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बिहार के 'राजेश खन्ना' का सफर: टीवी के बेताज बादशाह से बने किसान, फिर कमबैक कर पहुंचे 'मायानगरी'

अभिनेता राजेश कुमार की कहानी फिल्मों से कम नहीं. संघर्ष, सफलता फिर नाकामी और अब खेती-किसानी. बृजम पांडेय के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू..

Actor Rajesh Kumar
अभिनेता राजेश कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 25, 2026 at 4:21 PM IST

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पटना: बिहार के गया से निकलकर टेलीविजन की दुनिया में चर्चित चेहरा बन चुके अभिनेता राजेश कुमार पिछले कुछ वर्षों से बॉलीवुड में भी सक्रिय हैं. हाल के दिनों में कई शानदार प्रोजेक्ट किए हैं. 2025 में आई 'सैयारा' फिल्म से बड़े परदे पर छा गए थे. राजेश भले ही टीवी और फिल्मी दुनिया में सक्रिय रहते हों लेकिन उनका दिल आज भी गांव के लिए धड़कता है. यही वजह है कि वह समय निकालकर गांव में खेती-किसानी करने पहुंच जाते हैं.

आज भी दिल में बसता है गांव: ईटीवी भारत से खास बातचीत में राजेश कुमार ने कहा कि इन दिनों वह पटना में है तो इसके पीछे एक बड़ा कारण है. वह बताते हैं कि यह बिहार के लिए सौभाग्य की बात है कि पहली बार ईशा फाउंडेशन वाले सद्गुरु आ रहे हैं. 27 जून को बहुत बड़ा कार्यक्रम पटना के बापू सभागार में होने जा रहा है, जिसकी तैयारीयों में लगे हुए हैं. इसके अलावे उन्होंने अपने गांव में कुछ प्रोजेक्ट शुरू किए हैं और यह खेती किसानी से जुड़े हुए प्रोजेक्ट हैं.

बहनों के साथ खेती-किसानी: उनकी दो बहन हैं. एक अमेरिकन सिटीजन हैं और दूसरी फिनलैंड की सिटीजन हैं. दोनों वहां से नौकरी छोड़कर गांव में आकर खेती कर रही हैं. गुरुवा थाना के पास एक गांव में वह सभी भाई-बहन मिलकर खेती कर रहे हैं.

राजेश कुमार का खेती से रिश्ता इतना क्यों मजबूत है? इस सवाल पर राजेश ने कहा कि जब उन्होंने खेती शुरू की तो डाउनफॉल भी आया. यह एक ऐसी विद्या है जो आपने सीख ली तो जीवन के आखिरी चरण तक करना चाहेंगे. खेती एक ओपन कैनवास है. जहां आप अपनी पूरी पेंटिंग करते हैं. उनकी शिक्षा उन्हें इसके लिए जागरूक करती है.

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ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

राजेश कहते हैं कि आज जिस प्रकार से मौसम में परिवर्तन हो रहे हैं और नदियों में पानी कम होता जा रहा है, ऐसे में हमें इस दिशा में कुछ करना होगा. वह कहते हैं कि जब हम जानते हैं कि यह चीजें बदल सकती हैं तो कुछ असर नहीं होगा. उनका मानना है कि जमीन लगातार तपती जा रही है, भले ही हम एसी में क्यों ना बैठे हैं लेकिन आज खेत, पानी और नदियों की हालत देखते हैं और इन्हें देखकर भी आपके दिल में टीस नहीं आती है तो हमारी सारी पढ़ाई बेकार है.

शुरू में हुआ नुकसान: उन्होंने बताया कि जब उन्होंने खेती शुरू की तो वह बहुत अनाड़ी थे. पहले महाराष्ट्र में 20 एकड़ जमीन किराए पर लिया और वहां सहजन की खेती की. इसके साथ ही बिहार में भी 10 एकड़ जमीन पर साथ-साथ सहजन की खेती शुरू की. वह एक मॉडल फॉर्म तैयार करना चाहते थे लेकिन दुर्भाग्य से मुंबई के पास वाले जमीन में कुछ प्रॉब्लम थी, जो शुरू में समझ में नहीं आए थे.

