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'गदर' के 25 साल: रिलीज से पहले लोगों ने कहा था 'गटर', बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिट फिल्म- अनिल शर्मा

सनी देओल की फिल्म 'गदर' को 25 साल हो गए हैं. इस गदर की टीम से ईटीवी भारत ने खास बात की है.

Gadar
'गदर' (Poster)
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By Seema Sinha

Published : June 15, 2026 at 8:07 PM IST

13 Min Read
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भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल 'गदर: एक प्रेम कथा' ने अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए हैं. 15 जून 2001 को रिलीज हुई इस फिल्म को लेकर निर्देशक अनिल शर्मा ने कई दिलचस्प यादें साझा कीं. उन्होंने बताया कि फिल्म बनने से पहले इंडस्ट्री के कई लोगों ने इसे असफल करार दे दिया था और कुछ ने तो इसे 'गटर' तक कह दिया था.

1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में सनी देओल ने तारा सिंह और अमीषा पटेल ने सकीना का किरदार निभाया था. फिल्म में एक सिख ट्रक ड्राइवर की अपनी पाकिस्तानी पत्नी को वापस भारत लाने की संघर्षपूर्ण कहानी दिखाई गई थी.

रिलीज से पहले उड़ाया गया था मजाक
डायरेक्टर अनिल शर्मा का कहना है कि राजस्थान और पंजाब में इस फिल्म की शूटिंग का विशाल अनुभव आज भी ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो. वे कहते हैं, 'मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने यह फिल्म बस कल ही शुरू की हो. कहानी तो कल ही मेरे पास आई थी, और मेरा पांच-छह साल का बेटा उत्कर्ष मेरी गोद में खेल रहा था. सब कुछ कल की ही बात लगती है.'

हालांकि, शर्मा के लिए 'गदर: एक प्रेम कथा' बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी. उन्होंने बताया कि जब पहली बार 'गदर' का आइडिया पेश किया गया, तो इंडस्ट्री ने इसे लेकर काफी आलोचना की और इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं लिया.

वे कहते हैं, 'बहुत से लोगों को यह एक जोखिम भरा काम लगा.' वे बताते हैं कि रिलीज होने पर, इंडस्ट्री के कई लोगों को फिल्म के आम दर्शकों के बीच पसंद किए जाने को लेकर शक था और कुछ शहरी आलोचकों ने तो इसकी कड़ी आलोचना भी की थी.

डायरेक्टर का कहना है कि इंडस्ट्री में 2001 की इस फिल्म को लेकर उम्मीदें बहुत कम थीं और उनके साथी भी इस पर सवाल उठा रहे थे. शर्मा को याद है कि कुछ शुरुआती रिव्यू करने वालों ने फिल्म को मज़ाक में 'गटर: एक प्रेम कथा' कहा था, और कुछ अंग्रेजी अखबारों को लगा कि इसका रिव्यू करना उनकी शान के खिलाफ है. फिल्म की कहानी पर इंडस्ट्री में लगभग किसी को भी भरोसा नहीं था.

एक डिस्ट्रीब्यूटर, जो शुरू में 5 लाख रुपये की साइनिंग अमाउंट पर फिल्म खरीदने को तैयार हो गया था, उसने आगे पेमेंट करने से मना कर दिया. जिन लोगों ने शुरुआती रील देखीं, उनमें से कई ने सनी देओल के किरदार के सारंगी बजाने पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि उनके हाथ में बंदूक होनी चाहिए. इस बात ने खरीदारों को लगभग पीछे हटा ही दिया था.

शर्मा कहते हैं, 'उस समय फिल्ममेकर्स शूटिंग के लिए स्विट्ज़रलैंड जैसी विदेशी जगहों पर जा रहे थे. उन्हें लगता था कि 'गदर' कौन देखेगा. वे मुझसे पूछते रहते थे कि मैंने क्या बनाया है. कुछ लोगों को तो यह भी लगता था कि फिल्म पर बैन लग जाएगा और इसे सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. यह फिल्म उस दौर और चलन के बिल्कुल उलट थी. मुझे फिल्म की मास अपील के बारे में इंडस्ट्री को समझाने के लिए कई स्क्रीनिंग करनी पड़ीं और काफी संघर्ष करना पड़ा. उन्हें लगता था कि यह पुराने जमाने की फिल्म है.'

