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जानिए थायरॉइड की बीमारी आंखों को कैसे करती है प्रभावित? क्या है इसके लक्षण और कारण

अगर आंखों में कोई असामान्य बदलाव दिखे, तो उन्हें मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, जानिए क्यों?

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जानिए थायरॉइड की बीमारी आंखों को कैसे करती है प्रभावित? क्या है इसके लक्षण और कारण (GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Health Team

Published : June 22, 2026 at 1:07 PM IST

6 Min Read
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आजकल लाइफस्टाइल, खाने की आदतों में बदलाव और फिजिकल एक्टिविटी की कमी की वजह से बहुत से लोगों को थायरॉइड की समस्या हो रही है. खासकर महिलाओं को यह समस्या होने की संभावना ज्यादा होती है. जाने-माने डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. पी.वी. राव का कहना है कि आमतौर पर यह समझा जाता है कि थायरॉइड की प्रॉब्लम वाले लोगों में थकान, वजन बढ़ना, ठंड बर्दाश्त न होना, स्किन का रूखा होना, बाल झड़ना, डिप्रेशन और दिल की धड़कन का धीमा होना जैसे लक्षण दिखते हैं. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि थायरॉइड की प्रॉब्लम का आंखों पर भी बुरा असर पड़ सकता है. इस खबर में जानिए आंखों से थायरॉइड के लक्षणों का पता कैसे लगाया जा सकता है और कैसे यह स्थिति आंखों को प्रभावित कर सकता है...

थायरॉइड क्या है?
हमारा शरीर कई अंगों और सिस्टम से मिलकर बना है. इनमें से थायरॉइड सिस्टम एक अहम भूमिका निभाता है. इसका सबसे जरूरी काम हमारे मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करना है. तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि शरीर की जरूरतों के हिसाब से लगातार हार्मोन बनाती रहती है, जिससे मेटाबॉलिज्म ठीक से काम करता है. हालांकि, थायरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले थायरॉक्सिन हार्मोन के लेवल में उतार-चढ़ाव (यानी ज्यादा या कम होना) से कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को दो तरह से बांटा जा सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि अगर थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाता है, तो इस स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म कहते हैं, जबकि अगर प्रोडक्शन नॉर्मल लेवल से कम हो जाता है, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है.

थायरॉइड आंखों को कैसे प्रभावित करता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, थायरॉइड (खासकर ग्रेव्स डिजीज) की वजह से इम्यून सिस्टम गलती से आंखों के आस-पास के टिशू (टिशू) पर हमला कर देता है, जिससे थायरॉइड आई डिजीज (TED) या ग्रेव्स ऑर्बिटोपैथी होती है. इसके मुख्य लक्षणों में सूजन, सूखापन, आंखों का लाल होना, पलकों का ठीक से बंद न होना, आंखों का बाहर निकलना और डबल विजन शामिल हैं. इसके साथ ही...

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जानिए थायरॉइड की बीमारी आंखों को कैसे करती है प्रभावित? क्या है इसके लक्षण और कारण (GETTY IMAGES)

ग्रेव्स डिजीज
ग्रेव्स डिजीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही थायरॉइड ग्लैंड पर हमला कर देता है. इससे थायरॉइड ग्लैंड ओवरएक्टिव हो जाती है और जरूरत से ज्यादा थायरॉइड हार्मोन बनाने लगती है. जिससे हाइपरथायरायडिज्म की समस्या हो जाती है.

थायरॉइड के लक्षण आंखों से कैसे पता लगाया जा सकता है.
अमेरिकल थायरॉइड एसोसिएशन के मुताबिक, थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं खासकर हाइपरथायरॉइडिज्म या ग्रेव्स डिजीज का पता आसानी से आंखों में होने वाले बदलावों से लगाया जा सकता है. इस स्थिति को 'थायरॉइड आई डिजीज' (TED) कहा जाता है. जब थायरॉइड ग्लैंड ठीक से काम नहीं करती है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम आंखों के पीछे की मांसपेशियों और फैटी टिश्यू पर हमला करता है, जिससे सूजन और तनाव पैदा होता है.

आंखों के आसपास लगातार सूजन या फुलावट इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में से एक मानी जाती है. अगर आराम करने या पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सूजन कम न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, आंखों में रेत जैसा महसूस होना, सूखापन या आंखों के पीछे दबाव महसूस होना भी थायरॉइड नेत्र रोग का संकेत हो सकता है. कुछ लोगों में आंखें सामान्य से अधिक उभरी हुई दिखाई देती हैं. इस स्थिति को प्रोप्टोसिस कहते हैं.

दोहरी दृष्टि, प्रकाश सहन न कर पाना और नींद के दौरान आंखें पूरी तरह बंद न कर पाना जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं. यदि बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच जाती है, तो ऑप्टिक तंत्रिका पर दबाव बढ़ने और दृष्टि प्रभावित होने का खतरा होता है. इस बीमारी का पता लगाना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण बहुत धीरे-धीरे विकसित होते हैं.

जानकारों का कहना है कि अगर आंखों में कोई असामान्य बदलाव दिखे, तो उन्हें मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. कभी-कभी, आंखों से मिलने वाले ये चेतावनी भरे संकेत थायरॉइड की उन समस्याओं का पता लगाने का मौका देते हैं जो अभी पूरी तरह से सामने नहीं आई हैं. जानकारों का सुझाव है कि समय पर जांच और इलाज से आंखों की सेहत और नजर को बचाने में मदद मिल सकती है.

थायरॉइड की समस्या वाले लोगों के लिए आंखों की जांच बहुत जरूरी है. कुछ लक्षण दिखने पर डॉक्टर अक्सर थायरॉइड की जांच करवाने की सलाह देते हैं. इसी तरह, थायरॉइड की बीमारी का इलाज करवा रहे मरीजों के लिए आंखों की जांच भी इलाज का एक अहम हिस्सा होनी चाहिए. धूम्रपान एक बड़ा रिस्क फैक्टर बनकर उभर रहा है जो थायरॉइड से जुड़ी आंखों की बीमारी को और गंभीर बना देता है, थायरॉइड की समस्या वाले धूम्रपान करने वालों में आंखों से जुड़ी गंभीर परेशानियां होने की संभावना ज्यादा होती है. इसलिए, धूम्रपान छोड़ने से इस रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बीमारी का पता चलने और इलाज होने से आंखों की सेहत और नजर को बचाने में मदद मिल सकती है.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी हेल्थ जानकारी और सुझाव सिर्फ आपकी समझ के लिए हैं. यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दी जा रही है. हालांकि, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.

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