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क्या शरीर में बिना किसी लक्षण के बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल का लेवल? इसका पता कैसे लगाया जा सकता है? जानें

हाई कोलेस्ट्रॉल एक बेहद खतरनाक और गंभीर समस्या है, जो बिना किसी लक्षण के शरीर में चुपचाप बढ़ जाता है. शरीर में इसका लेवल ज्यादा...

Can high cholesterol levels in the body occur without any symptoms? How can this be detected?
क्या शरीर में बिना किसी लक्षण के बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल का लेवल? इसका पता कैसे लगाया जा सकता है? जानें (GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Health Team

Published : March 3, 2026 at 12:30 PM IST

5 Min Read
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कोलेस्ट्रॉल एक चिपचिपा पदार्थ है जो खून की नसों को बंद कर देता है. जिसे हमारी बॉडी भी बनाती है और डाइट से भी बनता है. कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है. एक अच्छा कोलेस्ट्रॉल, जिसे HDL कोलेस्ट्रॉल कहते हैं. दूसरा बुरा कोलेस्ट्रॉल, जिसे LDL कोलेस्ट्रॉल कहते हैं. कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है. यह हमारे शरीर को हॉर्मोन बनाने, सेल मेम्ब्रेन को मजबूत करने और विटामिन D बनाने में मदद करता है. लेकिन शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

हाई कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर या साइलेंट डिजीज कहा जाता है क्योंकि जब तक यह गंभीर न हो जाए, तब तक इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखते. यानी, कोलेस्ट्रॉल (खासकर LDL) के बढ़ने से आमतौर पर दर्द या थकान जैसे साफ लक्षण नहीं दिखते. यह एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें खराब कोलेस्ट्रॉल आपकी आर्टरीज की दीवारों में जमा हो जाता है, जिससे प्लाक बनता है, इस कंडीशन को एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं. जब आपकी नसों में खून का बहाव बहुत ज्यादा रुक जाता है, तो सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या पैरों में दर्द जैसे लक्षण दिख सकते हैं. इसलिए लक्षण दिखने का इंतजार न करें.

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी एक स्टडी के मुताबिक, बहुत से मरीजों को पता ही नहीं होता कि उन्हें कोलेस्ट्रॉल की समस्या है. बहुत से लोगों को हार्ट अटैक या स्ट्रोक के बाद ही पता चलता है कि उन्हें हाई कोलेस्ट्रॉल है. इसका मतलब है कि हालत पहले से ही कंट्रोल से बाहर हो सकती है.

लक्षण किन हालात में दिखते हैं?
कुछ लोगों में फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया नाम की एक जेनेटिक कंडीशन होती है, जिससे बहुत कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है. इसका मतलब है कि जेनेटिक डिफेक्ट की वजह से, उनमें जन्म से ही बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होता है. सिर्फ ऐसे मामलों में ही कुछ बाहरी लक्षण दिखने की संभावना होती है, जैसे कि चर्बी वाली गांठें, आंखों के आस-पास सफेद घेरे, पलकों पर चर्बी, सीने में दर्द और कम उम्र में दिल की समस्याएं.

कोलेस्ट्रॉल असल में कैसे बढ़ता है?
कोलेस्ट्रॉल खून में दो तरह से पाया जाता है. एक अंदरूनी, मतलब यह लिवर खुद बनाता है. दूसरा बाहरी, मतलब यह खाने से मिलता है. मीट, मछली, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट जैसे जानवरों से मिलने वाले प्रोडक्ट ज्यादा खाने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है. अंडे की सफेदी में कोलेस्ट्रॉल और फैट बिल्कुल नहीं होता है. यह मुख्य रूप से प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. लेकिन पीले हिस्से को ज्यादा खाने से बचें.

कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने पर क्या होता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब शरीर में LDL कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होता है, तो यह खून की नसों (आर्टरी) की दीवारों से चिपकने लगता है. धीरे-धीरे, यह प्लाक नाम की एक सख्त परत बनाता है. इससे आर्टरी पतली और सख्त हो जाती हैं. आर्टरी पतली होने से दिल और दिमाग जैसे जरूरी अंगों तक खून कम पहुंचता है. इससे हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. पैरों में दर्द और किडनी की समस्याएं भी हो सकती हैं. हालांकि, डॉक्टर सलाह देते हैं कि कुछ खास बीमारियों वाले लोगों को लिपिड प्रोफाइल टेस्ट हर साल या 6 महीने में एक बार जरूर करवाना चाहिए.

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट किसे करवाना चाहिए?

  • डायबिटीज वाले लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
  • मोटापे वाले लोग
  • स्मोकिंग करने वाले लोग
  • अगर परिवार में किसी को कम उम्र में दिल की बीमारी की हिस्ट्री रही हो.

सावधानियां

बैलेंस्ड डाइट: मीट और फैटी डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कम करें. फाइबर से भरपूर खाना खाएं. अपनी डाइट में ओट्स, दाल, सेब और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करें.

तेज चलना: चलना सेहत के लिए अच्छा है. रोजाना कम से कम तीस मिनट तेज चलने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहेगा और गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ेगा.

एक्सरसाइज: हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है.

लिपिड प्रोफाइल टेस्टिंग: समय-समय पर अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं.

ध्यान दें: हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नहीं दिख सकते हैं. इसलिए, डॉक्टर सलाह देते हैं कि इसका पता लगाने का एकमात्र तरीका रेगुलर ब्लड टेस्ट है.

(डिस्क्लेमर- यहां दी गई सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सलाह केवल जानकारी के लिए है. यह जानकारी वैज्ञानिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है. इन निर्देशों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.)

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