क्या AI और साइबर हमले लाएंगे अगली आर्थिक मंदी? केंद्रीय बैंकों की बढ़ी चिंता
आरबीआई गवर्नर के अनुसार अगला आर्थिक संकट बैंकों के बजाय युद्ध, बड़े साइबर हमलों या एआई से आ सकता है. पढ़ें सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट

Published : October 3, 2026 at 5:10 PM IST
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्तीय प्रणाली को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है. नई दिल्ली में आयोजित 'कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026' के एक खास सत्र 'सेंट्रल बैंकिंग इन एन एज ऑफ फ्लक्स' में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज भले ही हमारा वित्तीय तंत्र मजबूत दिख रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम खतरों से पूरी तरह मुक्त हैं. जब अर्थव्यवस्था लंबे समय तक शांत और स्थिर रहती है, तब बैंक, कंपनियां और निवेशक अक्सर जरूरत से ज्यादा जोखिम उठाने लगते हैं, जो आगे चलकर बड़े संकट का कारण बन सकता है.
इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता यूरोपीय केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष ज्यां-क्लाउड ट्रिशेट ने की, जबकि श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरासिंघे भी इसमें मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए.
स्थिरता का जाल: जब यादें धुंधली होती हैं तो बढ़ता है जोखिम
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ शब्दों में कहा कि लंबे समय तक मिलने वाली आर्थिक स्थिरता कभी-कभी एक झूठा भरोसा या 'फर्जी राहत' दे देती है. जब लोग पुराने संकटों और मंदी के दिनों को भूलने लगते हैं, तो उनके अंदर सावधानी बरतने की आदत कम हो जाती है.
उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले दो दशकों का इतिहास गवाह है कि जब बैंकों का कर्ज (NPA) खराब होता है, तो उसे ठीक करने में सालों लग जाते हैं. इसलिए, आज भले ही देश के बैंकिंग सिस्टम में कोई तनाव नहीं दिख रहा है, फिर भी हमें हर तरह के झटके के लिए तैयार रहना होगा. हम किसी भी कीमत पर लापरवाह नहीं हो सकते, क्योंकि आज की तैयारी ही कल के संकट से बचाएगी.
बैंक से नहीं, इन 5 नए रास्तों से आ सकता है अगला आर्थिक संकट
आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, अब दुनिया बदल चुकी है. अगला आर्थिक संकट शायद किसी पारंपरिक बैंक की वजह से न आए. यह संकट किसी युद्ध (भू-राजनीतिक तनाव), बड़े साइबर हमले या टेक्नोलॉजी के फेल होने से शुरू हो सकता है, जो पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लेगा.
उन्होंने दुनिया के सामने मंडरा रहे 5 सबसे बड़े खतरों का जिक्र किया
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ा-चढ़ाकर मूल्यांकन: एआई के नाम पर कंपनियों की कीमतों को जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर आंका जा रहा है, जो एक बबल बन सकता है.
- एआई से जुड़े साइबर खतरे: नई टेक्नोलॉजी के साथ-साथ वित्तीय सिस्टम पर साइबर हमलों का खतरा बहुत तेजी से बढ़ा है.
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFI) पर बढ़ता कर्ज: पारंपरिक बैंकों से अलग जो अन्य वित्तीय संस्थान हैं, वे बहुत ज्यादा रिस्क ले रहे हैं.
- प्राइवेट क्रेडिट में जोखिम: अनियंत्रित और निजी स्तर पर दिए जा रहे कर्जों में पारदर्शिता की कमी है.
- दुनिया भर पर बढ़ता हुआ कर्ज: वैश्विक स्तर पर सरकारों और संस्थाओं पर कर्ज का बोझ ऐतिहासिक रूप से बहुत ऊंचा हो चुका है.
भारत बनाम श्रीलंका: संकट से निपटने के दो अलग अनुभव
इस चर्चा के दौरान भारत और श्रीलंका के केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने अपने-अपने देशों के अनुभवों को साझा किया, जिससे समझ आता है कि संकट के समय नीतियां कैसे काम करती हैं
श्रीलंका का सबक: श्रीलंका के गवर्नर नंदलाल वीरासिंघे ने याद किया कि कैसे उनके देश में संकट के समय महंगाई 70 फीसदी तक पहुंच गई थी. उस स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय बैंक को महज एक दिन के भीतर अपनी ब्याज दरों को 7% से बढ़ाकर सीधे 14% (700 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी) करना पड़ा था. यह एक मुश्किल लेकिन जरूरी फैसला था ताकि विदेशी मुद्रा और कर्ज के संकट के बीच देश के बैंकों को डूबने से बचाया जा सके.
भारत की मजबूत स्थिति: इसके विपरीत, संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत आर्थिक नीतियों और बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी होने के कारण भारत बाहरी झटकों को झेलने के लिए बेहतर स्थिति में है. भारत अपनी नीतियां घरेलू महंगाई और विकास को देखकर बनाता है. साथ ही, आरबीआई ने देश में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना सख्त व सतर्क रुख बरकरार रखा है, हालांकि वे इसके पीछे की ब्लॉकचेन तकनीक को बढ़ावा दे रहे हैं.
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