
कॉग्निटिव गिरावट और डिमेंशिया ऐसी स्थितियां हैं जो दिमाग के काम में कमी से जुड़ी होती हैं. इससे याददाश्त कमजोर होती है और रोजमर्रा की जिंदगी में दिक्कतें आती हैं. डिमेंशिया के खतरे की जांच करने के लिए, शोधकर्ताओं ने स्टडी में 133,771 लोगों के एक ग्रुप को शामिल किया, जिनकी औसत उम्र 49 साल थी और स्टडी की शुरुआत में उन्हें डिमेंशिया नहीं था. उन सभी पर 43 सालों तक नजर रखी गई. इस दौरान, यह पाया गया कि इस ग्रुप के 11,173 लोगों को डिमेंशिया हो गया.

इस स्टडी से पता चलता है कि प्रोसेस्ड रेड मीट (जैसे बेकन, हॉट डॉग और सॉसेज) का ज्यादा सेवन डिमेंशिया के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है, जो लोग सबसे ज्यादा खाते थे, उनमें सबसे कम खाने वालों की तुलना में 13 फीसदी ज्यादा रिस्क था, जबकि बिना प्रोसेस्ड रेड मीट का जोखिम पर कोई खास असर नहीं दिखा, और रेड मीट की जगह नट्स या मछली खाने से खतरा कम हो गया.

(डिस्क्लेमर- इस रिपोर्ट से जुड़ी सभी हेल्थ जानकारी और सलाह सिर्फ जानकारी के लिए हैं. हम यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दे रहे हैं. लेकिन, इस जानकारी पर अमल करने से पहले कृपया अपने पर्सनल डॉक्टर से सलाह लें.)

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