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पेट्रोल और डीजल को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, विंडफॉल टैक्स बढ़ा

निर्यात पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से सरकार ने किया यह फैसला.

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सांकेतिक तस्वीर (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : September 1, 2026 at 7:19 PM IST

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नई दिल्ली : सरकार ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) बढ़ा दिया. वहीं विमान ईंधन पर शुल्क में मामूली कटौती की गई. संशोधित दरें एक सितंबर से अगले पखवाड़े के लिए प्रभावी होंगी.

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर के साथ विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) बढ़ाकर 25 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 24 रुपये प्रति लीटर था.

वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर एसएईडी को घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि पहले यह 19.50 रुपये प्रति लीटर था.

पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क भी 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले शून्य था.

अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) सरकार की तरफ से लगाया गया शुल्क है. यह उन विशिष्ट कंपनियों या उद्योगों पर लगाया जाता है जो अपनी व्यावसायिक रणनीतियों के बजाय अप्रत्याशित बाहरी घटनाओं के कारण अचानक भारी मुनाफा कमाते हैं.

वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा कि शुल्क में वृद्धि एक सितंबर से प्रभावी होगी.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था. इसकी दरों की हर पखवाड़े समीक्षा की जा रही है. इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह शुल्क लगाया गया. मंत्रालय ने यह साफ किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से पैदा हुए मूल्य अंतर को लेकर निर्यातकों को अनुचित लाभ उठाने से रोकने के लिए यह अप्रत्याशित लाभ कर लगाया है.

भारत ने जुलाई 2022 में ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद पहली बार 'विंडफॉल टैक्स' व्यवस्था लागू की थी. इस व्यवस्था में देश में उत्पादित क्रूड ऑयल के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट को भी शामिल किया गया था. बाद में, सरकार ने दिसंबर 2024 में इस पुरानी व्यवस्था को वापस ले लिया.

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल ऑयल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आने के बीच, 27 मार्च 2026 को एक्सपोर्ट लेवी का सिस्टम फिर से लागू किया गया. सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट पर लेवी लगाई ताकि विदेशों में इनकी सप्लाई को कम किया जा सके और देश में इनकी पर्याप्त सप्लाई बनी रहे.

हालांकि, दोबारा लागू किए गए ढांचे के तहत शुरुआत में पेट्रोल पर कोई एक्सपोर्ट लेवी नहीं थी, लेकिन मई 2026 में इसे एक्सपोर्ट ड्यूटी के दायरे में लाया गया. तब से, सरकार ने ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट मार्केट में होने वाले बदलावों के आधार पर कई बार इन दरों में बदलाव किया है.

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