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शरीर में कैंसर सेल्स हैं या नहीं? इस एक टेस्ट से पूरी तस्वीर आ सकती है सामने, दीपिका कक्कड़ ने इस टेस्ट की अहमियत बताई

एक ऐसे एडवांस्ड टेस्ट के बारे में जानें जो कैंसर मरीजों के लिए फायदेमंद है और कई दूसरी गंभीर बीमारियों का भी पता लगा सकता...

Does the body contain cancer cells or not? This single PET scan can reveal the complete picture.
शरीर में कैंसर सेल्स हैं या नहीं? इस एक टेस्ट से पूरी तस्वीर आ सकती है साम (GETTY IMAGES AND Screen Grab)
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By ETV Bharat Health Team

Published : December 22, 2025 at 2:49 PM IST

7 Min Read
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कैंसर बीमारियों का एक समूह है जिसमें असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि और फैलाव होता है, जो ट्यूमर बना सकते हैं और दूसरे टिशू या अंगों पर हमला कर सकते हैं. आम प्रकारों में स्तन, फेफड़े और कोलन कैंसर शामिल हैं, जो जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल और एनवायरमेंटल फैक्टर्स से होने वाले DNA म्यूटेशन के कारण होते हैं, और इनका इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन जैसे तरीकों से किया जाता है, लेकिन, स्क्रीनिंग से शुरुआती पहचान से बेहतर नतीजे मिलते हैं. क्योंकि इससे कैंसर का पता लक्षणों के दिखने से पहले ही चल जाता है, जिससे इलाज आसान होता है.

आज, इस न्यूज रिपोर्ट में, हम आपको एक ऐसे एडवांस्ड टेस्ट के बारे में बताएंगे जो कैंसर मरीजों के लिए बहुत असरदार है. यह बीमारी का जल्दी पता लगाने, सटीक स्टेजिंग, इलाज की निगरानी और दोबारा होने की निगरानी के लिए एक जरूरी टूल है. यह अक्सर मेटाबॉलिक एक्टिविटी को दिखाता है जिसे दूसरे स्कैन पता नहीं लगा पाते, कैंसर को निशान वाले टिशू से अलग करने में मदद करता है, और फेफड़ों के कैंसर, लिम्फोमा और मेलेनोमा जैसे अलग-अलग कैंसर के लिए पर्सनलाइज्ड इलाज प्लान बनाने में गाइड करता है. इसकी ताकत फंक्शनल बदलावों को दिखाने की क्षमता में है, जिससे डॉक्टर एक्टिव कैंसर सेल्स को देख पाते हैं और इलाज के रिस्पॉन्स का जल्दी आकलन कर पाते हैं, जिससे मरीजों के नतीजे बेहतर होते हैं. पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन एक इमेजिंग टेस्ट कहा जाता है.

PET स्कैन क्या है?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, PET पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी एक मेडिकल इमेजिंग टेस्ट है जो शरीर के अंदर अंगों और टिशूज फंक्शन की तस्वीरें लेता है, जिससे डॉक्टरों को कैंसर, दिल की बीमारी और मेंटल डिजीज जैसी बीमारियों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उनका इलाज करने में मदद मिलती है. इस टेस्ट में एक सुरक्षित, इंजेक्टेबल रेडियोएक्टिव केमिकल का इस्तेमाल होता है जिसे रेडियोट्रेसर कहते हैं. इस रेडियोधर्मी ट्रेसर को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जो सेल्स द्वारा सोख लिया जाता है, और स्कैनर उन जगहों (चमकीले धब्बे) को दिखाता है जहां सेल्स अधिक सक्रिय होती हैं, जैसे कि कैंसर सेल्स, जो सामान्य से ज्यादा ट्रेसर सोखती हैं, जिससे संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का पता चलता है. लेकिन, इंफेक्शन या सूजन जैसी अन्य स्थितियां भी दिख सकती हैं.

सीधे शब्दों में कहें तो, PET स्कैन शरीर के उन हिस्सों को दिखाता है जहां कोशिकाएं बहुत ज्यादा एक्टिव होती हैं. यह कैंसर का पता लगाने में खास तौर पर उपयोगी है, क्योंकि कैंसर कोशिकाएं बहुत एक्टिव होती हैं. PET स्कैन का इस्तेमाल आपके शरीर के टिशू और अंगों में दूसरी तरह की असामान्य एक्टिविटी का पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है. आप यह जांचने के लिए PET स्कैन करवा सकते हैं कि जो इलाज आपको मिल रहा है, वह कोशिकाओं की एक्टिविटी या ग्रोथ को धीमा करने में असरदार रहा है या नहीं. कैंसर, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों और हृदय संबंधी बीमारियों का आकलन करने के लिए अक्सर पीईटी स्कैन और सीटी स्कैन का एक साथ उपयोग किया जाता है.

