क्या सच में संक्रमण से फैलता Cancer? भारत में 1.9 लाख कैंसर केस संक्रमण से जुड़े पाए गए, स्टडी में खुलासा
WHO की नई रिसर्च के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में कैंसर के कुल मामलों में से लगभग 12 फीसदी मामले किसी न किसी इन्फेक्शन...

Published : October 2, 2026 at 4:09 PM IST
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की 'इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर' (WHO-IARC) की एक नई स्टडी के अनुसार, भारत में हर साल कैंसर के लगभग 1,90,000 नए मामले इन्फेक्शन की वजह से होते हैं. 2024 में भारत में कैंसर के अनुमानित 15.62 लाख (1.56 मिलियन) नए मामले सामने आए, जिसका मतलब है कि उस साल कैंसर के सभी नए मामलों में से 12 फीसदी से ज्यादा मामले संक्रमण से जुड़े थे. स्टडी का अनुमान है कि दुनिया भर में संक्रमण की वजह से कैंसर के लगभग 23 लाख (2.3 मिलियन) नए मामले सामने आए.
रिसर्चर ने 12 ऐसे संक्रामक एजेंटों की जांच की जिन्हें 'ग्रुप 1 कार्सिनोजेन' के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, यानी ऐसे पदार्थ जिनके बारे में पर्याप्त सबूत हैं कि वे इंसानों में कैंसर का कारण बन सकते हैं. इनमें ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV), हेलिकोबैक्टर पाइलोरी, हेपेटाइटिस B और C वायरस, एपस्टीन-बार वायरस (EBV), ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) और कपोसी सारकोमा-एसोसिएटेड हर्पीसवायरस के साथ-साथ अन्य संक्रामक और परजीवी एजेंट शामिल हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में कैंसर के लगभग 15 फीसदी से 20 फीसदी मामलों के लिए संक्रमण (चाहे वह वायरल, बैक्टीरियल या परजीवी हो) जिम्मेदार होते हैं.
हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस स्टडी का मतलब यह नहीं है कि 1,90,000 लोगों को बस इन्फेक्शन हुआ और उसके बाद उन्हें कैंसर हो गया. स्टडी के अनुसार, इन्फेक्शन कई तरह से कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं. कुछ वायरस सीधे सेलुलर प्रक्रियाओं में दखल दे सकते हैं, जबकि लंबे समय तक रहने वाले इन्फेक्शन से लगातार सूजन, टिश्यू को नुकसान और ऐसे बदलाव हो सकते हैं जो सालों में कैंसर के पनपने में योगदान दे सकते हैं.
भारत में सबसे ज्यादा इन्फेक्शन HPV से होते हैं
भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है. इससे 1,00,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें से ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर के हैं. वैक्सीनेशन और रेगुलर स्क्रीनिंग से HPV से होने वाले सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है.
अन्य मुख्य वजहों में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) शामिल है, जिससे लगभग 47,000 मामले (मुख्य रूप से गैस्ट्रिक कैंसर) जुड़े हैं. एपस्टीन-बार वायरस से लगभग 22,000 मामले जुड़े थे, जबकि हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C वायरस क्रमशः लगभग 10,000 और 5,300 मामलों के लिए जिम्मेदार थे. गौरतलब है कि क्रोनिक हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C संक्रमण मुख्य रूप से लिवर कैंसर, खासकर हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा से जुड़े हैं.
इन्फेक्शन से कैसे होता है कैंसर?
- एपस्टीन-बार वायरस (EBV) एक बहुत आम वायरल इन्फेक्शन है जो लार और शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है.EBV के ज्यादातर मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखते. कुछ मामलों में, खासकर किशोरों और युवा वयस्कों में, इससे इन्फेक्शियस मोनो न्यूक्लियोसिस हो सकता है. एक बार EBV का इन्फेक्शन होने पर, यह वायरस आपके शरीर में जीवन भर सुप्त अवस्था में रहता है, यानी यह निष्क्रिय या सोई हुई हालत में रहता है. वायरस के दोबारा सक्रिय होने पर लक्षण फिर से दिख सकते हैं, चाहे आपको यह वायरस कभी भी हुआ हो.
- यह वायरस मुख्य रूप से गले के ऊपरी हिस्से और नाक के पिछले हिस्से (नेसोफैरिंग्स) के कैंसर से जुड़ा है. यह व्हाइट ब्लड सेल्स और लिम्फैटिक सिस्टम को प्रभावित करने वाले कैंसर, जैसे कि बर्किट लिंफोमा और हॉजकिन लिंफोमा का खतरा बढ़ा सकता है. हाल की स्टडीज में पेट, लिवर और फेफड़ों के कैंसर से भी इसके संभावित संबंध का संकेत मिला है.
- ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) वह वायरस है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है और अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह एड्स (AIDS) का कारण बनता है. इसके अलावा, इससे कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
- कापोसी सार्कोमा-एसोसिएटेड हर्पीसवायरस (KSHV), जिसे ह्यूमन हर्पीसवायरस 8 (HHV-8) के नाम से भी जाना जाता है, एक तरह का वायरस है जो कापोसी सार्कोमा नाम का एक दुर्लभ कैंसर और कुछ अन्य गंभीर बीमारियां पैदा करता है.
सोर्स-
https://www.thelancet.com/journals/lanonc/home
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.)

