शेयर बाजार में कोहराम, मिडिल ईस्ट में तनाव से सेंसेक्स 10 महीने और निफ्टी 6 महीने के निचले स्तर पर
मिडिल ईस्ट तनाव से सेंसेक्स 1,123 अंक गिरकर 10-महीने और निफ्टी 6-महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ. मेटल शेयरों में भारी गिरावट रही.

Published : March 4, 2026 at 4:27 PM IST
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा. मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थायित्व, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया. इस अनिश्चितता के कारण बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट जारी रही, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी अपने कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए.
बाजार का हाल
कारोबारी सत्र के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,122.66 अंक (1.40%) की भारी गिरावट के साथ 79,116.19 के स्तर पर बंद हुआ. यह सेंसेक्स का पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 585.2 अंक (1.6%) फिसलकर 24,480.5 पर बंद हुआ, जो पिछले 6 महीनों का इसका सबसे कम स्तर है.

मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा मार
मुख्य सूचकांकों के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट यानी छोटे और मझोले शेयरों में गिरावट और भी गहरी रही. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.2% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.1% की गिरावट दर्ज की गई. इसने निवेशकों की संपत्ति (मार्केट कैप) में लाखों करोड़ रुपये की सेंध लगाई है.
सेक्टरवार प्रदर्शन
मेटल और बैंकिंग बेहालबाजार की इस सुनामी में मेटल सेक्टर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ. निफ्टी मेटल इंडेक्स दिन का सबसे बड़ा लूजर रहा. इसके अलावा पीएसयू बैंक और रियल्टी इंडेक्स में भी भारी बिकवाली देखी गई. दूसरी ओर, IT सेक्टर इकलौता ऐसा क्षेत्र रहा जो हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहा.

- टॉप गेनर्स: भारती एयरटेल, इंफोसिस और टेक महिंद्रा (सेंसेक्स के मात्र ये तीन शेयर बढ़त के साथ बंद हुए).
- टॉप लूजर्स: टाटा स्टील सबसे अधिक गिरा. इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो (L&T), बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, NTPC और इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 24,300–24,200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम करेगा. यदि बाजार इससे नीचे गिरता है, तो यह 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक जा सकता है. सुधार के लिए निफ्टी को 24,600 के रेजिस्टेंस को पार करना होगा.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है.
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