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परिवार के साथ राजेश कुमार (सौ. Madhvi Chopra फेसबुक हैंडल)

वे कहते हैं कि इसके अलावा वहां के बारिश को उन्होंने आकलन नहीं किया था कि यह इतना नुकसान करेगा? हमें बहुत नुकसान हुआ. बिहार वाले खेत में जो उन्होंने बीज लेकर आए, वह डेढ़ साल के बाद भी फल नहीं दे रहा था. इसके बाद सभी को उन्होंने हटा दिया, क्योंकि वह जंगल बन गया था और कोई आमदनी नहीं बढ़ रही थी.

राजेश बताते हैं कि वह जो मॉडल फॉर्म बनाना चाहते थे, वह कम जानकारी के कारण एग्जीक्यूशन में दिक्कत हुई लेकिन समय के साथ यह समझ में आया कि सबसे सहज और सरल है कि आप पहले मार्केट तैयार कर दें तो कोई भी किसान आपके लिए उगाने के लिए तैयार है.

पत्नी ने किया सपोर्ट: राजेश कुमार ने कहा कि जब वह खेती के लिए आए तो परिवार ने उन्हें भरपूर सपोर्ट किया. पत्नी बच्चे बहुत ही सपोर्टिव हैं. दोनों बहनें विदेश में नौकरी रिजाइन करके आई. उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी इस बात को लेकर बेहद आश्वस्त हैं कि यह जब बिजनेस का रूप लेगा तो बिजनेस के रूप में भी बहुत अच्छा होगा और यह कई रास्ते खोलेगा. वे कहते हैं, 'जिन किसानों के पास कम जमीन है, उनके लिए यह एक बेहतर रास्ता खोलेगा. उम्मीद है कि दो से तीन वर्षों में एक विकसित खेती का नमूना लोगों को देखने को मिलेगा.'

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पत्नी माधवी चोपड़ा के साथ राजेश कुमार (सौ. Madhvi Chopra फेसबुक हैंडल)

"मैं तो मनुष्य योनि में होने का फायदा उठा रहा हूं. हमारे यहां देवी-देवताओं के 10 हाथ हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि एक आदमी के 10 हाथ होते हैं. इसका मतलब होता है कि यदि आप मनुष्य के रूप में आए हैं तो आप एक साथ 10 काम कर सकते हैं. एक्टिंग और खेती सब साथ में चल रहा है और चलता रहेगा. एक्टिंग इसलिए भी जरूरी है कि लोगों के बीच में आप रहते हैं और जब आप कुछ रिस्पांसिबल बात कहना चाहते हैं तो इसका असर होता है."- राजेश कुमार, अभिनेता

बेटे के स्कूल के सामने सब्जी बेची?: इस सवाल पर राजेश कुमार ने कहा कि इसकी सच्चाई यह थी कि वह नेचुरल फार्मिंग कर रहे थे. जहां उन्होंने 19 केमिकल का टेस्ट सब्जियों में करवाया था. जहां सरकार का परमिसिबल लिमिट किसी एलिमेंट का जो भी है, उसके अनुसार सब्जियों में वह केमिकल मिले लेकिन उन्होंने जब अपनी सब्जी का केमिकल टेस्ट करवाया तो उन्हें 0.01% मिले.

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बेटे के साथ राजेश कुमार (ETV Bharat)

वे बताते हैं कि इसके बाद उन्हें लगा कि पढ़े-लिखे को पढ़ाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है. ऐसे में क्यों ना उन्हें पढ़ाया जाए, जिन्होंने अभी शुरुआत की है. यही बताने के लिए वह सब्जी बेचने बैठे थे और वह बच्चों को यह भी साथ में बताना चाहते थे कि एक एक्टर है और वह जाकर सब्जी बेच रहा है तो यह छोटा काम नहीं है. उन्होंने कहा कि लोगों ने इसे इंटरप्रेट कर दिया कि राजेश कुमार की हालत ऐसी हो गई कि उन्हें सब्जी बेचनी पड़ रही है, जोकि सच नहीं है.

