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मई 2026 में देश का सकल GST संग्रह 3.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़ हुआ

मई 2026 में कच्चे माल के भारी आयात और गुड्स-सर्विसेज सेक्टर में शानदार उछाल से देश का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन ₹1.94 लाख करोड़ पहुंचा.

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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 1, 2026 at 4:22 PM IST

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नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक बेहद शानदार और सकारात्मक खबर सामने आई है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 के महीने में भारत का कुल सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन 1,94,184 करोड़ रुपये (लगभग ₹1.94 लाख करोड़) दर्ज किया गया है. यह आंकड़ा पिछले साल यानी मई 2025 में हुए ₹1.88 lakh crore के कलेक्शन के मुकाबले 3.2 प्रतिशत अधिक है.

हालांकि, यदि हम चालू वित्तीय वर्ष के पिछले महीने यानी अप्रैल 2026 की तुलना करें, तो यह कलेक्शन उसके सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर (₹2.43 लाख करोड़) से थोड़ा कम हुआ है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल के मुकाबले मई में आने वाली यह मामूली गिरावट पूरी तरह से सामान्य और मौसमी बदलावों के अनुरूप है. इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि देश के बाजारों में वास्तविक मांग और विनिर्माण क्षेत्र में बहुत तेजी से विस्तार हो रहा है.

वन-टाइम पेमेंट हटाने पर दिखी असल रफ्तार: असली ग्रोथ 9%
पहली नजर में भले ही सालाना आधार पर यह बढ़त केवल 3.2% दिखाई दे रही हो, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा तकनीकी कारण छिपा है. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों ने स्पष्ट किया है कि पिछले साल मई 2025 में सरकार को टेलीकॉम स्पेक्ट्रम के एवज में ₹10,000 करोड़ का एकमुश्त विशेष भुगतान मिला था, जिससे पिछला आधार बहुत बड़ा हो गया था.

यदि हम इस बार के आंकड़ों में से उस असाधारण और एकमुश्त कमाई को हटाकर शुद्ध रूप से तुलना करें, तो इस साल मई में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन में 9 प्रतिशत की मजबूत और वास्तविक ग्रोथ दर्ज की गई है. इसी तरह, रिफंड घटाने के बाद जो नेट जीएसटी कलेक्शन सरकार के पास आया है, वह 3.3% की सामान्य बढ़त के बजाय वास्तव में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ा है. नेट जीएसटी राजस्व इस बार ₹1.66 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹1.61 लाख करोड़ था. यह सीधे तौर पर दिखाता है कि देश में टैक्स चोरी रुकी है और टैक्स कंप्लायंस (नियमों का पालन) में बड़ा सुधार हुआ है.

गुड्स सेक्टर में 27% का भारी उछाल: हर तरफ बढ़ी मांग
मई महीने के आंकड़ों का सबसे मजबूत स्तंभ हमारा गुड्स यानी वस्तुओं का क्षेत्र रहा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस पर जानकारी देते हुए बताया कि इस साल देश के भीतर वस्तुओं की टैक्स योग्य आपूर्ति में 27 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है. पिछले साल यह सप्लाई जहां ₹31.61 लाख करोड़ थी, वह अब बढ़कर ₹40.10 लाख करोड़ तक पहुंच गई है.

सबसे राहत की बात यह है कि यह तेजी किसी एक या दो चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. सरकार द्वारा ट्रैक किए जाने वाले सभी 27 कमोडिटी समूहों में चौतरफा मजबूती देखी गई है. इसका मतलब है कि देश के हर कोने में बुनियादी सामानों की मांग बढ़ी है. चाहे वह कृषि उत्पाद हों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर हो, केमिकल्स हों, मेटल्स (धातु) हों, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान हों या फिर रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें (FMCG) – हर जगह फैक्ट्रियों से लेकर खुदरा बाजारों तक सामान की भारी आवाजाही हो रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह सकारात्मक बदलाव सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में किए गए ऐतिहासिक सुधारों और रेशनलाइजेशन का सीधा नतीजा है.

सर्विसेज सेक्टर भी मजबूत: रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन चमके
समान रूप से, सर्विसेज (सेवा) सेक्टर ने भी देश की आर्थिक वृद्धि को पीछे से पूरा सहारा दिया है. चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से ही इस क्षेत्र में घरेलू खपत बहुत तगड़ी बनी हुई है. आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सर्विसेज सेक्टर में टैक्स योग्य आपूर्ति 22 प्रतिशत बढ़कर ₹11.50 लाख करोड़ पर पहुंच गई है, जो पिछले साल ₹9.41 लाख करोड़ थी.

सेवा क्षेत्र की इस ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्ट का रहा है. देश में नए हाईवे, बुनियादी ढांचे और आवासीय परियोजनाओं के निर्माण में भारी निवेश हो रहा है, जिससे सीमेंट, कंक्रीट और स्टील के साथ-साथ इंजीनियरिंग और ट्रांसपोर्ट सेवाओं की मांग को सीधे तौर पर गति मिल रही है.

