INTERVIEW: दिखता नहीं, पर सुर के पक्के हैं सुनील लोधी, 'हनुमान अंश' के गाने से बने स्टार, पढ़ें सिंगर के संघर्ष की कहानी
सुनील कुमार लोधी को बचपन से दिखाई नहीं देता है और नेत्रहीन होने के कारण पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी.

By ETV Bharat Entertainment Team
Published : September 1, 2026 at 5:18 PM IST
सागर: इंडियन बॉक्स ऑफिस पर इस वक्त बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' छाई हुई है. मामूली बजट में रिलीज हुई इस फिल्म ने अपनी लागत से कई गुना कमाई कर ली है. पूरे देश में इस फिल्म और इसके भजन की चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया हनुमान अंश के भजनों से गूंज रहा है. कमाल की बात तो यह है कि हनुमान अंश का एक भजन नेत्रहीन सिंगर सुनील कुमार लोधी ने गाया है, जो सबसे ज्यादा पॉपुलर है.
बचपन से नेत्रहीन सुनील लोधी ने कभी सोचा नहीं था कि इस कमी के साथ भगवान एक दिन उन्हें चमकता हुआ सितारा बना देंगे. सुनील ने ईश्वर पर विश्वास किया और अपनी कमी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. उनको बचपन से भजन और संगीत के प्रति लगाव था और ईश्वर ने उनके भजनों को ऐसा आशीर्वाद दिया कि आज वो गांव की चौपाल से गाकर फिल्मी दुनिया में छा गए हैं. 'हनुमान अंश' में सुनील ने 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' गाया, जो खूब सुर्खियां बटोर रहा है और लोगों को काफी पसंद भी आ रहा है. सोशल मीडिया पर इस भजन की रील वायरल हो रही हैं. इसी के चलते लोग सुनील से मिलने और उनके भजन सुनने के लिए बेताब हैं. ईटीवी भारत को दिए एक खास इंटरव्यू में सुनील लोधी ने अपने फर्श से अर्श तक के सफर को साझा किया है. साथ ही बताया कि उनकी किस्मत कैसे बदली.

बचपन से ही नेत्रहीन हैं सुनील
मध्य प्रदेश के सागर के एक छोटे से गांव अगरा के रहने वाले सुनील लोधी जन्म से ही नेत्रहीन है, लेकिन आज 'हनुमान अंश' में गाए अपने भजन के चलते वह देशभर में मशहूर हो गए. सुनील बताते हैं कि उनको बचपन से ही दिखाई नहीं देता है. उनके माता पिता चाहते थे कि उनकी आंखों की रोशनी वापस आ जाए. इसके चलते उन्होंने महंगे इलाज भी करवाए, लेकिन आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकी.

सुनील बताते हैं, 'मेरे माता पिता ने मेरा हर जगह इलाज कराया, लेकिन ईश्वर को मंजूर नहीं था. मैं दुनिया को अपनी आंखों से नहीं देख पाया. मेरे परिवार में माता पिता और दो भाई बहन हैं. महज दो एकड़ जमीन और पशुपालन से परिवार का गुजारा होता है. आर्थिक परेशानी और नेत्रहीन होने के कारण पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी, लेकिन जब मैंने ईश्वर में अपना मन रमाया, तो मानो मेरी दुनिया ही बदल गयी.