सीक्वल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ''गदर 2' रिलीज करते समय भी लोगों की यही सोच थी. लोगों की आदत होती है. जो लोग जिंदगी में कुछ नहीं करते, वे ही ऐसी बातें कहते और मानते हैं. 'गदर' आज भी प्रासंगिक है. मैंने कई हिट फिल्में बनाई हैं और मैं 40-45 सालों से इंडस्ट्री में हूं. मैं खुद को बहुत भाग्यशाली और खुश मानता हूं. लोग क्या कहते हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता.'

अमीषा पटेल को भी मिली थी नसीहत
फिल्म की एक्ट्रेस अमीषा पटेल ने बताया कि उन्हें भी फिल्म करने से रोका गया था. उन्होंने कहा, 'रिलीज से पहले कई लोगों ने फिल्म को 'गटर' कहा था. यह सुनकर दुख हुआ, लेकिन मुझे अपने निर्देशक और कहानी पर पूरा भरोसा था. इतनी खूबसूरत प्रेम कहानी शायद ही कभी लिखी गई हो.'

मां का रोल निभाने में कोई परेशानी नहीं हुई- अमीषा
अमीषा पटेल का कहना है कि उन्हें अपने करियर की शुरुआत में ही मां का रोल निभाने में कोई परेशानी नहीं हुई, क्योंकि उन्हें फिल्म पर पूरा भरोसा था. उन्होंने कहा, 'मुझे सकीना और 'गदर' पर भरोसा था. यहां तक कि दोस्तों और परिवार वालों ने भी मुझसे यही कहा था कि सिनेमा का दौर अब बीत चुका है. मुझे पता है कि बहुत से लोगों को शक था. 'गदर' में फैमिली वैल्यू थे, दिल को छू लेने वाले पल थे, जबरदस्त एक्शन और म्यूजिक थाय गदर से आप जो भी उम्मीद करते हैं, वह सब इसमें था.'

सनी देओल और अनिल शर्मा को था पूरा भरोसा
शर्मा कहते हैं कि उन्होंने सनी देओल के साथ फिल्म बनाने का फैसला किया और इसकी सच्ची, इमोशनल कहानी ने जल्द ही देश भर के दर्शकों का दिल जीत लिया. यह फिल्म अपने जबरदस्त देशभक्ति वाले डायलॉग्स के लिए भी जानी जाती है, खासकर सनी देओल के मशहूर डायलॉग- 'हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद था, ज़िंदाबाद है, और ज़िंदाबाद रहेगा' के लिए. यह फिल्म अब तक की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई और 2023 में आई इसकी अगली कड़ी 'गदर 2' ने, इंडस्ट्री के शक के बावजूद, बॉक्स ऑफिस के सारे बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिए.

वे कहते हैं, 'सनी और मुझे पूरा भरोसा था कि यह काम करेगा, और यह भरोसा अंदर से आता है. मैं भी एक दर्शक हूं. मैं फिल्म और उसके विषय के बारे में एक दर्शक के तौर पर सोचता हूं, न कि फिल्ममेकर के तौर पर. मैं यह नहीं सोचता कि अभी क्या समय है या क्या हालात हैं. मैं बस यह सोचता हूं कि किस चीज से मैं उत्साहित होकर थिएटर जाऊंगा और फिल्म देखूंगा.'

फिल्म की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर को कई घटनाएं याद हैं. शर्मा एक ऐसी ही घटना को याद करते हुए कहते हैं, 'हम देर रात पंजाब के एक रेलवे स्टेशन पर शूटिंग कर रहे थे. शूटिंग देखने के लिए वहां हजारों लोग जमा हो गए थे. पुलिस आई और लोगों को जबरदस्ती हटाने लगी, जिसके बाद लोग पत्थर फेंकने और चिल्लाने लगे. सनी के स्पॉट बॉय ने छाते से उन्हें ढका हुआ था और उन्हें बचा रहा था. अपने आस-पास हो रहे हंगामे से सनी को बहुत गुस्सा आ गया. उन्होंने अपना बचाव करने वाला छाता फेंक दिया और लोगों की तरफ बढ़ते हुए कहा, 'देखता हूं कौन मुझे पंजाब में शूटिंग करने से रोकता है, यह मेरा पंजाब है.' लोग तालियां बजाने लगे और बोले कि वे उनसे यही सुनना चाहते थे.'