फैक्ट्रियों के लिए कच्चे माल का आयात बढ़ा: औद्योगिक क्रांति का संकेत
मई 2026 के आंकड़ों का सबसे दिलचस्प और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आयातित वस्तुओं पर लगने वाले आईजीएसटी (IGST) कलेक्शन में 19.1 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी हुई है और यह ₹59,654 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है. टैक्स अधिकारियों के विश्लेषण के मुताबिक, विदेशों से आने वाले इस आयात में तैयार कंज्यूमर गुड्स (बने-बनाए विदेशी सामान) की हिस्सेदारी नहीं है, बल्कि हमारी घरेलू फैक्ट्रियों के लिए जरूरी कच्चा माल और ऊर्जा इनपुट सबसे ज्यादा मंगाए गए हैं.

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यह इस बात का स्पष्ट और शुरुआती संकेत है कि आने वाले महीनों में भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और अधिक तेजी से उत्पादन बढ़ाने जा रहा है. जिन प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा टैक्स और निवेश बढ़ा है, वे निम्नलिखित हैं:

इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर पार्ट्स: घरेलू स्तर पर मोबाइल, लैपटॉप और आईटी हार्डवेयर बनाने के लिए विदेशी पुर्जों का आयात बहुत तेजी से बढ़ा है. कंप्यूटर के मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट्स (Processing Units) पर टैक्स कलेक्शन 387% और डेटा स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स पर टैक्स 205% बढ़ गया है.

भारी और बुनियादी धातुएं (Metals): देश के भारी उद्योगों और बिजली क्षेत्र में तांबे की कमी को पूरा करने के लिए अनरिफाइंड कॉपर एनोड्स का आयात 219% और कॉपर ओर कंसंट्रेट का आयात 94% बढ़ा है. इसके अलावा, रीसाइक्लिंग और विनिर्माण के लिए एल्युमीनियम स्क्रैप के आयात में भी 46% की तेजी आई है.

क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV): प्रदूषण कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के मिशन के तहत देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों और बड़े पावर ग्रिडों के लिए इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी की मांग बहुत बढ़ गई है. इसके आयात पर टैक्स संग्रह में 66% का उछाल देखा गया है.

कोयला और बिजली क्षेत्र: देश के पावर प्लांट्स (बिजली घरों) और स्टील उत्पादन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए कोयले के आयात पर लगने वाले टैक्स में 391% की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जो देश की विशाल ऊर्जा आवश्यकता को दर्शाती है.

राज्यों का प्रदर्शन: महाराष्ट्र अव्वल, छोटे राज्यों में उतार-चढ़ाव
राज्यों के स्तर पर देखा जाए तो टैक्स कलेक्शन के मोर्चे पर देश में मिला-जुला और थोड़ा असमान रुझान देखने को मिला है. घरेलू राजस्व के मामले में बड़े औद्योगिक राज्यों ने अपना दबदबा बनाए रखा है:

शीर्ष और निचला स्तर: भारत में हमेशा की तरह इस बार भी महाराष्ट्र सबसे ज्यादा ₹29,141 करोड़ का घरेलू राजस्व जुटाकर पहले स्थान पर रहा. वहीं, सबसे कम कलेक्शन केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप से आया, जहां केवल ₹1 करोड़ का टैक्स इकट्ठा हुआ.

प्री-सेटलमेंट एसजीएसटी (SGST) के मोर्चे पर: राज्यों को मिलने वाले शुरुआती राज्य-जीएसटी (SGST) के मामले में केरल ने 19% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की. इसके बाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश 11-11% तथा उत्तर प्रदेश 9% की बढ़त के साथ आगे रहे. इसके विपरीत, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को प्री-सेटलमेंट कलेक्शन में 36% की भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है.

पोस्ट-सेटलमेंट एसजीएसटी (आबंटन के बाद): केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स के अंतिम बंटवारे के बाद, हरियाणा ने 22% की सबसे ऊंची विकास दर दर्ज की, जबकि इसके विपरीत झारखंड के कुल राजस्व में 35% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति
देश के पूर्वोत्तर राज्यों में टैक्स कलेक्शन का ग्राफ काफी ऊपर-नीचे होता दिखा है, जो छोटे राज्यों की आर्थिक संवेदनशीलता को दर्शाता है:

बढ़त वाले राज्य: मिजोरम ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 20% की छलांग लगाई, जबकि त्रिपुरा में 7% और नागालैंड में 1% की मामूली बढ़त रही.

गिरावट वाले राज्य: सिक्किम के जीएसटी कलेक्शन में 53% और मणिपुर में 42% की भारी कमी देखी गई. इसके साथ ही असम और मेघालय में 13-13% और अरुणाचल प्रदेश में 5% की गिरावट आई. पहाड़ी और दुर्गम केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी 18% की कमी दर्ज की गई.

आर्थिक विशेषज्ञों की राय
इस पूरे डेटा पर अपनी राय देते हुए जाने-माने टैक्स एक्सपर्ट और अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर ने कहा, "वैश्विक मंदी की आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चल रही अनिश्चितताओं के बीच भारत की औद्योगिक स्थिति बहुत मजबूत बनी हुई है. आयात होने वाले आईजीएसटी में 25.8% (कुल मिलाकर लगभग 19%) और कच्चे माल के आयात में यह भारी बढ़ोतरी साफ बताती है कि भारत के कारोबारी आने वाले समय के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें भरोसा है कि घरेलू बाजार में मांग और खपत लगातार बनी रहेगी."

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