शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ खुले, बैंकिंग शेयरों में उछाल
सकारात्मक वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान पर खुले.

Published : September 3, 2026 at 10:09 AM IST
मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और एशियाई बाजारों में तेजी के रुख के बीच गुरुवार को भारतीय घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले. शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा सहारा दिया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 154.60 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,724.95 के स्तर पर खुला. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 83.50 अंक यानी 0.35 प्रतिशत चढ़कर 23,997.95 पर पहुंच गया.
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
बाजार में चौतरफा खरीदारी के बीच निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत तक की मजबूती देखी गई. इसके अलावा निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.83 प्रतिशत और निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.82 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. इसके विपरीत, आईटी (IT) और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर में बिकवाली का दबाव रहा. निफ्टी आईटी में 0.8 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई. हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर के शेयर भी मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे.
बाजार में तेजी के मुख्य कारण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई मामूली गिरावट से निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ है. इसके साथ ही, एक रियायती स्वैप सुविधा के तहत 136 अरब डॉलर जुटाए गए हैं, जिसमें एफसीएनआर (बी) योजना के माध्यम से आए 127 अरब डॉलर शामिल हैं. इस कदम से भारतीय रुपये को मजबूती मिलने और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है. बैंकों द्वारा जुटाई गई इस बड़ी रकम से उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होगा, जिससे बैंकिंग शेयरों को सीधा फायदा मिल रहा है.
तकनीकी स्तर और वैश्विक संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि बुधवार को बाजार में आई गिरावट मुख्य रूप से रिटेल निवेशकों और शॉर्ट-सेलर्स की वजह से थी, क्योंकि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (FIIs और DIIs) ने कुल 9,500 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी की थी. तकनीकी नजरिए से, निफ्टी के लिए 23,860 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है. यदि बाजार 24,150-24,215 के दायरे को पार करता है, तो आगे और बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है. वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ लंबे संघर्ष की आशंका को खारिज करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे वैश्विक बाजारों को राहत मिली.
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