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10 साल की उम्र में मंच पर एंकर ने छीन लिया था माइक, आज बॉलीवुड में मशहूर सिंगर

विवेक कुमार से खास बातचीत में बॉलीवुड सिंगर दीपक ठाकुर ने सफलता की कहानी साझा की. कैसे मंच पर हाथ से माइक छीन लिया था.

DEEPAK THAKUR
बॉलीवुड सिंगर दीपक ठाकुर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 1, 2026 at 5:52 PM IST

8 Min Read
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मुजफ्फरपुर: दर्शकों की भीड़ से Once More..Once More की आवाज आ रही थी. दर्शकों की डिमांड पर गाना शुरू किया ही था कि हाथ से माइक छीन लिया गया. उस वक्त दीपक ठाकुर की उम्र मात्र 10 साल थी. उस घटना ने दिल तोड़ दिया. लगा कि जब अपने ही शहर में गाने का मौका नहीं मिल रहा, तो आगे का रास्ता कैसे बनेगा?

यह कहानी है, बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर दीपक ठाकुर की. बिहार के मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखंड के आथर गांव निवासी वह 10 साल का बच्चा बड़ा हो गया है. सिर्फ कद नहीं बल्कि नाम भी बड़ा हो गया. आज दीपक ठाकुर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

बचपन से ही संगीत से लगाव: किसान पंकज ठाकुर और एएनएम मीरा कुमारी के घर में जन्मे दीपक तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. बचपन से ही संगीत उनके जीवन का हिस्सा रहा. परिवार और आसपास के लोग उनकी आवाज की तारीफ करते थे. जब भी किसी रिश्तेदार या परिचित के घर जाते, वहां उनसे गाना सुनाने की फरमाइश की जाती. दीपक भी बिना झिझक गाना शुरू कर देते थे.

धीरे-धीरे शादी समारोह, सामाजिक कार्यक्रम और स्थानीय मंच उनके लिए अभ्यास का मैदान बनते चले गए. दीपक बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही महसूस होने लगा था कि संगीत उनके अंदर कहीं गहराई से मौजूद है. जहां मौका मिलता, वहां गाने लगते. परिवार के लोगों को भी उनकी प्रतिभा पर भरोसा था. यही भरोसा आगे चलकर उनके सपने की नींव बनी.

तिलक मैदान की यादें: जब दीपक 10 साल के थे, उस वक्त शहर के तिलक मैदान में एक कार्यक्रम का आयोजन हो रहा था. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एंकर से गाना गाने के लिए माइक मांगा. उन्हें मंच पर गाने का मौका भी मिला. उनका गाना सुनकर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं. जब गाना खत्म हुआ तो भीड़ से आवाज आने लगी. Once More..Once More

एंकर ने हाथ से माइक छीन लिया: दीपक ने दोबारा गाना शुरू किया, लेकिन कुछ देर बाद एंकर ने उनके हाथ से माइक छीन लिया. यह घटना दीपक के लिए काफी मायूस करने वाली थी. उन्हें लगा कि शायद उनकी आवाज को वह जगह नहीं मिल पाएगी, जिसका सपना उन्होंने देखा है. लेकिन पिता ने उस समय उनका हौसला बढ़ाया.

पिता हा हौसला: पिता ने कहा कि "एक मंच पर माइक छिन जाने से सपना खत्म नहीं होता. आवाज में दम है तो एक दिन दुनिया जरूर सुनेगी." यही बात दीपक के मन में बैठ गई. लेकिन यह राह आसान नहीं रही. प्लेबैक सिंगर बनने से पहले दीपक को कई संघर्षों के रास्ते से गुजरना था.

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मनोज वाजपेयी के साथ दीपक ठाकुर (सौ. दीपक ठाकुर द्वारा उपलब्ध करवायी गई तस्वीर)

दीपक ठाकुर की जर्नी: दीपक ने बिहार विश्वविद्यालय से बीबीए की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद एमबीए करने के लिए दिल्ली गए. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण आगे की पढ़ाई में परेशानी आई. शिक्षा लोन भी नहीं मिल सका. मजबूरन उन्हें वापस बिहार लौटना पड़ा.

नौकरी और संगीत के बीच चयन: वर्ष 2016 में दीपक को आईसीआईसीआई बैंक में करीब 9 हजार रुपये की नौकरी मिली. नौकरी उनके लिए आर्थिक रूप से मददगार हो सकती थी, लेकिन उन्होंने उसे ज्वाइन नहीं किया. उस समय उनके सामने दो रास्ते थे-एक सुरक्षित नौकरी और दूसरा संगीत का अनिश्चित रास्ता.

संगीत के सपने के पीछे सफर: दीपक ने संगीत को चुना. उनकी बहन दीपिका ने बैंक की नौकरी ज्वाइन कर ली, जबकि दीपक अपने संगीत के सपने के पीछे चलते रहे. मुंबई पहुंचने का सपना आसान नहीं था. वर्ष 2010 में दीपक ने म्यूजिक डायरेक्टर स्नेहा खानवलकर के सामने ऑडिशन दिया.

यह ऑडिशन फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के लिए था. ऑडिशन देने के बाद करीब 18 महीने तक कोई खबर नहीं मिली. समय बीतता गया और दीपक ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी. उन्हें लगा कि शायद ऑडिशन का कोई परिणाम नहीं निकला.

