Zomato का बड़ा फैसला, मिलावटी और नकली डेयरी उत्पादों को बेचने वाले रेस्टोरेंट होंगे प्लेटफॉर्म से बाहर
खाद्य नियामक FSSAI की कड़े एक्शन के बाद, जोमैटो ने नकली डेयरी उत्पाद बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ सख्त जीरो-टॉलरेंस नीति लागू की है.

Published : August 31, 2026 at 3:28 PM IST
नई दिल्ली: ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड सभी रेस्टोरेंट्स के लिए एक बेहद सख्त 'जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी' लागू कर दी है. इसके तहत जोमैटो ने खाने में 'एनालॉग डेयरी' या कृत्रिम डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए उनके संबंधित व्यंजनों को तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा देश के कई रेस्टोरेंट्स पर की गई सख्त कार्रवाई के बाद जोमैटो ने यह कदम उठाया है. कंपनी ने साफ चेतावनी दी है कि ग्राहकों के स्वास्थ्य और खाद्य गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाले रेस्टोरेंट्स को प्लेटफॉर्म से पूरी तरह बैन कर दिया जाएगा.
क्या है जोमैटो की नई नीति?
जोमैटो ने अपने सभी रेस्टोरेंट पार्टनर्स को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं
- असली डेयरी उत्पादों का उपयोग: रेस्टोरेंट्स को नकली डेयरी की जगह तुरंत शुद्ध और प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों का इस्तेमाल शुरू करना होगा.
- मेन्यू से नाम हटाना: यदि रेस्टोरेंट तुरंत असली डेयरी उत्पादों पर स्विच नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसे सभी व्यंजनों को जोमैटो के मेन्यू से तुरंत हटाना होगा.
- सामग्री की जांच: रेस्टोरेंट्स को अपने सप्लायर्स द्वारा दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों के लेबल और सामग्री की बारीकी से जांच करनी होगी, ताकि जोमैटो पर सूचीबद्ध व्यंजनों की शुद्धता सुनिश्चित हो सके.
जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने कहा, "हमारा मुख्य मिशन लोगों तक बेहतर और सुरक्षित खाना पहुंचाना है. यह नीति ग्राहकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और पारदर्शिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है."
क्यों पड़ी इस सख्त कदम की जरूरत?
यह फैसला देश में खाद्य सुरक्षा और मिलावट के खिलाफ चल रही देशव्यापी मुहिम के बीच आया है, हाल ही में खाद्य नियामक FSSAI ने दो बड़ी फूड कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए हैं और घटिया घी व मिलावटी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है. महाराष्ट्र एफडीए (FDA) की जांच में राज्य के 35 प्रतिशत से अधिक पनीर के सैंपल फेल पाए गए, जिनमें दूध के फैट की जगह सस्ते वनस्पति तेल और स्टार्च की मिलावट थी.
जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कृत्रिम या 'एनालॉग' पनीर के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अब कोई भी होटल, क्लाउड किचन या कैटरर इसका उपयोग नहीं कर सकता है.
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