राजेश कहते हैं, 'धनिया फ्री में मांगने से पहले लोगों को 5 बार सोचना चाहिए. 100 ग्राम का बंडल तो आप इत्मीनान से मांग रहे हैं लेकिन सोचिये इसे उगाने और तैयार करने में किसानों को कितनी मेहनत करना पड़ी होगी. मैं चाहता हूं कि उन किसानों को पूरा सम्मान दिया जाए जो इन सब्जियों को उगाते हैं. जो रोजमर्रा की जिंदगी में काम आते हैं.'

वापसी के बाद धमाकेदार शुरुआत: राजेश कुमार ने कहा कि 2017 से 2022 तक उन्होंने खुद को अभिनय से दूर रखा. 2022 में उन्होंने कमबैक किया. वापसी के बाद टेलीविजन की बजाय फिल्मों और ओटीटी पर काम करना शुरू किया. वे बताते हैं कि 2022 से पहले जहां 24 साल के करियर में सिर्फ दो हिंदी फिल्में की थी, वहीं 2022 के बाद अब तक 4 फिल्मों में काम कर चुके हैं. बैक टू बैक उन्हें बहुत सारे अच्छे काम मिले और 5 साल का जो गैप था, उसमें पर्सनैलिटी भी काफी चेंज हो गई.

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राजेश कुमार (सौ. Rajesh Kumar सोशल मीडिया)

अभिनेता कहते हैं कि लोगों को उनके 'रोजेस' वाले किरदार से बाहर निकलने का मौका मिला. इसके बाद एक अलग राजेश दिखने लगा. अभी उनकी एक फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है, आई है. उसमें वरुण धवन मुख्य किरदार निभा रहे हैं. इसके अलावे सूरज बड़जात्या के साथ एक फिल्म है. वेब सीरीज 'रक्तांचल-3' में भी वह काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि जब आप एक मनुष्य के रूप में अपना अप्रोच चेंज कर देते हैं तो सब कुछ बदल जाता है. इसे अध्यात्म कहें या जो भी, उनका मानना है कि जब आप अपनी चिंता छोड़कर प्रकृति की चिंता करने लगते हैं दूसरों की चिंता करने लगते हैं तो दूसरे और प्रकृति भी आपकी चिंता करने लगती है.

छठ को लेकर विशेष लगाव: गया जिले के बरमा गांव निवासी 51 वर्षीय राजेश कुमार ने बताया कि लगभग 8 साल पहले उनकी मां ने 50वीं छठ की थी तो सरकार ने भी इसे दिखाया था. उनकी मां की अब काफी उम्र हो चुकी है और बीमार रह रही हैं. राजेश कुमार ने कहा कि छठ को लेकर उनकी कोई अलग सोच नहीं है. वह उस गांव और शहर से हैं, जहां से छठ की शुरुआत हुई थी.

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राजेश कुमार (सौ. Rajesh Kumar सोशल मीडिया)

वह कहते हैं, 'छठ एक जीवन जीने का तरीका है और यह सोचने का तरीका नहीं है. मां के बाद यह हुआ है कि उन्होंने 4 साल लगातार छठ किया है. बीच में 2 साल शूटिंग का कमिटमेंट विदेश में होने के कारण वह नहीं कर पाए. इस साल वापस वह गया में छठ करने वाले हैं और छठी मैया की कृपा रही तो हर साल उन्हें मौका मिलेगा. छठ का उपवास अपने आप से मिलने का मौका देता है. अपने शांत स्वरूप से मिलने का मौका देता है.'

सरनेम क्यों बदला?: इस सवाल पर राजेश कुमार कहते हैं कि उनकी स्कूलिंग पटना में हुई है. उसी दौरान बिहार में एक दौर आया, जब किडनैपिंग काफी बढ़ गए थे. उनके समाज में लोगों ने अपना सरनेम लगाना बंद कर दिए था. हालांकि इसके बाद वह देहरादून चले गए और वहां से 12वीं पास की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से कॉलेज की शिक्षा पूरी की.