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दीपक ठाकुर जीत चुके हैं कई अवार्ड (सौ. दीपक ठाकुर द्वारा उपलब्ध करवायी गई तस्वीर)

मुंबई से आया अचानक फोन कॉल: लेकिन वर्ष 2012 में अचानक मुंबई से फोन आया. बताया गया कि 18 महीने पहले दिए गए ऑडिशन में उनकी आवाज पसंद की गई थी और उनकी रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल फिल्म के पहले भाग में किया गया है. दूसरे भाग की रिकॉर्डिंग के लिए उन्हें मुंबई बुलाया गया.

फिल्मी सफर का बड़ा टर्निंग प्वाइंट: दीपक के लिए यह फोन किसी सपने के सच होने जैसा था. यही उनके फिल्मी सफर का बड़ा टर्निंग प्वाइंट बना. इसके बाद दीपक ठाकुर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनकी गायकी का अंदाज और आवाज की अलग पहचान उन्हें लगातार नए मौके दिलाती रही.

बॉलीवुड फिल्मों में दी आवाज: उन्होंने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के दोनों भागों के अलावा ‘मुक्काबाज’, ‘भैया जी’ और ‘निशानची’ जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी. बिग बॉस सीजन 12 के फाइनलिस्ट बनने के बाद दीपक को देशभर में एक अलग पहचान मिली.

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सुटिंग के दौरान दीपक ठाकुर (सौ. दीपक ठाकुर द्वारा उपलब्ध करवायी गई तस्वीर)

दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मान: वर्ष 2019 में उन्हें दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया. दीपक अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के साथ-साथ अपने गुरु डॉ. संजय कुमार संजू को भी देते हैं.

वेब सीरीज 'रामलीला' पर काम: फिलहाल दीपक ठाकुर एक नए प्रोजेक्ट ‘रामलीला’ वेब सीरीज पर काम कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट में वह केवल गायन ही नहीं कर रहे, बल्कि गीतों को कंपोज भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि सीरीज में भगवान श्रीराम की कहानियों को संगीत के माध्यम से पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

संगीत में पिरोई रामायण की कहानियां: दीपक के अनुसार, प्रोजेक्ट के लिए अब तक करीब 12 से 14 गानों पर काम किया जा चुका है. कुछ गाने तैयार भी किए जा चुके हैं. सीरीज को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म से बातचीत चल रही है.

नई पीढ़ी के लिए संगीत की तैयारी: उनका उद्देश्य है कि रामायण की कहानियों को संगीत के ऐसे स्वरूप में पेश किया जाए, जिसे नई पीढ़ी भी आसानी से समझ और महसूस कर सके. दीपक ने बातचीत के दौरान अपने कुछ दूसरे प्रोजेक्ट्स का भी जिक्र किया.

"संगीत के क्षेत्र में लगातार नए काम की तलाश जारी है. भारत के साथ विदेशों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी बातचीत चल रही है. संगीत की कोई सीमा नहीं होती. अगर गाने और आवाज में भाव है, तो वह किसी भी भाषा और देश के लोगों तक पहुंच सकती है." -दीपक ठाकुर, गायक

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पंकज त्रिपाठी की साथ दीपक ठाकुर (सौ. दीपक ठाकुर द्वारा उपलब्ध करवायी गई तस्वीर)

अपने संघर्ष के बारे में दीपक का नजरिया भी अलग है. वह अपने सफर को केवल ‘स्ट्रगल’ के रूप में नहीं देखते. उनका कहना है कि जिंदगी में जो मेहनत करनी पड़ती है, वही आगे चलकर आपकी पहचान बनाती है. दीपक कहते हैं कि किसी भी क्षेत्र में अचानक सफलता मिलना संभव नहीं है.

सफलता के लिए धैर्य और निरंतरता जरूरी: दीपक कहते हैं कि, एक दिन वायरल हो जाने या अचानक नाम मिल जाने से करियर नहीं बनता. उसके पीछे लंबे समय की मेहनत, धैर्य और लगातार काम करने की जरूरत होती है. उनके मुताबिक, कलाकार को अपने हिस्से की मेहनत करनी ही पड़ती है.

मुश्किलों से गुजरना ही सफर की सीख: किस्मत कब साथ देगी, यह कोई नहीं जानता, लेकिन मेहनत करना इंसान के हाथ में है. दीपक का मानना है कि सफलता तब और ज्यादा खास लगती है, जब उसके पीछे लंबा संघर्ष और मेहनत हो.

"सब कुछ आसानी से मिल जाए तो उस सफलता का आनंद भी उतना नहीं होता. मेरे लिए मुश्किलों से गुजरना ही उस सफर की सबसे बड़ी सीख रही है. इंसान की मेहनत और किस्मत का जब सही समय पर मिलन होता है, तभी मंजिल हासिल होती है." -दीपक ठाकुर, गायक

परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका: दीपक के सफर में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. पिता पंकज ठाकुर ने मुश्किल समय में बेटे का हौसला बनाए रखा. पत्नी नेहा प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रही हैं. उनकी बहन ज्योति कुमारी दरभंगा में एफएओ (फाइनेंशियल असिस्टेंट ऑफिसर) हैं, जबकि दूसरी बहन दीपिका वकील हैं.

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