भारतीय फार्मा सेक्टर: घरेलू बाजार में बढ़त, लेकिन अमेरिकी बाजार ने बढ़ाई चिंता
घरेलू बाजार में 12% की मजबूत बढ़त के बावजूद, अमेरिकी बाजार में कीमतों की गिरावट से भारतीय फार्मा कंपनियों का मुनाफा 6% घट सकता है.

Published : April 9, 2026 at 4:00 PM IST
नई दिल्ली: भारतीय दवा क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं. नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जहां भारत के घरेलू बाजार में दवाओं की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, वहीं अमेरिकी बाजार की चुनौतियों के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव देखा जा रहा है.
कमाई और मुनाफे का अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में फार्मा कंपनियों की कुल आय में 10% की बढ़ोतरी की उम्मीद है. हालांकि, कंपनियों के शुद्ध मुनाफे (PAT) में पिछले साल के मुकाबले 6% की गिरावट आ सकती है. इसके अलावा, कंपनियों का परिचालन लाभ मार्जिन भी घटकर 23.1% पर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से करीब 1.78% कम है.
घरेलू बाजार में मजबूत पकड़
भारतीय दवा बाजार (IPM) 12% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है. इस बढ़त के पीछे मुख्य कारण गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं. रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कैंसर (Oncology): इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा 33% की ग्रोथ देखी गई है.
- दिल की बीमारियां (Cardiac): इसमें 16% की बढ़त दर्ज की गई है.
- डायबिटीज (Anti-diabetic): इस क्षेत्र में भी 16% की बढ़ोतरी हुई है.
सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, जायडस और अजंता जैसी बड़ी कंपनियां घरेलू बाजार में इस शानदार प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं.
अमेरिकी बाजार की चुनौतियां
घरेलू बाजार की सफलता के बावजूद, अमेरिकी निर्यात बाजार भारतीय कंपनियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है. वहां जेनेरिक दवाओं की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट (Price Erosion) ने कंपनियों की कमाई को प्रभावित किया है. विशेष रूप से कैंसर की दवा 'gRevlimid' की कीमतों में आई भारी कमी से बड़ी कंपनियों के रेवेन्यू पर असर पड़ा है. सिप्ला (Cipla) जैसी कंपनियों को 'लैनरियोटाइड' से जुड़ी समस्याओं और घटते निर्यात के कारण दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.
मार्जिन गिरने के मुख्य कारण
रिपोर्ट में मार्जिन में गिरावट के लिए तीन प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है:
- कीमतों का दबाव: अमेरिका में दवाओं की कीमतों में भारी कटौती.
- लागत में वृद्धि: कच्चा माल महंगा होना और परिचालन खर्चों का बढ़ना.
- प्रोडक्ट मिक्स: कम मुनाफे वाले उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी.
कुल मिलाकर, भारतीय फार्मा सेक्टर का भविष्य फिलहाल दो दिशाओं में बंटा हुआ है. एक तरफ भारत में बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की मांग से ग्रोथ मिल रही है, तो दूसरी तरफ अमेरिका जैसे वैश्विक बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा और नियामक बाधाओं ने मुनाफे को कम कर दिया है. अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीति में क्या बदलाव करती हैं.
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