54 साल बाद 4K में लौटेगी मीना कुमारी की 'पाकीजा', लंदन फिल्म फेस्टिवल में होगी स्पेशल स्क्रीनिंग
कमाल अमरोही की 'पाकीजा' (1972) एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी पुरानी भव्यता के साथ लौटने को तैयार है.

By ETV Bharat Entertainment Team
Published : September 2, 2026 at 7:16 PM IST
हैदराबाद: कमाल अमरोही की 1972 की क्लासिक फिल्म 'पाकीज' अब 4K रिस्टोरेशन के बाद एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटने वाली है. फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर फ्रांस के फेस्टिवल लुमिएर, लियोन में होगा. इसके बाद फिल्म को बीएफआई लंदन फिल्म फेस्टिवल में गाला स्क्रीनिंग के लिए प्रदर्शित किया जाएगा. लंदन में फिल्म की स्क्रीनिंग बीएफआई आईमैक्स में होगी.
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (FHF) ने अमरोही परिवार के सहयोग से फिल्म को रिस्टोर किया है.'पाकीजा' के रिस्टोरेशन में टीम को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा. फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के डायरेक्टर शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर के अनुसार, 2024 में जांच के दौरान फिल्म का ओरिजिनल कैमरा निगेटिव लगभग पिघला हुआ मिला और इस्तेमाल के लायक नहीं था.

फिल्म के बाकी हिस्से अच्छी हालत में नहीं थे. उनके रंग फीके पड़ गए थे. उन पर खरोंचें थीं और फफूंद लगी हुई थी. दो साल की मेहनत के दौरान इन सभी चीजों को हटाया गया. पुराने फिल्म स्टिल्स और अमरोही परिवार की यादों के आधार पर मूल रंगों और विजुअल स्टाइल को भी दोबारा तैयार किया गया. फिल्म के ऑडियो को भी 5.1 सराउंड साउंड में रिस्टोर किया गया है.
कमाल अमरोही की बेटी रुखसार अमरोही कहती हैं, 'पाकीजा मेरे पिता का जुनून, उनका सपना और उनकी जिंदगी का मकसद थी. पाकीजा का रोल 'छोटी अम्मी' (मीना कुमारी) के अलावा कोई और नहीं कर सकता था. वही पाकीजा थीं. मेरे पिता ने इस फिल्म को पंद्रह साल से ज्यादा समय तक किसी बच्चे की तरह पाला-पोसा, जब तक कि यह पूरी तरह तैयार होकर दुनिया के सामने आने लायक नहीं हो गई. तेरह साल की उम्र में, मैंने अपने पिता को कई कुर्बानियां देते और अपने सपने को सच करने के लिए लगभग नामुमकिन चुनौतियों के बावजूद लगातार मेहनत और परफेक्शन के साथ काम करते देखा. मैंने अमरोहा में मौजूद उनकी विरासत की हर चीज को संभालकर रखा है, लेकिन सालों तक मुझे लगा कि सिनेमा के एक महान उस्ताद के तौर पर मेरे पिता की विरासत को भुला दिया गया है. मैं शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, जिन्होंने इतने प्यार और देखभाल के साथ पाकीजा को रिस्टोर करने की पहल की. काश मेरे पिता आज जिंदा होते और अपनी बनाई फिल्म को रिलीज होने के 54 साल बाद दुनिया के सामने फिर से नई शक्ल में देख पाते. मैं रिस्टोर की गई फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बहुत उत्साहित हूं और फिल्म को पेश करने के लिए लंदन जा रही हूं.'

'पाकीजा' का निर्माण करीब 15 सालों तक चला था. 1956 में शुरू हुई फिल्म की शूटिंग कई कारणों से लंबे समय तक बाधित रही. 1969 में सुनील दत्त और नरगिस की पहल के बाद फिल्म का काम दोबारा शुरू हुआ और 4 फरवरी 1972 को यह रिलीज हुई.
मीना कुमारी ने फिल्म में साहिबजान का यादगार किरदार निभाया था. रिलीज के कुछ ही सप्ताह बाद 31 मार्च 1972 को उनके निधन ने फिल्म को एक भावनात्मक विरासत में बदल दिया. आज 'पाकीजा' भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है.