वे बताते हैं, 'जब नर्सरी में था तो पहला प्ले किया था. मेरे पिता राजेश खन्ना के बहुत बड़े फैन थे. छठी कक्षा तक मेरा नाम भी राजेश खन्ना ही था. इसके बाद जब मैंने पटना के लोयोला स्कूल में दाखिला लिया, तब पिता को प्रिंसिपल ने कहा एक परिवार में दो सरनेम अलग-अलग कैसे हो सकता है. इसके बाद मेरा नाम राजेश कुमार रखा गया.'

एक्टिंग में कैसे मिली एंट्री?: इस सवाल पर राजेश कहते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में उन्हें थिएटर करने का मौका मिला और एनएसडी के लोगों के साथ उठने बैठने का मौका मिला. यहां उन्हें काफी एक्स्पोजर मिला. यहां से उन्हें एक अवसर दिखा कि टेलीविजन जगत में एक नया बदलाव आ रहा है और दूरदर्शन के बाद अब नए इंटरटेनमेंट चैनल आ रहे हैं.

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राजेश कुमार (सौ. Rajesh Kumar सोशल मीडिया)

राजेश को कभी हीरो बनने का शौक नहीं रहा था, उनको कैरेक्टर एक्टिंग शुरू से पसंद था. उन्होंने कहा कि परिवार ने उन्हें एक्टिंग करियर में आगे बढ़ने के लिए काफी सपोर्ट किया. समय पर सभी प्लेटफार्म मिलते गए. हालांकि उनके पिता आज भी उनकी फिल्म नहीं देखते हैं और कहते हैं क्या देखना है रहने दो. गया में सैयारा फिल्म आई थी तो उन्होंने स्क्रीनिंग रखी थी और अपने शहर के लोगों के साथ वह फिल्म देखी.

राजनीति में आएंगे?: बिहार और राजनीति एक-दूसरे के पूरक हैं तो क्या मनोज तिवारी, रवि किशन, पवन कल्याण और थलापति विजय जैसे अभिनेताओं की तरह राजनीति में आना पसंद करेंगे या राजनीति में आने की रुचि रखते हैं? इस पर वह कहते हैं, 'सांसद होने की तो नहीं सोचते हैं लेकिन भले ही पॉलिटिक्स ज्वाइन करें या ना करें लेकिन बहुत सारा काम है, जो करने में सक्षम हैं और वह करना चाहेंगे. इसके लिए पॉलिटिकली अगर मौका मिले तो भी वह जाएंगे और नहीं मिलता है तब भी वह करेंगे.'

"अगर मौका मिलता है अगले लोकसभा या विधानसभा में तो मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं. राजनीति में आने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हो चुका हूं."- राजेश कुमार, अभिनेता

राजेश मानते हैं कि राजनीति अपने आप में एक प्रोफेशन है. साथ ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है. वे कहते हैं कि हमारी एक वोट से पूरी सियासत बनती है और देश चलता है. ऐसे में जितने रिस्पांसिबल जन प्रतिनिधि हैं, उससे दोगुना रिस्पांसिबल हम भी हैं क्योंकि हमने ही तो वोट देकर उनको चुना है. वो ये भी कहते हैं कि जिन लोगों के पास विजन और राजनीतिक इच्छा शक्ति है, उन्हें राजनीति में आकर समाज के लिए काम करना चाहिए.

विजय थलापति की तारीफ की: राजेश को मौजूदा दौर में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति पसंद हैं. वे कहते हैं, 'विजय जी काफी इंस्पायरिंग लग रहे हैं, क्योंकि वह चीजों की बारीक गहराई तक जाकर काम कर रहे हैं. मैं भी उन्हें ऑब्जर्व कर रहा हूं.'

गया के रहने वाले हैं अभिनेता: राजेश कुमार का जन्म 20 जनवरी 1975 को गया जिले के बरमा गांव में हुआ था. उन्होंने 1999 में टीवी सीरियल से करियर की शुरुआत की. 2004 में अभिनेत्री माधवी चोपड़ा उनकी शादी हुई. उनके दो बेटे हैं.

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