सेंसेक्स 605 अंक और निफ्टी 193.5 अंक गिरकर बंद, दो महीने में सबसे निचले स्तर पर
ONGC और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने दर्ज की मजबूती, निफ्टी रियल्टी सबसे कमजोर. रुपया 22 पैसे कमजोर होकर 90.11 पर बंद.

Published : January 9, 2026 at 4:26 PM IST
|Updated : January 9, 2026 at 4:39 PM IST
मुंबई: लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक डील को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार कमजोर प्रदर्शन करते हुए बंद हुआ. सेंसेक्स 605 अंक गिरकर 83,576 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 193.5 अंक की गिरावट के साथ 25,683 पर बंद हुआ. यह लगातार पांचवें सत्र में गिरावट का संकेत है और दोनों बेंचमार्क इंडेक्स दो महीने से अधिक समय में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए.
निवेशक अमेरिकी टैरिफ की वैधता और दिसंबर के घरेलू महंगाई डेटा के परिणामों को लेकर सतर्क दिखाई दिए. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोमवार को आने वाला था, जिससे निवेशक बड़े निवेश निर्णयों में सावधानी बरत रहे थे. निफ्टी 25,840 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था. इंट्राडे हाई 25,940 और लो 25,648 अंक पर दर्ज किया गया.

ग्लोबल घटनाओं का भी बाजार पर असर पड़ा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक सैंक्शन बिल को मंजूरी देने से निवेशक चिंता में रहे. यह बिल उन देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है, जो रूस से तेल खरीदते हैं.
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो, ONGC और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने मजबूती दिखाई. वहीं, निफ्टी रियल्टी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर रहा. ऑटो सेक्टर 1.11 प्रतिशत और FMCG तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.17 प्रतिशत नीचे रहे. IT, PSU बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने सीमित मजबूती दिखाई.

मिड और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लाल निशान में बंद हुए. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.69 प्रतिशत और NSE स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.79 प्रतिशत नीचे गए. विशेषज्ञों का कहना है कि जियोपॉलिटिकल चुनौतियों के बावजूद बाजार रेंज में मिले-जुले रुझान के साथ ट्रेड कर सकता है.
घरेलू इक्विटी मार्केट की कमजोरी और लगातार FII की बिकवाली के दबाव में रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे कमजोर होकर 90.11 पर बंद हुआ.
विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू GDP ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. Q3 के नतीजों से मिडकैप्स की अगुवाई में रिकवरी का संकेत मिलने से निवेशक सेंटिमेंट स्थिर होने की उम्मीद है. हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है.

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