ये हैं बिहार के 'धुरंधर सिंगर' कुमार सत्यम.. परिवार की 13वीं पीढ़ी के गजल गायक
बिहार के बांका के एक छोटे से गांव से निकलकर संगीत की दुनिया में छा जाने वाले कुमार सत्यम से बृजम पांडे ने बातचीत की.

Published : July 4, 2026 at 12:22 PM IST
पटना: कुमार सत्यम आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. भारत के एक बेहद लोकप्रिय और प्रख्यात युवा संगीतकार और गजल गायक हैं, जो मुख्य रूप से गजल, सूफी, कव्वाली, भजन और उप-शास्त्रीय संगीत के लिए जाने जाते हैं, कुमार सत्यम अपनी सुरीली आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुतियों के कारण देश-विदेश के संगीत प्रेमियों के बीच काफी चर्चित हैं. बिहार के बांका से लेकर दुनिया के पटल पर कैसे उन्होंने अपनी अलग और धुरंधर गीतकार के रूप में पहचान बनायी, विस्तार से जानें..
परिवार की 13वीं पीढ़ी के संगीतकार: कुमार सत्यम एक ऐसा नाम है जो इंडियन म्यूज़िक और एंटरटेनमेंट की दुनिया में गहराई से जुड़ा हुआ है. वे अपनी ज़बरदस्त आवाज़ और पारंपरिक गानों से दिल को छूने वाले जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं. गजल गायक कुमार सत्यम खानदानी गीतकार हैं और संगीत की परंपरा उनकी पारिवारिक विरासत है. 'तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है', गाने से लोकप्रिय हुए कुमार सत्यम ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में बताया कि वह अपने खानदान की 13वीं पीढ़ी हैं, जो संगीत की सेवा में हैं.

विरासत बचाने की कोशिश- कुमार सत्यम: उन्होंने कहा कि विरासत में संगीत की परंपरा है तो वह अपनी बुजुर्गों की शान को बचाने में लगे हुए हैं और जितना हो सकता है रियाज में मेहनत करते हैं. अच्छा गाने की कोशिश करते हैं. लोग पसंद करते हैं तो काफी अच्छा लगता है और खुद को संतुष्टि मिलती है.
बांका के छोटे से गांव में जन्म: म्यूज़िशियन के एक जाने-माने खानदान से आने वाले सत्यम भट्ट ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म बिहार के बांका ज़िले के गोकुला गांव में हुआ था. सत्यम को संगीत विरासत में मिली है. बिहार और झारखंड के प्रख्यात संगीतकार स्वर्गीय पंडित ललन जी महाराज के पुत्र और स्वर्गीय पंडित रामाशीष महाराज के पोते हैं. उन्होंने अपनी औपचारिक संगीत शिक्षा बचपन में ही अपने पिता और दादा से शुरू कर दी थी.
2012 में स्वर्ण पदक: अपनी शानदार सिंगिंग स्किल्स और हारमोनियम बजाने के लिए संगीत भास्कर (2012) में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था. कुमार सत्यम ने अपनी ज़िंदगी संगीत को समर्पित कर दी है. उनके हर गीत में अनोखी कलाकारी और इमोशनल गहरायी है.
2000 से ज्यादा स्टेज शो और लाइव कॉन्सर्ट: 2000 से ज़्यादा बार स्टेज पर परफ़ॉर्म कर चुके सत्यम ने पूरे भारत में कई जाने-माने इवेंट्स में परफ़ॉर्म किया है. उनकी परफ़ॉर्मेंस बहुत पसंद की जाती हैं, उन्होंने बैंगलोर में एग्रीप्लास्ट और पटना में क्यूरा फ़ार्मास्युटिकल जैसी बड़ी कंपनियों की होस्ट की हुई मशहूर जगहों पर दर्शकों को दिल जीता है.

