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वाशिंगटन में G7 वित्त मंत्रियों की बैठक के लिए भारत को न्योता, क्रिटिकल मिनरल्स पर होगी चर्चा

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत को क्रिटिकल मिनरल्स पर होने वाली G7 मीटिंग में बुलाया गया है.

US invites India to G7 finance ministers meeting on critical minerals in Washington
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसें (AP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 11, 2026 at 4:46 PM IST

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वाशिंगटन: अमेरिका ने 12 जनवरी को वाशिंगटन में होने वाली G7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों को आमंत्रित किया है. उन्नत अर्थव्यवस्था (Advanced Economy) वाले देशों की इस अहम बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals) पर चर्चा होगी.

मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वह पिछली गर्मियों में G7 नेताओं की मीटिंग के बाद से ही इस मुद्दे पर एक अलग बैठक के लिए दबाव डाल रहे थे. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रियों की दिसंबर में पहले ही एक वर्चुअल मीटिंग हो चुकी है.

बेसेंट ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि भारत को भी मीटिंग में आने का न्योता दिया गया है. हालांकि, उन्हें यह पूरी तरह पता नहीं है कि भारत ने न्योता स्वीकार किया है या नहीं.

फिलहाल यह साफ नहीं हुआ कि बैठक में किन दूसरे देशों को बुलाया गया है.

G7 में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली और कनाडा के साथ-साथ यूरोपीय संघ भी शामिल है, जिनमें से ज्यादातर देश चीन से दुर्लभ मृदा धातुओं (Rare Earths) की सप्लाई पर बहुत अधिक निर्भर हैं. पिछले साल जून में G7 समूह ने अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए एक एक्शन प्लान पर सहमति जताई थी.

ऑस्ट्रेलिया ने अक्टूबर में अमेरिका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसका उद्देश्य जरूरी मिनरल्स में चीन के दबदबे का मुकाबला करना था. इसमें 8.5 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट पाइपलाइन शामिल था और यह ऑस्ट्रेलिया के प्रस्तावित रणनीतिक भंडार का फायदा उठाता है, जो रेयर अर्थ्स और लिथियम जैसे धातु (Metal) की सप्लाई करेगा.

ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि बाद में यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर इस प्रोजेक्ट को लेकर दिलचस्पी दिखाई है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, चीन जरूरी मिनरल्स की सप्लाई चेन में सबसे आगे है और कॉपर, लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ्स का 47% से 87% रिफाइन करता है. इन मिनरल्स का इस्तेमाल डिफेंस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा के कंपोनेंट्स, बैटरी और रिफाइनिंग प्रोसेस में होता है.

पश्चिमी देशों ने हाल के वर्षों में चीन के जरूरी मिनरल्स पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की है, क्योंकि चीन ने रेयर अर्थ्स पर सख्त निर्यात नियंत्रण लगाने की कोशिश की है.

12 जनवरी सोमवार को होने वाली बैठक उन रिपोर्ट्स के कुछ दिनों बाद हो रही है जिनमें कहा गया था कि चीन ने जापानी कंपनियों को रेयर अर्थ्स और उनमें मौजूद पावरफुल मैग्नेट के निर्यात पर रोक लगानी शुरू कर दी है. साथ ही जापानी सेना को डुअल-यूज आइटम्स के निर्यात पर भी रोक लगा दी है.

अमेरिकी वित्त सचिव बेसेंस ने कहा कि चीन अभी भी अमेरिकी से सोयाबीन खरीदने और अमेरिकी कंपनियों को जरूरी मिनरल सप्लाई करने के अपने वादे पर खरा उतर रहा है.

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