शरीर में कैंसर सेल्स के फैलाव को रोक सकती है वियाग्रा, वैज्ञानिकों से जानें कैसे?
वियाग्रा में मौजूद एक्टिव इंग्रीडिएंट सिल्डेनाफिल कैंसर मेटास्टेसिस को रोक सकता है. इस रिपोर्ट में डिटेल्स पढ़ें...

Published : August 4, 2026 at 1:35 PM IST
वियाग्रा मुख्य रूप से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (लिंग में तनाव न आने की समस्या) के इलाज के लिए जानी जाती है, लेकिन अब शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके एक्टिव इंग्रीडिएंट, सिल्डेनाफिल, का इस्तेमाल कैंसर को फैलने से रोकने के लिए किया जा सकता है. हाल ही में कैंसर रिसर्च जर्नल में छपी एक स्टडी से पता चलता है कि यह दवा कैंसर के मेटास्टेसिस (कैंसर का शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलना) को धीमा करने में मदद कर सकती है. यह रिसर्च इजराइल में क्लैलिट हेल्थ सर्विसेज के सहयोग से वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने की थी.
यह कैसे काम करती है
ट्यूमर सेल्स मुख्य ट्यूमर से अलग होने, शरीर में घूमने और दूसरे अंगों में फैलने के लिए काफी हद तक कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर करती हैं. सिल्डेनाफिल सेल के अंदर कोलेस्ट्रॉल को ले जाने वाले प्रोटीन को ब्लॉक या रोक देता है. नतीजतन, कैंसर सेल्स को अपनी बाहरी झिल्ली (मेम्ब्रेन) बनाए रखने के लिए जरूरी कोलेस्ट्रॉल नहीं मिल पाता, जिससे उनका फैलना मुश्किल हो जाता है.
इसके अलावा, रिसर्च में पाया गया कि जब सिल्डेनाफिल को स्टैटिन (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली आम दवाएं) के साथ मिलाया जाता है, तो दवा की असरदार क्षमता बढ़ जाती है. यह कॉम्बिनेशन कैंसर सेल्स को मौजूदा कोलेस्ट्रॉल का इस्तेमाल करने या नया कोलेस्ट्रॉल बनाने से रोकता है. हालांकि ये नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि रिसर्च अभी शुरुआती दौर में है. इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना वियाग्रा लेना शुरू कर देना चाहिए.
रिसर्च क्या कहती है?
कैंसर सेल्स और चूहों पर लैब में किए गए काम के साथ-साथ, रिसर्चर्स ने 20 से ज्यादा सालों के दौरान लगभग 50 लाख लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड का एनालिसिस कियाय इस ग्रुप में कैंसर से पीड़ित 40,000 से ज्यादा पुरुष शामिल थे. टीम ने पाया कि जिन पुरुषों ने कैंसर का पता चलने से पहले वियाग्रा का इस्तेमाल किया था, उनके बचने की दर (सर्वाइवल रेट) उन लोगों की तुलना में बेहतर थी जिन्होंने इसका इस्तेमाल नहीं किया था. जिन पुरुषों ने सिल्डेनाफिल और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टेटिन, दोनों ली थीं, उनमें बचने की दर और भी बेहतर थी. हालांकि, इस स्टडी से यह साबित नहीं हुआ कि बेहतर नतीजे सीधे तौर पर वियाग्रा की वजह से ही मिले थे.
क्या कहते हैं वैज्ञानिक और हेल्थ एक्सपर्ट्स?
रिसर्चर का कहना है कि नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं, लेकिन इसे कैंसर के नए इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. वैज्ञानिक और हेल्थ एक्सपर्ट्स साफ तौर पर कहते हैं कि इसे अभी कैंसर का साबित हो चुका इलाज नहीं माना जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. मरीजों को डॉक्टर से सलाह लिए बिना कैंसर से बचाव या इलाज के लिए वियाग्रा लेना शुरू नहीं करना चाहिए. सिल्डेनाफिल (sildenafil) के कैंसर के स्टैंडर्ड इलाज का हिस्सा बनने से पहले बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है. चूंकि इस स्टडी में मुख्य रूप से पुरुष शामिल थे, इसलिए यह साफ नहीं है कि महिलाओं पर भी इसका वैसा ही असर होगा या नहीं.
यह ध्यान देने वाली बात है कि वियाग्रा असल में हाई ब्लड प्रेशर और सीने में दर्द के इलाज के लिए बनाया गया था, जो दिल में खून के बहाव में कमी की वजह से होता है, लेकिन पिछले तीन दशकों में यह इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए दुनिया की सबसे जानी-मानी थेरेपी बन गई है. अब, कैंसर के इलाज के लिए इसे दोबारा इस्तेमाल करने की संभावना तलाशने पर काम चल रहा है.
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.)

