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Goodbye USA! इन यूरोपीय देशों ने भारतीय छात्रों के लिए खोले दरवाजे, कम खर्च में मिल रही है वर्ल्ड-क्लास डिग्री

कड़े वीज़ा नियमों के कारण अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्र 30% घटे,जबकि बेहतर भविष्य और कम खर्च के चलते यूरोप में 62% की बढ़ोतरी हुई.

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सांकेतिक फोटो (canva photo)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 31, 2026 at 10:19 AM IST

3 Min Read
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हैदराबाद: अमेरिका और कनाडा में वीज़ा नियमों की सख़्ती और पढ़ाई के बाद नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर भारतीय छात्रों की विदेश शिक्षा योजनाओं पर पड़ा है. अध्ययन विदेश से जुड़े प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2024 की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट आने वाले वर्षों में भी जारी रह सकती है.

यूरोपीय यूनियन में छात्रों की संख्या में तेज़ उछाल
जहां अमेरिका में गिरावट देखी गई है, वहीं यूरोपीय यूनियन (EU) भारतीय छात्रों के लिए तेज़ी से उभरता गंतव्य बन रहा है. एड-टेक प्लेटफॉर्म Leverage Edu के अनुसार, EU देशों में भारतीय छात्रों की संख्या में साल-दर-साल 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जर्मनी, इटली, फ्रांस, आयरलैंड, स्पेन, माल्टा और नीदरलैंड्स सबसे पसंदीदा देश बनकर सामने आए हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स और Leverage Edu के संस्थापक और सीईओ अक्षय चतुर्वेदी के मुताबिक, जर्मनी में छात्रों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, जबकि इटली और फ्रांस में 5 से 7 गुना तक की बढ़ोतरी देखी गई है.

शिक्षा ऋण के आंकड़े भी रुझान की पुष्टि करते हैं
स्टडी लोन और विदेश शिक्षा प्लेटफॉर्म GyanDhan के अनुसार, अमेरिका के लिए शिक्षा ऋण लेने वाले छात्रों की संख्या में 45 प्रतिशत की गिरावट, जबकि कनाडा के लिए 34 प्रतिशत की कमी आई है. इसके विपरीत, जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देशों के लिए शिक्षा ऋण में 30 से 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. GyanDhan के संस्थापक अंकित मेहरा का कहना है कि बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) इस बदलाव का बड़ा कारण है.

कम खर्च और छात्र-अनुकूल नीतियां बनीं वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोपीय देशों में सरकारी विश्वविद्यालयों की फीस कम है, कोर्स की अवधि छोटी है और रहने का खर्च भी अमेरिका व कनाडा के मुकाबले काफी कम है. इसके साथ ही जर्मनी और इटली जैसे देशों ने पढ़ाई के बाद नौकरी खोजने के लिए विशेष वीज़ा, पढ़ाई के दौरान काम की सुविधा और स्थायी निवास के स्पष्ट विकल्प उपलब्ध कराए हैं.

भारत–EU व्यापार समझौते से और बढ़ेगी संभावनाएं
हाल ही में हुए भारत–यूरोपीय यूनियन व्यापार समझौते को भी इस रुझान को मज़बूती देने वाला माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे यूरोप में भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए नियम और अवसर आसान होंगे.

अमेरिका में वीज़ा जारी करने में गिरावट
अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में भारतीय छात्रों को जारी किए गए F-1 वीज़ा में 44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, हार्वर्ड विश्वविद्यालय जैसे शीर्ष संस्थानों की वैश्विक लोकप्रियता अब भी बनी हुई है.

आने वाले वर्षों में यूरोप की ओर बढ़ेगा रुझान
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले एक वर्ष में यूरोपीय देशों में भारतीय छात्रों की संख्या 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जिससे यूरोप भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका का मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा.

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