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मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव से भारतीय शेयर बाजार धराशायी: सेंसेक्स 1700 अंक टूटा, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे

मिडल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय बाजार धराशायी; सेंसेक्स 1773 अंक टूटा और निवेशकों के ₹8 लाख करोड़ डूबे.

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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 4, 2026 at 9:23 AM IST

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Updated : March 4, 2026 at 10:15 AM IST

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मुंबई: इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही भारतीय बाजार में सुनामी जैसा मंजर देखने को मिला. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स करीब 1,773 अंक (2.21%) गिरकर 78,465 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 549 अंक (2.21%) फिसलकर 24,316 पर खुला.

इस भारी बिकवाली के कारण चंद मिनटों में ही निवेशकों की करीब 7.93 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई. बाजार में छाई इस घबराहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डर को मापने वाला इंडेक्स 'इंडिया विक्स' (India VIX) 25% उछलकर 17.13 पर पहुंच गया.

हर तरफ लाल निशान, सिर्फ IT में दिखी हरियाली
बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा. निफ्टी के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. सबसे ज्यादा मार मेटल (3.18%) और रियल्टी (3.04%) सेक्टर पर पड़ी है. इसके अलावा ऑटो, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी 2.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का फायदा उठाते हुए आईटी (IT) सेक्टर एकमात्र ऐसा रहा जो 0.27% की मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में टिका रहा.

कच्चे तेल की आग ने बिगाड़ा गणित
मिडल ईस्ट में जारी तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है. ब्रेंट क्रूड $81 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें देश के व्यापार घाटे को बढ़ाने और महंगाई को बेकाबू करने का काम कर रही हैं.

एशियाई बाजारों में कोहराम
भारतीय बाजार अकेले नहीं गिरे; पूरे एशिया में हाहाकार मचा है. सबसे बुरा हाल दक्षिण कोरिया (South Korea) का रहा, जहां कोस्पी (Kospi) इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 12% तक टूट गया, जिसके बाद वहां ट्रेडिंग रोकनी पड़ी. जापान का निक्केई भी 4.17% की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की आक्रामक बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है. जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी.

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Last Updated : March 4, 2026 at 10:15 AM IST