रामायण से जोड़ी थी कहानी
शर्मा ने बताया कि लेखक शक्तिमान तलवार जब उनके पास कहानी लेकर आए तो उन्होंने तुरंत इसकी सफलता का अंदाजा लगा लिया था. उन्होंने कहा, 'मैंने लेखक से कहा कि इस कहानी में देश की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बनने की क्षमता है. उन्होंने मुझसे पूछा, 'कैसे?' मैंने उनसे कहा, 'यह रामायण है और इस कहानी में राम, सीता को वापस लाने जा रहे हैं.' आज के समय में लंका पाकिस्तान हो सकता है. हो सकता है कि लोग रामायण को न समझें, लेकिन यह उनके खून में है, इसलिए वे अपने-आप ही फिल्म से जुड़ जाएंगे.'

संगीत ने रचा इतिहास
फिल्म के संगीतकार उत्तम सिंह ने बताया कि उन्हें शुरू से यकीन था कि फिल्म बड़ी सफलता हासिल करेगी. उन्होंने कहा, 'ट्रायल शो देखने के बाद मैंने निर्देशक से कहा था कि पैसे रखने के लिए बोरे तैयार रखिए.'

फिल्म के गीत 'उड़ जा काले कावां' और 'मैं निकला गड्डी लेके' आज भी लोगों की जुबान पर हैं. उत्तम सिंह ने बताया कि 'उड़ जा काले कावां' को तैयार करने में उन्हें करीब एक महीना लगा था.

उत्तम सिंह कहते हैं, 'गदर के गानों से जुड़ी बहुत सी यादें हैं. फिल्म के संगीत ने इसके सीक्वल की कामयाबी में भी बड़ी भूमिका निभाई.' वे यश चोपड़ा की म्यूज़िकल ब्लॉकबस्टर 'दिल तो पागल है' (1997) की जबरदस्त कामयाबी के ठीक बाद इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे. 'दिल तो पागल है' के मॉडर्न और रोमांटिक गानों की जबरदस्त कामयाबी के बाद उन्होंने 'गदर' के लिए बिल्कुल अलग, जमीन से जुड़े और ऐतिहासिक बैकग्राउंड वाले गाने तैयार किए, जिससे इस फिल्म का संगीत अमर हो गया.

'उड़ जा काले कावां' बनाने में लगा था एक महीना
उन्होंने कहा, 'पहला गाना 'उड़ जा काले कावां' बनाने में मुझे एक महीना लगा. मैंने इस गाने का सिर्फ 15-20 सेकंड का हिस्सा ही कंपोज किया था, लेकिन फिल्म में यह गाना लगभग 18 से 20 मिनट तक चलता है क्योंकि मैंने इसे छह अलग-अलग स्थितियों में इस्तेमाल किया है. मुख्य किरदार की शादी के बाद यह गाना एक डुएट (युगल गीत) बन गया. बाद में, जब वह पिता बना तो यह एक फैमिली सॉन्ग बन गया और आगे चलकर, जब उसकी पत्नी का अपहरण हो जाता है, तो यह गाना 'तलाश' वाला गाना बन जाता है.'

सिंह याद करते हुए कहते हैं, 'फिर, मां और बेटे के बीच का रिश्ता दिखाने के लिए हमने इस गाने का इस्तेमाल किया. आखिर में, हमने दिखाया कि पूरी कायनात उसके लिए वही गाना गा रही है, क्योंकि उसने लड़ाई जीत ली है और वह अपने परिवार को वापस गांव ले जा रहा है. चुनौती एक ऐसा गाना बनाने की थी जिसे एक ट्रक ड्राइवर पर फिल्माया जा सके, जो गजल, जैज या पॉप तो नहीं गा सकता था.'

