91 साल के अभिनेता प्रेम चोपड़ा की जान बचाई जयपुर के डॉक्टर ने, बिना सर्जरी बदला हार्ट वॉल्व
जयपुर के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवीन्द्र सिंह राव ने अभिनेता प्रेम चोपड़ा की सर्जरी की है.

Published : December 10, 2025 at 2:28 PM IST
|Updated : December 10, 2025 at 3:26 PM IST
जयपुर : हिंदी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता प्रेम चोपड़ा दिल की बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके बाद उनकी जान जयपुर के चिकित्सक ने बचाई है. अभिनेता प्रेम चोपड़ा के दिल का वॉल्व बदला गया है और टावी तकनीकी से उनके दिल का इलाज किया गया. उनका ऑपरेशन मुंबई के एक निजी अस्पताल में किया गया और ऑपरेशन सफल रहा. यह ऑपरेशन जयपुर के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवीन्द्र सिंह राव ने किया.
डॉ. रवीन्द्र राव देश में दिल की वॉल्व से जुड़ी बीमारियों के ऐसे विशेषज्ञ माने जाते हैं, जिन्होंने कई जटिल मामलों में टावी का सफल उपचार किया है. डॉ. रवीन्द्र सिंह राव ने बताया कि प्रेम चोपड़ा को उम्र बढ़ने के कारण हार्ट के वॉल्व में सिकुड़न की समस्या थी, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी और कमजोरी बढ़ रही थी. उम्र अधिक होने के कारण उनकी ओपन सर्जरी संभव नहीं थी, इसीलिए नॉन सर्जिकल तकनीक से उनके हार्ट के एओर्टिक वॉल्व को बदला गया. प्रोसीजर के बाद उनकी हालत ठीक बताई गई है.
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बिना ओपन हार्ट सर्जरी : डॉ. राव ने बताया कि उन्हें गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस की समस्या थी और उनका ऑपरेशन बिना ओपन हार्ट सर्जरी किया गया, जिसे टावी तकनीकी कहा जाता है. प्रेम चोपड़ा के दामाद और अभिनेता शर्मन जोशी, अभिनेता जितेंद्र भी अस्पताल में मौजूद रहे. डॉ. रवीन्द्र सिंह राव का कहना है कि देश में बढ़ती उम्र के लोगों में दिल की वॉल्व खराब होने की समस्या बढ़ रही है. ऐसे में समय रहते जांच और उचित उपचार, खासकर टावी जैसा तरीका, जीवन बचाने में बहुत मदद करता है.

बिना सर्जरी के वॉल्व रिप्लेसमेंट : डॉ. राव ने बताया कि टावी एक आधुनिक तरीका है, जिसमें बिना सीना चीरे नई वॉल्व लगाई जाती है. इसमें शरीर के किसी हिस्से से पतली नली अंदर ले जाकर खराब वॉल्व की जगह नई वॉल्व लगा दी जाती है, यानी बड़ा चीरा, ज्यादा दर्द या लंबी बेहोशी की जरूरत नहीं होती. अधिक उम्र में सामान्य दिल की सर्जरी का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए टावी अधिक सुरक्षित माना जाता है. इस उपचार से जल्दी आराम मिलता है, अस्पताल में कम दिन रहना पड़ता है, सांस फूलने और थकान में जल्दी सुधार होता है और मरीज जल्दी अपने कामकाज पर लौट सकता है.