दीपिका कक्कड़ ने इस टेस्ट की अहमियत बताई
दीपिका कक्कड़ ने हाल ही में अपने व्लॉग में बताया कि छह घंटे भूखे रहने के बाद उनका PET स्कैन हुआ, जो उनके लिए शारीरिक रूप से थकाने वाला और मानसिक रूप से डरावना अनुभव था. उन्होंने कहा कि हालांकि उन्हें उम्मीद थी कि रिपोर्ट्स नॉर्मल आएंगी, लेकिन स्कैन रूम की ठंडक, मशीन की आवाज और हर कुछ मिनट में नर्स के इंस्ट्रक्शन उन्हें यह याद दिलाते रहे कि वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रही हैं. इतने लंबे समय तक कुछ भी न खा पाने और कॉन्ट्रास्ट डाई इंजेक्शन की वजह से होने वाली परेशानी ने पूरे प्रोसेस को और भी मुश्किल बना दिया.

दीपिका कक्कड़ का कहना है कि PET स्कैन, कैंसर के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह शरीर के उन हिस्सों में गड़बड़ियों का पता लगाता है जिन्हें रेगुलर स्कैन शायद मिस कर दें। डॉक्टर इस टेस्ट का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए करते हैं कि ट्यूमर अपनी असली जगह तक ही सीमित है या दूसरे अंगों में फैल गया है. यह स्कैन कैंसर की स्टेज तय करने, सही इलाज चुनने और यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि आगे की कीमोथेरेपी या रेडिएशन जरूरी है या नहीं. इसलिए, कई मामलों में डॉक्टर इसे "रोडमैप टेस्ट" कहते हैं.

दीपिका का मानना ​​है कि यह टेस्ट हर कैंसर मरीज के लिए शुरुआती बायोप्सी जितना ही जरूरी है, क्योंकि सही जानकारी के बिना डॉक्टर सिर्फ अंदाजे के आधार पर बीमारी का इलाज नहीं कर सकते. वह अपने अनुभव से बताती हैं कि रिपोर्ट में भले ही सिर्फ एक लाइन लिखी हो, लेकिन उसके पीछे घंटों की चिंता, डर और उम्मीद छिपी होती है, जिसे सिर्फ वही समझ सकता है जिसने यह सब झेला हो. दीपिका लोगों से अपील करती हैं कि अगर डॉक्टर PET स्कैन करवाने की सलाह दें, तो घबराएं नहीं या उसे टालें नहीं, बल्कि इसे अपनी सेहत में एक इन्वेस्टमेंट समझें.

दीपिका ने फैंस को दी ये सलाह
वह अपने फैंस को यह भी बताती हैं कि टेक्नोलॉजी के अलावा, कैंसर मरीजों के लिए सबसे बड़ा सहारा इमोशनल सपोर्ट होता है. लंबे हॉस्पिटल की कतारों, इंश्योरेंस की चिंताओं और दवाइयों के साइड इफेक्ट्स के बीच, अगर परिवार यह समझ जाएं कि PET स्कैन जैसे टेस्ट सिर्फ बीमारी का पता लगाने के लिए नहीं, बल्कि इलाज को सही दिशा देने के लिए भी होते हैं, तो मरीज का आधा डर खत्म हो जाता है. दीपिका उम्मीद करती हैं कि उनकी कहानी सुनने के बाद कोई भी पेट दर्द, थकान या दूसरे अजीब लक्षणों को हल्के में नहीं लेगा और समय पर टेस्ट करवाएगा, ताकि उन्हें जिंदगी को दूसरा मौका देने का चांस मिल सके.

(डिस्क्लेमर- इस रिपोर्ट से जुड़ी सभी हेल्थ जानकारी और सलाह सिर्फ जानकारी के लिए हैं. हम यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दे रहे हैं. लेकिन, इस जानकारी पर अमल करने से पहले कृपया अपने पर्सनल डॉक्टर से सलाह लें.)

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