भारत में बनेगी दुनिया की खतरनाक 'जेवलिन' मिसाइल: टाटा और अमेरिकी कंपनियों के बीच बड़ा समझौता
टाटा और अमेरिकी कंपनियों में समझौता: अब भारत में बनेगी दुनिया की आधुनिक जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल, जिससे रक्षा आत्मनिर्भरता और रोजगार बढ़ेंगे.

Published : August 31, 2026 at 1:32 PM IST
नई दिल्ली: भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और अमेरिका के जेवलिन ज्वाइंट वेंचर (JJV) ने भारत में 'जेवलिन ऑल अप राउंड (AUR)' एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के सह-उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. जेवलिन ज्वाइंट वेंचर अमेरिका की दो बड़ी रक्षा कंपनियों, रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन की एक संयुक्त साझेदारी है.
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स बना मुख्य पार्टनर
इस भविष्य के घरेलू उत्पादन के लिए भारत की कई कंपनियों की क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता का कड़ा मूल्यांकन किया गया था. इस जांच के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को मुख्य भारतीय पार्टनर के रूप में चुना गया है. इस समझौते के तहत दोनों पक्ष भारत में एक समर्पित फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन (FA&I) फैसिलिटी यानी मिसाइल को पूरी तरह जोड़ने और तैयार करने वाली फैक्ट्री स्थापित करेंगे. इसके साथ ही मिसाइल के कल-पुर्जे बनाने की क्षमता भी भारत में विकसित की जाएगी.
कैसे काम करेगी यह ग्लोबल सप्लाई चेन?
यह अनूठी पहल अमेरिकी रक्षा सप्लाई चेन को सीधे भारतीय असेंबली लाइनों से जोड़ेगी. इसके तहत कई वर्षों तक चलने वाले निर्माण कार्य में मिसाइल के सब-असेंबली किट्स अमेरिका के अलबामा में स्थित लॉकहीड मार्टिन की ट्रॉय फैसिलिटी में बनाए जाएंगे. वहीं, मिसाइल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यानी 'गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट' एरिजोना में रेथियॉन की टूसॉन फैसिलिटी से तैयार होकर आएगा. इन सभी कल-पुर्जों को भारत भेजा जाएगा, जहां टाटा के प्लांट में इनकी फाइनल असेंबली और चेकिंग होगी. इससे भारत में हाई-टेक नौकरियां पैदा होंगी और अमेरिका में भी विनिर्माण से जुड़े रोजगार सुरक्षित रहेंगे.
भारत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बड़े फायदे
इस समझौते से भारत के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी. स्थानीय स्तर पर असेंबली होने से भारतीय कंपनियों को जटिल सैन्य तकनीक सीखने को मिलेगी, जिससे देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के सीईओ और एमडी सुकरन सिंह ने कहा कि इससे भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों में सुधार होगा और उन्हें युद्ध के मैदान में परखी जा चुकी मिसाइलें समय पर मिल सकेंगी. जेवलिन ज्वाइंट वेंचर के अधिकारियों (रिच लिसिएन और जेना हंट फ्रेजियर) के अनुसार, इस कदम से पूरी दुनिया में बढ़ रही जेवलिन की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही, यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेगा.
जेवलिन मिसाइल का ट्रैक रिकॉर्ड
यह मिसाइल सिस्टम एरिजोना और फ्लोरिडा में तैयार किया जाता है. जेवलिन ज्वाइंट वेंचर अब तक 55,000 से अधिक जेवलिन मिसाइलें और 12,000 से अधिक दोबारा इस्तेमाल होने वाले कमांड लॉन्च यूनिट (CLU) बना चुका है. इस बड़े पैमाने के सह-उत्पादन से अमेरिकी सरकार को भी भारी मात्रा में उत्पादन के कारण लागत में बड़ी बचत होगी.
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