कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक दबाव के बीच लुढ़का शेयर बाजार; सेंसेक्स 121 और निफ्टी 52 अंक फिसला
वैश्विक गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण सेंसेक्स 121 अंक और निफ्टी 52 अंक टूटकर लाल निशान में खुले.

Published : September 1, 2026 at 10:48 AM IST
|Updated : September 1, 2026 at 11:09 AM IST
मुंबई: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिल रही है. वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों, बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण घरेलू सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं.
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 121 अंक या 0.15% गिरकर 76,835 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 52.60 अंक या 0.21% की गिरावट के साथ 24,027.80 के स्तर पर कारोबार करता दिखा.
सेक्टर्स का हाल: कहाँ तेजी, कहाँ मंदी?
बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच कुछ सेक्टर्स में खरीदारी भी देखने को मिल रही है:
बढ़त वाले सेक्टर्स: एफएमसीजी (FMCG) इंडेक्स में 0.76% की सबसे ज्यादा तेजी रही. इसके अलावा मेटल (0.63%), मीडिया (0.61%), ऑटो (0.28%) और आईटी (0.24%) सेक्टर्स भी बढ़त के साथ हरे निशान में टिके हुए हैं.
गिरावट वाले सेक्टर्स: रियल्टी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट आई और यह 1.67% टूट गया. इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज (1.40%), हेल्थकेयर (1.34%), और फार्मा (1.20%) सेक्टर्स भारी दबाव में नजर आए. प्राइवेट बैंकों में भी सुस्ती का माहौल है.
बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है. इससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ रही हैं, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए चिंता की बात है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.77% और 30 साल की यील्ड 5.24% पर पहुंच गई है. ब्याज दरें ऊंची होने की वजह से विदेशी निवेशक सुरक्षित अमेरिकी बाजार की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.
विदेशी फंड्स की लगातार बिकवाली: पिछले सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय कैश मार्केट में ₹13,025 करोड़ के शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है.
आगे क्या उम्मीद है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक दिक्कतों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद बाजार को सहारा देगी. हाल ही में आए पहली तिमाही (Q1) के जीडीपी (GDP) आंकड़े 7.8% रहे हैं, जो काफी राहत देने वाले हैं. इससे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में देश की विकास दर 7% के आसपास रहेगी.
जानकारों के मुताबिक, निफ्टी 23,000 से 25,000 के दायरे में घूम सकता है. आज यदि निफ्टी 24,150-24,215 के स्तर को पार नहीं कर पाता है, और 24,000 का सपोर्ट लेवल टूटता है, तो बाजार में 23,575 के स्तर तक गिरावट आ सकती है.

