"मुंबई में सिर्फ टैलेंट नहीं, पहचान भी चाहिए": जमशेदपुर से बॉलीवुड तक राहुल राज सिंह का संघर्ष, नेपोटिज्म पर खुलकर बोले अभिनेता
जमशेदपुर-रांची से शुरू हुआ सफर, मुंबई में बनाई पहचान: 1000 से अधिक टीवी एपिसोड और कई बड़े प्रोजेक्ट्स में कर चुके हैं काम

Published : June 1, 2026 at 5:23 PM IST
रांची: झारखंड की धरती से निकलकर मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता राहुल राज सिंह इन दिनों रांची आए हुए हैं. जमशेदपुर में जन्मे और रांची में अपना घर रखने वाले राहुल फिलहाल, मुंबई में रहकर फिल्म, टीवी और म्यूजिक इंडस्ट्री में सक्रिय हैं. इस दौरान उन्होंने ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में अपने संघर्ष, बॉलीवुड में नेपोटिज्म, छोटे शहरों के कलाकारों की चुनौतियों और अब तक के सफर पर खुलकर बात की.
राहुल राज सिंह ने कहा कि छोटे शहर से निकलकर मुंबई तक का सफर बिल्कुल आसान नहीं था. उन्होंने बताया कि उनका जन्म जमशेदपुर में हुआ और शुरुआती पढ़ाई बिष्टुपुर स्थित सेंट मेरी स्कूल में हुई. बाद में परिवार रांची आ गया. इसके बाद वह कोलकाता पहुंचे, जहां उनके पिता चाहते थे कि वह मेडिकल की पढ़ाई करें और डॉक्टर बनें. लेकिन राहुल की रुचि शुरू से ही क्रिएटिव फील्ड में थी.
कोलकाता में आया टर्निंग प्वाइंट
उन्होंने बताया कि उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट कोलकाता में आया. प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर शर्वरी दत्त के एक फोटोशूट में उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर का किरदार निभाने का मौका मिला. उस शूट के पोस्टर और होर्डिंग्स पूरे कोलकाता में लगे, जिससे उन्हें पहली बार व्यापक पहचान मिली. इसके बाद उन्होंने सुपर मॉडल ऑफ कोलकाता का खिताब जीता. उस प्रतियोगिता में कई बड़े नाम शामिल थे और यहीं से मॉडलिंग की दुनिया में उनके लिए नए दरवाजे खुले.
राहुल बताते हैं कि उसी दौरान वह इस दुविधा में थे कि मेडिकल की पढ़ाई करें या मॉडलिंग को करियर बनाएं. हालांकि उनके पिता ने अंततः उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की सलाह दी. सुपर मॉडल ऑफ कोलकाता का खिताब जीतने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया और फिर उन्होंने मुंबई का रुख किया.

मुंबई पहुंचने के बाद संघर्ष का एक नया अध्याय शुरू हुआ. राहुल कहते हैं कि मुंबई में सिर्फ मेहनत काफी नहीं होती, बल्कि सही लोगों तक पहुंच और अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि छोटे शहरों से आने वाले कलाकारों को अक्सर गंभीरता से नहीं लिया जाता. कई बार उन्हें ऐसे रोल ऑफर किए जाते हैं, जिनसे करियर आगे बढ़ने के बजाय सीमित हो जाता है.
"एक मैं और एक तू" रही पहली फिल्म
राहुल की पहली बॉलीवुड फिल्म "एक मैं और एक तू" थी, जिसका निर्देशन मनोज अग्रवाल ने किया था. लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी. इसके बाद राहुल ने छोटे पर्दे की ओर रुख किया और टीवी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई.
सोनी टीवी के लोकप्रिय धारावाहिक "अंबर धरा" में निभाए गए उनके किरदार ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई. इसके बाद धार्मिक धारावाहिक "माता की चौकी" में मुख्य भूमिका निभाकर वह घर-घर में चर्चित हो गए. इस सीरियल ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी. वहीं सहारा वन पर प्रसारित पौराणिक धारावाहिक "गणेश लीला" में भी उनके अभिनय को सराहा गया. राहुल अब तक टेलीविजन जगत में 1000 से अधिक एपिसोड्स में अभिनय कर चुके हैं और कई लोकप्रिय शोज का हिस्सा रहे हैं.

अभिनय के अलावा उन्होंने रियलिटी शो की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. वर्ष 2015 में प्रसारित चर्चित रियलिटी शो "पावर कपल" में वह अपनी तत्कालीन पार्टनर और लोकप्रिय अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी के साथ बतौर कंटेस्टेंट नजर आए थे. इस शो के जरिए भी उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच व्यापक पहचान मिली.
म्यूजिक एल्बम पर कर रहे काम
फिलहाल वह मशहूर गायक और संगीतकार अंकित तिवारी के संगीत से सजे एक म्यूजिक एल्बम पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा कई अन्य म्यूजिक वीडियो और फिल्मी प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है. उन्होंने संकेत दिए कि कुछ बड़े फिल्म निर्माताओं के साथ उनकी बातचीत जारी है और यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो इसी वर्ष वह एक बड़े अभिनेता के साथ बड़े पर्दे पर दिखाई दे सकते हैं. हालांकि उन्होंने इस बारे में अधिक जानकारी साझा करने से इनकार किया.

नेपोटिज्म के कारण मुंबई छोड़ने का बना लिया था मन
बॉलीवुड में नेपोटिज्म के सवाल पर राहुल ने बेबाकी से अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में परिवारवाद आज भी हकीकत है. बड़े फिल्म प्रोडक्शन हाउस और स्थापित फिल्मी परिवार लंबे समय से इंडस्ट्री में प्रभाव रखते हैं. ऐसे माहौल में बाहरी कलाकारों के लिए जगह बनाना आसान नहीं होता. उन्होंने कहा कि टैलेंट जरूरी है, लेकिन कई बार किस्मत और सही अवसर उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होते हैं.
राहुल ने अपने संघर्ष का एक अहम अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने मुंबई छोड़ने का मन बना लिया था. उन्होंने कहा कि एक बड़े प्रोडक्शन हाउस की तीन फिल्मों के लिए उन्हें साइन किया गया था और शुरुआती भुगतान भी मिल चुका था, लेकिन कुछ समय बाद वे प्रोजेक्ट उनके हाथ से निकल गए. उस दौर में उन्हें लगा कि शायद मुंबई उनके लिए नहीं है और उन्हें कोलकाता लौट जाना चाहिए. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार काम करते रहे.
आज राहुल मानते हैं कि संघर्ष अभी भी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने अपने लिए एक मजबूत जगह बनाई है. झारखंड के युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई मुंबई में करियर बनाना चाहता है तो सिर्फ सपने लेकर न जाए. अभिनय सीखें, थिएटर करें, ऑडिशन की तैयारी करें, अपनी भाषा, संवाद अदायगी और व्यक्तित्व पर काम करें. उन्होंने कहा कि मुंबई जाने से पहले मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को तैयार करना बेहद जरूरी है.
छोटे शहरों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं
राहुल राज सिंह कहते हैं कि छोटे शहरों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ सही दिशा, धैर्य और लगातार मेहनत की है. उनका मानना है कि जो कलाकार तैयारी के साथ आगे बढ़ते हैं, उनके लिए सफलता के रास्ते जरूर खुलते हैं. आने वाले समय में उनके कई म्यूजिक एल्बम और मनोरंजन जगत से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट दर्शकों के सामने आने वाले हैं. ऐसे में झारखंड के लोग एक बार फिर अपने शहर के इस कलाकार को बड़े पर्दे पर नई भूमिका में देख सकते हैं.
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