प्रेगनेंसी के दौरान तेज बीप को नजरअंदाज न करें, हो सकता है जानलेव प्रीक्लेम्पसिया, AIIMS के डॉक्टरों ने दी चेतावनी
प्रीक्लेम्पसिया प्रेग्नेंसी की एक कॉम्प्लिकेशन है. इसमें, आपको हाई ब्लड प्रेशर, यूरिन में प्रोटीन का हाई लेवल जो किडनी डैमेज (प्रोटीन्यूरिया) दिखाता है...

Published : May 23, 2026 at 1:00 PM IST
प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली गंभीर बीमारी प्रीक्लेम्पसिया को लेकर AIIMS दिल्ली ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. वर्ल्ड प्रीक्लेम्पसिया डे के मौके पर हुए एक इवेंट में डॉक्टरों ने कहा कि समय पर डायग्नोसिस और सही इलाज से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है. AIIMS दिल्ली के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा ऑर्गनाइज किए गए प्रोग्राम के दौरान, मेडिकल एक्सपर्ट्स ने बताया कि प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद होने वाली एक गंभीर स्थिति है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ किडनी या लिवर जैसे अंगों के प्रभावित होने के लक्षण दिखाई देते हैं. इसका इलाज न होने पर मां और शिशु दोनों की जान को खतरा हो सकता है.
प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर बीमारी है जो प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते के बाद होती है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर और अंगों (जैसे लिवर और किडनी) को नुकसान होता है. यह मातृ एवं नवजात शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, क्योंकि इससे स्ट्रोक, दौरे (एक्लेम्पसिया) और समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है. मतलब, बच्चे की जल्दी डिलीवरी की अक्सर सलाह दी जाती है. हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मातृ मृत्यु दर में काफी कमी की आई है, लेकिन फिर भी समय पर डायग्नोसिस और सही इलाज जरूरी है. विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस के अवसर पर बोलते हुए, एम्स दिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के विशेषज्ञों ने कहा कि यह स्थिति अक्सर गर्भावस्था के दौरान चुपचाप विकसित होती है और यदि समय पर इसका पता नहीं लगाया जाता है तो यह जानलेवा हो सकती है.

AIIMS के डॉक्टरों के अनुसार, भारत का मैटरनल मॉर्टेलिटी रेश्यो (MMR) अब घटकर लगभग 88 प्रति लाख जीवित जन्म हो गया है. हालांकि, प्रीक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति) अभी भी गर्भवती महिलाओं में समय से पहले (प्रीटर्म) जन्म का तीसरा प्रमुख कारण है. डॉ. नीना मल्होत्रा ने कहा कि प्री-एक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसका पता जल्दी लगाया जा सकता है, इसे रोका जा सकता है और इसका इलाज भी किया जा सकता है. लेकिन, इसके लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की निगरानी करना सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि प्रीक्लेम्पसिया की समय पर पहचान बहुत जरूरी है. अगर समय पर शुरुआती डायग्नोसिस हो जाए तो मां और बच्चे दोनों को गंभीर कॉम्प्लीकेशंस से बचाया जा सकता है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रेग्नेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में स्क्रीनिंग से इस कंडीशन के रिस्क का पहले पता लगाया जा सकता है. कम डोज वाली एस्पिरिन को ज्यादा जोखिम वाली महिलाओं के लिए भी असरदार माना जाता है. डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि लगातार सिरदर्द, हाथों और पैरों में सूजन, धुंधला दिखाई देना और ब्लड प्रेशर में अचानक बढ़ोतरी जैसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, और उन्हें सामान्य बातें समझ लेती हैं. इसलिए, प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही एम्स के विशेषज्ञों डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत अस्पताल से संपर्क करने की अपील की है.
प्रीक्लेम्पसिया के लक्षण
- हाई ब्लड प्रेशर के साथ, प्रीक्लेम्पसिया के संकेतों और लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं...
- यूरिन में ज्यादा प्रोटीन (प्रोटीन्यूरिया) या किडनी की समस्याओं के दूसरे लक्षण
- खून में प्लेटलेट्स का लेवल कम होना (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया)
- लिवर एंजाइम का बढ़ना जो लिवर की समस्याओं का संकेत देते हैं
- तेज सिरदर्द
- नजर में बदलाव, जिसमें कुछ समय के लिए नज़र कम होना, धुंधला दिखना या रोशनी के प्रति सेंसिटिविटी शामिल है
- फेफड़ों में पानी की वजह से सांस लेने में तकलीफ
- पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, आमतौर पर दाईं ओर पसलियों के नीचे
- मतली या उल्टी
- स्वस्थ प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना और सूजन (एडिमा) होना आम बात है. हालांकि, अचानक वजन बढ़ना या अचानक एडिमा दिखना (खासकर आपके चेहरे और हाथों में) प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है.
रिस्क फैक्टर
- जिन कंडीशन से प्रीक्लेम्पसिया का खतरा ज्यादा होता है, उनमें ये शामिल हैं
- पिछली प्रेग्नेंसी में प्रीक्लेम्पसिया
- एक से ज्यादा बच्चों के साथ प्रेग्नेंट होना
- क्रोनिक हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन)
- प्रेग्नेंसी से पहले टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज
- किडनी की बीमारी
- ऑटोइम्यून डिसऑर्डर
- इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का इस्तेमाल
- जिन कंडीशन से प्रीक्लेम्पसिया होने का थोड़ा खतरा होता है, उनमें ये शामिल हैं
- मोटापा
- प्रीक्लेम्पसिया की फैमिली हिस्ट्री
- मां की उम्र 35 साल या उससे अधिक होना
- पिछली प्रेग्नेंसी में कॉम्प्लीकेशन
- पिछली प्रेग्नेंसी को 10 साल से ज्यादा हो गए हैं
(डिस्क्लेमर: इस वेबसाइट पर आपको प्रदान की गई सभी स्वास्थ्य जानकारी, चिकित्सा सुझाव केवल आपकी जानकारी के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक अनुसंधान, अध्ययन, चिकित्सा और स्वास्थ्य पेशेवर सलाह के आधार पर प्रदान कर रहे हैं, लेकिन बेहतर होगा कि इन पर अमल करने से पहले आप अपने निजी डॉक्टर की सलाह ले लें.)

