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युद्ध का अर्थशास्त्र—हथियारों की होड़ में स्वाहा हो रही दुनिया की गाढ़ी कमाई, $19 ट्रिलियन के पार पहुंची जंग की कीमत

वैश्विक संघर्षों की लागत $19.1 ट्रिलियन तक पहुंची; युद्ध अब सीमाओं के साथ-साथ देशों की अर्थव्यवस्था और भविष्य को भी तबाह कर रहे हैं.

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सांकेतिक फोटो (AP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 4, 2026 at 4:58 PM IST

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नई दिल्ली: 21वीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां सरहदों की लड़ाई अब सीधे देशों के खजाने पर हमला कर रही है. हालिया वैश्विक आंकड़ों और रणनीतिक रिपोर्टों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है—आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन जीतने के लिए नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं को मलबे में तब्दील करने के लिए लड़े जा रहे हैं. 2024-25 के दौरान वैश्विक संघर्षों की कुल आर्थिक लागत 19.1 ट्रिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है.

भारत-पाक संघर्ष: कारगिल के मुकाबले 20 गुना महंगी हुई जंग
भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्षों का इतिहास गवाह है कि युद्ध की तकनीक के साथ-साथ उसकी कीमत भी आसमान छू रही है. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारत पर करीब 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ा था. लेकिन 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने इस गणित को पूरी तरह बदल दिया.

मात्र चार दिनों के इस तीव्र संघर्ष में भारत को $407.75 मिलियन (लगभग ₹3,400 करोड़) खर्च करने पड़े. वहीं, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह 'डेथ वारंट' साबित हुआ, जिसे मात्र 96 घंटों में $1.5 बिलियन का भारी नुकसान उठाना पड़ा. इससे पहले 2001-02 के ऑपरेशन पराक्रम (संसद हमला लामबंदी) ने भारत को $600 मिलियन और पाकिस्तान को $400 मिलियन की चपत लगाई थी.

मध्य पूर्व का आर्थिक महाविनाश: 12 दिनों में अरबों डॉलर का धुआं
पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बना है. जून 2025 में हुए 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' ने युद्ध के आर्थिक पक्ष को नई परिभाषा दी. महज 12 दिनों की इस लड़ाई में इजरायल ने अपने रक्षा बजट से $6.5 बिलियन खर्च किए.

दूसरी ओर, इस संक्षिप्त युद्ध ने ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी. रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ईरान को इन 12 दिनों में अपनी जीडीपी का करीब 9.2% यानी $35 बिलियन का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष घाटा हुआ. इसके अलावा, अक्टूबर 2023 से जारी इजरायल-गाजा युद्ध का कुल बिल $112 बिलियन को पार कर चुका है, जबकि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए संयुक्त राष्ट्र ने $70 बिलियन का अनुमान लगाया है.

यूक्रेन और सीरिया: पुनर्निर्माण का अंतहीन बोझ
रूस-यूक्रेन युद्ध आधुनिक इतिहास का सबसे महंगा संघर्ष साबित हो रहा है. 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की दैनिक लागत $172 मिलियन है. वहीं, अगले एक दशक में इस देश को वापस खड़ा करने के लिए $588 बिलियन की आवश्यकता होगी. इसी तरह, 13 वर्षों के गृहयुद्ध के बाद सीरिया का कुल आर्थिक नुकसान $800 बिलियन आंका गया है.

अमेरिका का 'पोस्ट 9/11' सबक: $8 ट्रिलियन का अनंत घाटा
वैश्विक महाशक्ति अमेरिका का अनुभव बताता है कि युद्ध कभी खत्म नहीं होते, उनके बिल दशकों तक चलते हैं. 'कॉस्ट्स ऑफ वॉर' रिपोर्ट के अनुसार, 9/11 के बाद के युद्धों में अमेरिका ने $8 ट्रिलियन खर्च किए. इसमें सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा $1.1 ट्रिलियन का है, जो उन सैनिकों की भविष्य की देखभाल और पेंशन के लिए आरक्षित है जिन्होंने इन युद्धों में भाग लिया.

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