'बिहार को बॉलीवुड में कैरीकेचराइज किया गया', फिल्म निर्देशक का बहुत बड़ा बयान
अनुभव सिन्हा ने पटना में सेव-बुनिया और दही का स्वाद चखा. कहा समाज से जुड़ने, जानने के लिए छोटे-छोटे शहरों का दौरा कर रहे हैं.

Published : December 22, 2025 at 7:33 PM IST
पटना : अपनी फिल्मों के जरिए लोगों पर अमिट छाप छोड़ने वाले फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा देश के अलग-अलग शहरों का दौरा कर रहे हैं. इसी कड़ी में इन दिनों पटना पहुंचे हुए हैं. पटना में उन्होंने बिहार के विभिन्न व्यंजनों का भी लुफ्त लिया है. इसके अलावा कालिदास रंगालय में पहुंचकर रंगमंच के छात्रों के साथ संवाद किया और कलाकारों के सवालों का जवाब दिया.
अनुभव सिन्हा ने इस दौरान बताया कि पटना में वह सड़क पर अकेले पैदल निकल कर टहल रहे हैं. कई लोग भौचक होकर देख रहे हैं कि यह जाना पहचाना चेहरा है. कुछ लोग टोक रहे हैं और बातचीत हो रही है.
'बॉलीवुड में बिहार को किया गया कैरीकेचराइज' : अनुभव सिन्हा ने कहा कि वह मानते हैं कि बिहार को लेकर बॉलीवुड की फिल्मों में अधिक कैरीकेचराइज (किसी व्यक्ति या जगह का हास्यजनक चित्रण जो उसके आचरण को उपहास के रूप में बढ़ा चढ़ा कर पेश करना) किया गया है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं रहा है. बिहार के साथ अच्छी चीजें भी हुई है. बिहार में आकर काफी अच्छा लग रहा है और यहां के लोगों से जब मिलते हैं और बात करते हैं तो एक अलग अनुभव होता है. यहां सभी भाई भैया से संबोधन करते हैं और यही अपना बनता है.
'यात्रा के माध्यम से समाज से जुड़ने की कोशिश' : अनुभव सिन्हा ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में बताया कि समाज से जुड़ना और समाज को करीब से महसूस करना उन्हें अच्छा लगता है. समाज से वह थोड़े दूर हो गए थे इसलिए एक बार फिर से जुड़ने के लिए देश के अलग-अलग शहरों में जा रहे हैं. कोई अलग उद्देश्य नहीं है और ना किसी कहानी की तलाश में वह निकले हैं. उनके दिमाग में बहुत सारी कहानियां पहले से ही है.
''पटना कमाल है क्योंकि बिहार को वह पहले से जानते हैं. यहां के विभिन्न डिशेस को चख रहे हैं और सुबह से वह बहुत कुछ खा चुके हैं. मटन और अन्य कई सारे व्यंजन को चखा है.''- अनुभव सिन्हा, फिल्म निर्देशक
सेव, बुनिया और दही का स्वाद लाजवाब लगा : अनुभव सिन्हा ने बताया कि पटना की गलियों में जाकर चना कचौड़ी का भी लुत्फ लिया है. हनुमान मंदिर के पास एक नया डिश चखा है जो उन्हें काफी अच्छा लगा है. पहली बार सेव, बुनिया और दही को चखा और यह उन्हें बहुत अच्छा लगा. उन्होंने बताया कि बिहार को पहले से जानते हैं क्योंकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से हैं और उनकी बड़ी बहन की शादी भी पटना में ही हुई है. पहले के दिनों में पटना बहुत आना-जाना भी हुआ है. बिहार के उनके बहुत सारे दोस्त हैं और बिहार वाकई बेहद लाजवाब है.

'पुराने दुकान बंद होते हैं तो नये खुलते हैं' : अनुभव सिन्हा ने बताया कि छोटे शहरों में जरूर सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल कम हुए हैं लेकिन बड़े सिनेमा हॉल भी बन रहे हैं. आज फिल्में 600 करोड़ रुपए का बिजनेस कर रही है और अगर सिनेमा हॉल नहीं हो तो संभव कैसे है. कुछ सिनेमा हॉल बंद हुए हैं उन्हें दोबारा खोलना चाहिए.
''कुछ पुरानी दुकान बंद होती है तो नई दुकान खुलती है, यह भी मानना चाहिए. ऐसी बात नहीं है कि प्रलय की स्थिति है. हां, कुछ सिनेमा हॉल जो बंद हुए वह खुल जाएंगे तो बॉक्स ऑफिस का बाजार और बढ़ जाएगा.''- अनुभव सिन्हा, फिल्म निर्देशक
'बिहार पृष्ठभूमि की कहानी हो तो यहां करेंगे शूटिंग' : बिहार की फिल्म पॉलिसी और बिहार में फिल्मों के शूटिंग करने के संबंध में अनुभव सिन्हा ने कहा कि अभी उनके पास बिहार के पृष्ठभूमि पर कोई कहानी नहीं है. बिहार घूम रहे हैं और यदि उन्हें कहीं कोई कहानी मिल जाती है तो जरूर वह बिहार में फिल्म की शूटिंग करेंगे. बिहार के कुछ अन्य शहरों में भी जाना है जहां वह पहले नहीं गए हैं और हो सकता है कि वहां उन्हें कुछ नई कहानी मिल जाए.
कौन हैं अनुभव सिन्हा? : अनुभव सिन्हा भारतीय सिनेमा के एक प्रसिद्ध निर्देशक एवं पटकथा लेखक हैं. इनकी फिल्में मुख्यतः सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों पर केन्द्रित रहती हैं. इन्होंने 'मुल्क', 'आर्टिकल 15', 'थप्पड़', 'अनेक' और 'भीड़' जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया है, जो समसामयिक मुद्दों पर आधारित हैं.
इसके साथ ही, अनुभव सिन्हा ने 'तुम बिन'(2001), 'दस' (2005) और 'रा.वन'(2011) जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्में भी बनाई हैं. हाल ही में, इन्होंने 2024 में 'IC 814: द कंधार हाईजैक' वेब सीरीज का निर्माण किया, जिससे इन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
अनुभव सिन्हा का काम हमेशा से विविधता और कहानीकारी को दर्शाता रहा है. अनुभव कहते हैं कि शुरुआत उन्होंने तुम बिन जैसी कमर्शियल फिल्मों से किया लेकिन अब सीरियस फिल्में बनाने लगे हैं और 2018 से सीरियस फिल्म बनाने का सिलसिला शुरू हुआ. 2001 में उनकी पहली फिल्म आई थी तो उनका यही मानना है कि 18 वर्ष में वह फिल्मी दुनिया में व्यस्क हुए.
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