इन मशहूर सांस्कृतिक महोत्सव में जीत चुके हैं फैन्स का दिल: बिहार महोत्सव, अवध महोत्सव, मैनपाट महोत्सव, मंदार महोत्सव, सिंहेश्वर महोत्सव, सोनपुर महोत्सव, अयोध्या महोत्सव और ओशो महोत्सव जैसे फ़ेस्टिवल में उनका ज़बरदस्त टैलेंट देखने को मिला है, जिससे वे देश के म्यूज़िकल लैंडस्केप में एक पसंदीदा हस्ती बन गए हैं. महान और आज के कलाकारों के साथ सत्यम के कोलेबोरेशन ने उनके आर्टिस्टिक कलेक्शन को और बेहतर बनाया है.
कई दिग्गजों के साथ मंच किया साझा: उन्होंने पंकज उधास, अनूप जलोटा, सोनू निगम और वडाली ब्रदर्स जैसे मशहूर नामों के साथ स्टेज शेयर किया है, जिससे म्यूज़िक इंडस्ट्री में उनका रुतबा और मज़बूत हुआ है. अपनी लाइव परफॉर्मेंस के अलावा, कुमार सत्यम ने यूट्यूब पर भी अपनी एक खास जगह बनाई है.

प्रसिद्ध गजल और गीत: कांच की चूड़ियां, याद-याद बस याद रह जाती है, लोग राहों में कांटे बिखरे रहे, भूल शायद ये हमसे बड़ी हो गई, खामोश लब हैं झुकी निगाहें.. अमीरी नई-नई है, वक्त का परिंदा आदि जैसी गजलों की दिल को छू लेने वाली गायकी ने बहुत सारे फॉलोअर्स बटोरे हैं. खानदानी रईस गाने ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया है.
पिता और दादा से संगीत की शिक्षा: ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने कहा, "मेरी खुशकिस्मती है कि इस परिवार में पैदा हुए हैं. संगीत अपने पिता और अपने दादाजी से सीखी है. संगीत में यही कहा जाता है कि आप यह प्लान नहीं कर सकते कि आप कब कौन सा हिट देने जा रहे हैं. लेकिन लोग पसंद करते हैं तो अच्छा लगता है. मेहंदी हसन और मिर्ज़ा ग़ालिब जैसे उस्तादों के शेर और गजल गाए हैं. बचपन से जो कुछ भी रियाज किया और म्यूजिक अच्छी रही जिसके चलते मेरे कुछ गजल काफी हिट हुए."
कुमार सत्यम गजल गायकी के बदलते पैटर्न और बदले हुए पैटर्न पर गजल को लोकप्रिय करने के लिए जाने जाते हैं. इस पर उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया टीम के लोग उनके गाने पर सर्वे करते हैं तो पता चलता है कि 16 से 30 वर्ष वाले श्रोताओं की संख्या अधिक है. उनके विषय ही गजल है तो जगजीत सिंह के जाने के बाद से जो एक गैप हो गया था, उसकी थोड़ी बहुत भरपाई हुई है और बुजुर्ग भी उनकी गजल को सुनना पसंद करते हैं. जेनजी जनरेशन थोड़ा कम सुनती है, लेकिन वह भी उनके गाने को सुनने लगी है.