भजन की वजह से हुए लोकप्रिय
शुरुआती दौर में जब सुनील स्कूल जाते थे तो उन्हें भजन और गीत गाने का शौक था. उनके टीचर और साथी उनसे भजन और गाना सुनते और मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेते थे. धीरे-धीरे गांव में होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में उन्हें भजन गाने के लिए बुलाया जाने लगा. सुनील ने बताया, 'लोगों को मेरे भजन पसंद आए, तो फिर मैंने तमूरा बजाना सीखा और भजन मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया. आज मेरे और आसपास के गांव से लोग मुझे भजन गाने के लिए अपने साथ ले जाते हैं'.
कैसे बदली सुनील लोधी की किस्मत
सुनील बताते हैं, 'मेरी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब 2019 में मेरे पड़ोस में रहने वाली चाची ने मुझे यूट्यूबर रोहित साहू के बारे में बताया. रोहित चाची के गांव तालचिरी का है. उनका बुंदेली दुनिया नाम से यूट्यूब चैनल है और वह वीडियो अपलोड करते हैं'. वहीं, जब रोहित साहू अपनी बहन के घर अगरा पहुंचे, तो उनकी मुलाकात सुनील से हुई. रोहित ने सुनील की आवाज सुनकर वीडियो बनाना शुरू किया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. सुनील का एक बुंदेली गाना 'दूल्हा बनकर आ गव ठेला, है मोटर को ब्याव' यूट्यूब पर लोगों तक पहुंचा. इस गाने को यूट्यूब पर करीब 9 लाख बार देखा गया. इसके बाद सुनील को थोड़ी बहुत पहचान मिलने लगी और कार्यक्रम के लिए डिमांड होने लगी. फिर वह कार्यक्रम में गाकर कमाने लगे, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया. इसके बाद सुनील और रोहित ने मिलकर कई भजन रिकार्ड कर और सोशल मीडिया पर अपलोड किए. इसी कड़ी में भजन 'मोरे संकट कटैया हनुमान' काफी लोकप्रिय हुआ और इंदौर के वीआरके प्रोडक्शन ने उनसे संपर्क किया. इसके बाद इस भजन को यूट्यूब पर जारी किया गया, जिसे 28 मिलियन व्यूज मिले.

मुंबई जाने का कैसे मिला मौका ?
सुनील लोधी की धीरे-धीरे लोकप्रियता बढ़ी और उनको रोहित अपने साथ मुंबई लेकर पहुंचे, जहां साईं बाबा स्टूडियो में सुनील के भजन रिकार्ड किए जाने लगे. रिकार्डिंग के बाद रोहित और सुनील वर्सोवा बीच पर घूमने पहुंचे. दोनों ने बीच पर कुछ तस्वीरें लीं, जिन्हें रोहित ने 'बुंदेली दुनिया' नामक इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट कर दीं. जब फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर रोहित के इंस्टाग्राम अकाउंट पर पड़ीं तो उन्हें मैसेज भेजकर पूछा कि क्या वे लोग मुंबई में हैं? रोहित ने जैसे ही हामी भरी, तो निर्देशक ने उन्हें स्टूडियो का पता भेजकर आने को कहा. इसके बाद रोहित और सुनील स्टूडियो पहुंचे. सुनील ने निर्देशक और फिल्म की टीम के सामने तीन-चार भजन सुनाए. इन्हीं भजनों में से एक 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' और 'सागर में नैया डार दई' निर्देशक को बेहद पसंद आए. डायरेक्टर ने इन दो भजनों को फिल्म 'हनुमान अंश' में शामिल करने का फैसला लिया, जो आज खूब हिट हो रहे हैं.
सुनील लोधी के लिए भगवान से कम नहीं रोहित
सुनील अपनी इस सफलता का श्रेय रोहित को देते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी में रोहित ने ईश्वर के रूप में एंट्री ली है, क्योंकि उन्होंने सोच लिया था कि उनकी जिंदगी इतनी आसानी से गुजरने वाली नहीं है. सुनील कहते हैं, 'मेरे जीवन के संघर्ष और आज जो मुझे सफलता मिली है, इसमें रोहित मामा का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा, मेरे वीडियो बनाए, अगर वह मेरे साथ नहीं होते तो शायद मैं आज भी अपने गांव में गुमनाम रहता'.
इस सिंगर के साथ गाना गाने का है सपना
'हनुमान अंश' के हिट होने के साथ-साथ सुनील लोधी भी पॉपुलर हो चुके हैं. सोशल मीडिया पर उनके गाए भजन खूब वायरल हो रहे हैं. उनके भजन पर लोग रील और शार्ट्स भी बना रहे हैं. सुनील ने कहा कि अब वह और मेहनत करके अपने सिंगिंग करियर को आगे बढ़ाएंगे. साथ ही बताया कि उन्होंने 8 गानों के लिए करार किया है. इसके अलावा भजन गायक ने अपनी दिली इच्छा भी जाहिर की. सुनील का सपना बॉलीवुड के मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल के साथ गाना गाने का है, क्योंकि उन्हें जुबिन की आवाज सबसे मधुर लगती है. वहीं, सुनील शादी भी करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा जीवनसाथी चाहते हैं, जो उनकी परिस्थितियों को समझकर हमेशा उनके साथ चले.
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