वे आगे कहते हैं, 'मैं गीतकार आनंद बख्शी के पास गया और उन्हें पूरी स्थिति बताई. मैंने उन्हें यह भी बताया कि मेरे पास बस कुछ ही सीमित नोट्स थे. बख्शी साहब ने मुझे तीसरे दिन बुलाया, और उन्होंने जो बोल लिखे, उन्हें सुनकर हम हैरान रह गए. उन्होंने पूरा गाना लिखा, जिसमें लगभग 12 से 13 अंतरे थे, और मैंने उसे कंपोज किया. इस गाने के बिना, फिल्म की लंबाई आधी रह जाती.'

दूसरा हिट गाना 'मैं निकला गड्डी...' के बारे में
दूसरे हिट गाने 'मैं निकला गड्डी...' के बारे में सिंह कहते हैं, 'बख्शी साहब इसके बोल के साथ तैयार थे. 'जैसे ही मैंने 'मैं निकला गड्डी लेके' की धुन गाई, बख्शी साहब तुरंत बोल के साथ तैयार थे, और सब कुछ - बोल, संगीत, फिल्मांकन, स्थिति - एकदम सही बैठ गया, और इसीलिए यह गाना आज भी लोगों की यादों में बसा हुआ है.'

हैंडपंप वाला सीन हटाने की मिली थी सलाह
फिल्म का सबसे मशहूर सीन, जिसमें तारा सिंह गुस्से में हैंडपंप उखाड़ देता है, उसे लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा, 'कभी-कभी जब आपको बहुत गुस्सा आता है, तो आपका मन करता है कि अपने आस-पास की हर चीज को तहस-नहस कर दें. हम सभी ने कभी न कभी ऐसा महसूस किया है. इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न किरदार से हैंडपंप उखड़वाया जाए और इतने सालों बाद भी, लोग आज भी उस सीन के बारे में बात करते हैं.'

अनिल शर्मा ने कहा, 'लोग कहते थे कि यह नकली लगेगा, लेकिन मुझे यकीन था कि यह सीन दर्शकों को सीटियां बजाने पर मजबूर कर देगा. यह दर्शकों को फिल्म देखने के लिए खींचेगा और आखिर में उनकी बात सही साबित हुई. आज भी लोग उस सीन को याद करते हैं.'

पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिट फिल्म

शर्मा ने अक्सर कहा है कि पाकिस्तान में दर्शकों ने इस फिल्म को बहुत पसंद किया और इसकी काफी तारीफ हुई. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिट फिल्म 'गदर' है. जैसे यहां 'धुरंधर' बहुत बड़ी हिट रही है, वैसे ही उस समय पाकिस्तान में 'गदर' जबरदस्त हिट हुई थी.'

बॉक्स ऑफिस पर बनी इतिहास
फिल्म उसी दिन रिलीज हुई थी जिस दिन आमिर खान की लगान भी सिनेमाघरों में आई थी. बावजूद इसके दोनों फिल्में सफल रहीं, लेकिन सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में गदर का दबदबा अधिक रहा. शर्मा को इंडस्ट्री के उन लोगों के कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ा, जो आमिर खान की 'लगान' से टकराने को आत्मघाती कदम मानते थे. साथ ही, उन्हें बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स से शुरुआती दौर में रिजेक्शन का भी सामना करना पड़ा. उन्हें कम बजट, सीमित संसाधनों और सेट पर लॉजिस्टिक्स से जुड़ी भारी चुनौतियों के बीच शूटिंग करनी पड़ी.

शर्मा ने कहा, 'लगान भी एक अच्छी फिल्म थी और उसने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन हां, गदर का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा.' ​​'गदर' लगातार 25 हफ्तों तक थिएटरों में चली और 'सिल्वर जुबली' का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया. करीब 18-20 करोड़ रुपये के बजट में बनी 'गदर: एक प्रेम कथा' ने दुनिया भर में लगभग 133 करोड़ रुपये की कमाई की थी.

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