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पश्चिम एशिया तनाव से भारत, अन्य एशियाई देशों के लिए जोखिम बढ़ा: मूडीज

ईरान संकट की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. मूडीज ने इस पर अपनी राय दी है.

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यूएस नेवी का जहाज (AP)
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By PTI

Published : March 2, 2026 at 2:00 PM IST

3 Min Read
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नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष तेज होने से भारत और एशिया के अन्य वस्तु आयातक देशों के लिए जोखिम बढ़ गया है. ऊर्जा और व्यापार मार्ग बाधित होने से आपूर्ति एवं कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. मूडीज एनालिटिक्स ने सोमवार को यह आशंका जताई.

ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल की साझा सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरान के जवाब हमलों से कच्चे तेल एवं गैस की आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरुमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है.

यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जहां से दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल निर्यात का लगभग एक-तिहाई और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की करीब 20 प्रतिशत खेप गुजरती है.

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है.

मूडीज ने मौजूदा हालात पर अपनी रिपोर्ट में कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लाल सागर और व्यापक पश्चिम एशिया में और बाधाओं का जोखिम बढ़ गया है. हवाई क्षेत्र बंद होने से यात्री एवं कार्गो उड़ानों पर भी असर पड़ा है.”

इस मार्ग के बंद होने से एशिया क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है क्योंकि चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देश इस क्षेत्र से तेल-गैस की बड़े पैमाने पर खरीद करते हैं.

सोमवार सुबह एशियाई कारोबार में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो शुक्रवार के बंद भाव करीब 72 डॉलर से बहुत अधिक है. शेयर बाजारों में भी शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट देखी गई.

मूडीज ने आगाह किया कि ऊंची जिंस कीमतें उपभोक्ता एवं उत्पादक मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती रोकनी पड़ सकती है या दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं. ऐसा होने पर आयात बिल बढ़ेगा, व्यापार घाटा बढ़ेगा और मुद्रा पर भी दबाव पड़ सकता है.

एजेंसी ने कहा, “यह संघर्ष भारत के लिए स्थिति को और जटिल बना देता है. वह पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है और उसने अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीद धीरे-धीरे कम करने पर भी सहमति जताई है.”

रिपोर्ट कहती है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात या समुद्री यातायात में लंबी बाधा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज संबंधी चिंताओं को फिर जगा सकती है.

एजेंसी ने कहा कि वह पश्चिम एशिया के हालात पर नजर रखे हुए है और अगले सप्ताह अपने आधारभूत पूर्वानुमान में इसके प्रभाव का आकलन जारी करेगी.

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