गौतम अडानी को बड़ी राहत: अमेरिकी न्याय विभाग ने हटाए सभी आपराधिक आरोप, कोर्ट ने खारिज किया केस
अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा— अडानी केस पर अब और संसाधन खर्च नहीं करना चाहता प्रशासन, मामला बंद

Published : May 19, 2026 at 9:29 AM IST
नई दिल्ली: अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के सभी आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से हटा दिया है. न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने इस मामले को 'विद प्रिजूडिस' यानी हमेशा के लिए खारिज कर दिया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब इस मामले को दोबारा कभी नहीं खोला जा सकता. यह अडानी समूह के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी और रणनीतिक जीत है.
कोर्ट में क्या हुआ?
अमेरिकी न्याय विभाग ने ब्रुकलिन कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस इंडिक्टमेंट (आरोप पत्र) को खारिज करने का अनुरोध किया था. सरकारी वकीलों ने कहा कि विभाग ने इस मामले की गहन समीक्षा की है और अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए वे अब इन आपराधिक आरोपों पर अपनी ऊर्जा और संसाधन खर्च नहीं करना चाहते. इसके तुरंत बाद अमेरिकी जिला अदालत ने मामले को पूरी तरह बंद करने का आदेश दे दिया.
अडानी के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि अमेरिकी प्रशासन के पास भारतीय नागरिकों और भारत में हुई गतिविधियों पर मुकदमा चलाने का कोई कानूनी क्षेत्राधिकार नहीं था. बचाव पक्ष ने यह भी साफ किया कि कथित रिश्वत योजना का कोई पुख्ता सबूत नहीं था और अमेरिकी निवेशकों को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ था.
SEC और प्रतिबंधों से जुड़े अन्य समझौते
आपराधिक मामला पूरी तरह खत्म होने के साथ ही अडानी समूह ने अमेरिकी वित्तीय नियामकों के साथ जुड़े अन्य सिविल मामलों को भी सुलझा लिया है
SEC सिविल समझौता
अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने पिछले सप्ताह ही अडानी के खिलाफ चल रहे नागरिक धोखाधड़ी के दावों को आपसी समझौते के साथ बंद कर दिया था.
275 मिलियन डॉलर का जुर्माना
एक अलग मामले में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) ने अडानी एंटरप्राइजेस लिमिटेड (AEL) के साथ 275 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,300 करोड़) का समझौता किया है. एईएल पर आरोप था कि उसने 2023 से 2025 के बीच एक दुबई की कंपनी के जरिए ईरान से एलपीजी (LPG) गैस खरीदी थी, जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन हुआ और अमेरिकी बैंकों के जरिए $192 मिलियन का लेनदेन किया गया.
अडानी समूह पर इसका प्रभाव
इस फैसले के बाद अडानी समूह के ऊपर से पिछले दो सालों से मंडरा रहा सबसे बड़ा कानूनी संकट पूरी तरह खत्म हो गया है. इस फैसले से वैश्विक बाजारों में समूह की साख फिर से मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड जुटाने के रास्ते साफ हो जाएंगे.
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