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अमेरिका-ईरान में महायुद्ध की आहट, $79 के पार निकला कच्चा तेल; आम जनता की जेब पर लगेगा तगड़ा झटका

अमेरिका-ईरान तनाव और संघर्षविराम खत्म होने से ब्रेंट क्रूड $79 के पार पहुंचा, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट और हलचल दिखी.

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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 9, 2026 at 9:36 AM IST

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नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उबाल आ गया है. मिडिल ईस्ट में आपूर्ति बाधित होने की ताजा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं.

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 0.95 प्रतिशत (0.74 डॉलर) की बढ़त के साथ 78.68 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 78.02 डॉलर पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान इसने 79.15 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर को छू लिया. दूसरी ओर, अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 0.92 प्रतिशत की तेजी के साथ 74.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

ट्रंप के बयान से भड़की तनाव की आग
तेल की कीमतों में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के साथ आठ सप्ताह से चल रहे संघर्षविराम को "समाप्त" घोषित कर दिया. ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर बातचीत के दौरान बार-बार रुख बदलने का आरोप लगाया और उन्हें "कुकू" (अस्थिर) कहा. ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वाशिंगटन ईरान पर और अधिक सैन्य हमले करने से पीछे नहीं हटेगा. इस बयान के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर नए हवाई हमलों की पुष्टि की.

शेयर बाजारों में दिखा मिलाजुला रुख
भू-राजनीतिक तनाव के दोबारा गहराने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में घबराहट का माहौल देखा गया. बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए.

  • डाऊ जोंस: मध्य पूर्व में युद्ध की आहट से निवेशकों में डर का माहौल रहा, जिसके कारण डाऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 576.76 अंक (1.09 प्रतिशत) टूटकर 52,348.39 के स्तर पर बंद हुआ.
  • एसएंडपी 500: इसमें भी गिरावट दर्ज की गई और यह 0.28 प्रतिशत फिसलकर 7,482.71 पर आ गया.
  • नैस्डैक: तकनीकी शेयरों की मदद से नैस्डैक कंपोजिट मामूली 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,870.65 पर बंद होने में कामयाब रहा.

आपूर्ति संकट का बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव लंबा खींचता है, तो ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों से होने वाली तेल सप्लाई ठप हो सकती है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है. आपूर्ति में मामूली रुकावट भी आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा सकती है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों में ईंधन महंगा होने और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है.

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