ETV Bharat / education-and-career
UPSC ने परीक्षा केंद्रों पर AI-बेस्ड चेहरा प्रमाणीकरण को किया अनिवार्य
UPSC ने परीक्षा केंद्रों पर AI-बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन को जरूरी कर दिया है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा को मजबूत करना और धोखाधड़ी को रोकना है.

Published : January 10, 2026 at 7:36 PM IST
सुरभि गुप्ता
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को और पक्का करने की दिशा में अहम कदम उठाया है. UPSC ने घोषणा की है कि आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में बैठने वाले सभी कैंडिडेट्स को अब परीक्षा केंद्रों पर चेहरा प्रमाणीकरण (Face Authentication) से गुजरना होगा. यह फैसला 9 जनवरी, 2026 को UPSC की वेबसाइट पर अपडेट के जरिये सार्वजनिक किया गया.
पिछले साल सितंबर में कुछ खास परीक्षा के दौरान AI-इनेबल्ड फेशियल ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने वाले एक पायलट प्रोग्राम के सफल होने के बाद UPSC ने यह फैसला लिया है.
यह पायलट प्रोग्राम नेशनल डिफेंस एकेडमी और नेवल एकेडमी (NDA & NA) II परीक्षा, 2025, और कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) II परीक्षा, 2025 के दौरान किया गया था, जो 14 सितंबर, 2025 को आयोजित की गई थी. नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के साथ मिलकर शुरू किए गए इस प्रोग्राम का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) परीक्षा केंद्रों पर कैंडिडेट के सत्यापन का एक तेज, अधिक सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद तरीका हो सकता है.
यूपीएससी के मुताबिक, यह पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के गुरुग्राम में कुछ चुने हुए परीक्षा केंद्रों पर शुरू किया गया था. इन केंद्रों पर, कैंडिडेट्स के चेहरे की तस्वीरें, जो मौके पर ली गई थीं, उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान उनके जमा किए गए फोटो से डिजिटली मैच किया गया. आयोग की रिपोर्ट से अच्छे नतीजे सामने आए, जिसमें एक नए सत्यापन प्रणाली के बारे में बताया गया था, जिससे कैंडिडेट्स को औसतन 8 से 10 सेकंड में सत्यापित किया जा सकता था. सत्यापन के नए तरीके ने कैंडिडेट्स को प्रवेश करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है. साथ ही नकली कैंडिडेट्स और धोखाधड़ी करने वालों, दोनों के खिलाफ हाई लेवल की सुरक्षा भी दी है.
पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे में अब तक अलग-अलग टेस्ट सेशन में 1,129 कैंडिडेट्स के 2,700 फेशियल स्कैन सफलतापूर्वक किए गए हैं. पायलट प्रोजेक्ट के दौरान परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया आसान और बिना किसी रुकावट के थी और उम्मीदवारों या निरीक्षकों को बहुत कम दिक्कत हुई. इस तरह, पायलट प्रोजेक्ट के सफल कार्यान्वयन ने अब UPSC द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में भविष्य में इसे अपनाने का रास्ता बना दिया है.
यूपीएससी के चेयरमैन डॉ. अजय कुमार ने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट निष्पक्षता और पारदर्शिता से समझौता किए बिना अपनी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की आयोग की प्रतिबद्धता को दिखाता है. उन्होंने कहा, "आयोग निष्पक्षता और पारदर्शिता के उच्च मानक को बनाए रखने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है. AI-बेस्ड फेशियल रिकग्निशन वाला यह पायलट प्रोजेक्ट, स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल परीक्षा प्रक्रिया की दिशा में हमारी कोशिश में एक अहम कदम है."
डॉ. कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि UPSC तकनीक के अधिक इस्तेमाल की ओर बढ़ रहा है, लेकिन "हमारी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता बनाए रखने का पूरा ध्यान रखा गया है."
डॉ. कुमार ने पायलट प्रोजेक्ट के बारे में अपना मूल्यांकन सोशल मीडिया पर साझा किया. एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि UPSC ने "गुरुग्राम के कुछ केंद्रों पर फेस-ऑथेंटिकेशन का ट्रायल सफलतापूर्वक किया था."
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया 'सहज और निर्बाध' थी और यह स्मार्ट और अधिक सुरक्षित परीक्षा की तरफ एक कदम था. उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में शामिल UPSC और NeGD टीमों की कोशिशों की भी तारीफ की.
आगामी परीक्षाओं के लिए चेहरा प्रमाणीकरण अनिवार्य करने का फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं धोखाधड़ी, नकल और प्रक्रिया में गलतियों के मामलों पर कड़ी जांच के दायरे में हैं. UPSC हर साल 14 बड़ी परीक्षाएं आयोजित करता है. साथ ही कई भर्ती परीक्षाएं और इंटरव्यू भी करता है. इन परीक्षाओं में हर साल कुल 12 लाख कैंडिडेट भाग लेते हैं.
यह भी पढ़ें- OSSSC भर्ती 2026: 10वीं-12वीं पास के लिए निकली वैकेंसी... 81,100 रुपये तक मिलेगी सैलरी