मंच पर बैठकर गाने की परंपरा बरकरार: गजल के अलावा आधुनिक दौर के गीत वह नहीं गाते हैं और स्टेज पर खड़े होकर परफॉर्म नहीं करते हैं. इस पर उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि जो उनकी विधा है उसी पर उन्हें काम करना चाहिए. मगरमच्छ को अगर आप पेड़ पर चढ़ाएंगे तो वह नहीं चढ़ पाएगा.
"सबका अपना दायरा है और वह अपना दायरा जानते हैं. नयापन जरूरी है लेकिन आज भी बैठकर गाना पसंद करते हैं और यह पीढ़ी से चली आ रही है और आगे भी मेरे बाद कोई बैठकर गाने वाला गायक रहेगा. पॉप गाने वाले भी गायक होते हैं, गजल वाले भी गायक होते हैं और हर गायन की अलग शैली होती है."- कुमार सत्यम,गजल गायक
स्कूलों में बतौर म्यूजिक टीचर किया काम: कुमार सत्यम बांका से निकलकर मुंबई कैसे पहुंचे इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह 2009 में ही घर से बाहर निकल चुके थे. इसके बाद कुछ स्कूलों में वह म्यूजिक टीचर के तौर पर काम किए. वह 12वीं करने के बाद घर से निकल गए थे और म्यूजिक टीचर का काम करने लगे थे.
सरकार से की ये मांग: कुमार सत्यम ने आगे कहा कि स्कूलों में म्यूजिक टीचर का काम एक सलाई रिंच की तरह होता है. कभी इंग्लिश पढ़ाने के लिए भेज दिया जाता है तो कभी खेल कूद कराने के लिए भेज दिया जाता है. क्लास में रोज म्यूजिक का क्लास भी नहीं होता है. हंसते हुए उन्होंने कहा कि वह तो सरकार से यही कहेंगे कि म्यूजिक टीचर से सिर्फ म्यूजिक क्लास ही करवाया जाए.
राजीव अंकल ने बदल दी जिंदगी: उन्होंने कहा कि साल 2014-15 की बात है, वह स्कूल से छुट्टी लेकर पटना में एक कंसर्ट के लिए आए हुए थे. यहां एक उद्योगपति और उनके पिता के करीबी शख्स राजीव अंकल ने उनसे कहा कि वह जो कर रहे हैं ठीक है, लेकिन वह कहीं पढ़ाने के लिए नहीं बल्कि म्यूजिक के लिए बने हुए हैं. मेरे इस मुकाम तक पहुंचने में उनका बहुत बड़ा योगदान है.
संगीत के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी: सत्यम बतात हैं कि राजीव अंकल ने बेंगलुरु आने का निमंत्रण दिया जिसके बाद वह उनके बुलावे पर बेंगलुरु चले गए. उन्होंने बहुत सपोर्ट किया और बहुत जगह कंसर्ट कराया. इसके बाद उन्होंने कहा कि अब तुम मुंबई निकल जाओ तो वह मुंबई चले गए. इस दौरान उन्हें पता चला कि सेंट्रल गवर्नमेंट के नवोदय का जो उन्होंने फॉर्म भरा था, वह क्वालीफाई कर गए हैं लेकिन उन्होंने तय किया कि जब वह मुंबई आ गए हैं तो जो होगा देखा जाएगा.
मां के बहुत करीब हैं गजल गायक: कुमार सत्यम ने कहा कि मैं अपनी मां के बहुत करीब हूं. माता जी और भाई बहनों ने कभी कोई दबाव नहीं डाला और उन्हें काम करने के लिए कभी प्रेशर नहीं दिया. उन्होंने कहा कि मेरी जिंदगी में मेरी मां के अलावा राजीव अंकल की खास जगह है. मेरी सफलता की जो चमक उन दोनों की आंखों में दिखाई देती है और किसी के आंखों में नहीं दिखता है.
कुमार सत्यम को किस बात से लगता है डर?: उन्होंने बताया कि उन्हें फ्लाइट का फियर है. इसके कारण वह विदेश यात्रा नहीं करते हैं. अगर वह नींद की गोली खाकर भी सो जाए तो सपने वही आते हैं कि फ्लाइट क्रैश हो रहा है. वह उम्मीद करेंगे कि जल्द यहां डर समाप्त हो और आने वाले समय में विदेश के भी कंसर्ट करें.

PM मोदी की जमकर की तारीफ: कुमार सत्यम ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की और उनके लिए भी गीत पेश किया. उन्होंने मेरी निगाहों से दूर मत जा..सुकून बनकर दिल में आ जा.. गाया. इस दौरान उन्होंने पीएम के द्वारा किए गाए कार्यों को सराहा.
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