सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद ट्रंप का 'प्लान-बी'; अब पुराने कानून से लगाएंगे भारी टैक्स
सुप्रीम कोर्ट से IEEPA शक्ति छिनने के बाद, ट्रंप अब ट्रेड एक्ट 1974 के जरिए विदेशी सामान पर भारी टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं.

Published : February 27, 2026 at 9:43 AM IST
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए व्यापार युद्ध की राह अब कानूनी पेचीदगियों में फंस गई है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने राष्ट्रपति की उन शक्तियों पर लगाम लगा दी है, जिनका उपयोग वे अब तक दूसरे देशों से आने वाले सामान पर भारी टैक्स लगाने के लिए कर रहे थे. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने हार मानने के बजाय अब 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' के रूप में एक नया रास्ता खोज लिया है.
क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने 'लर्निंग रिसोर्सेज इंक बनाम ट्रंप' मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) का इस्तेमाल करके अपनी मर्जी से आयात शुल्क नहीं बढ़ा सकते. अदालत के मुताबिक, टैक्स लगाने का असली अधिकार संसद (कांग्रेस) के पास है. इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कई पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं और सरकार को अरबों डॉलर रिफंड करने पड़ सकते हैं.
ट्रंप के पास अब क्या हैं विकल्प?
कोर्ट से हाथ बंधने के बाद ट्रंप अब 'ट्रेड एक्ट 1974' के दो खास हिस्सों (सेक्शन) का इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं
सेक्शन 301
यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि यदि कोई देश अमेरिका के साथ व्यापार में भेदभाव या बेईमानी करता है, तो अमेरिका उस पर जवाबी टैक्स लगा सकता है. यह कानूनी रूप से बहुत मजबूत है क्योंकि इसे संसद ने खास तौर पर टैरिफ के लिए ही बनाया है. लेकिन इसके तहत टैक्स लगाने से पहले एक लंबी सरकारी जांच करनी पड़ती है और जनता की राय लेनी पड़ती है, जिसमें काफी समय लगता है.
सेक्शन 122 (आपातकालीन 150 दिन)
अगर अमेरिका का व्यापार घाटा बहुत बढ़ जाता है, तो इस कानून के तहत राष्ट्रपति तुरंत 15% तक टैक्स लगा सकते हैं. इसे बिना किसी जांच के तुरंत लागू किया जा सकता है. यह केवल 150 दिनों के लिए ही लागू रह सकता है. इसे आगे बढ़ाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी, जो ट्रंप के लिए मुश्किल हो सकता है.
अर्थव्यवस्था और आम जनता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अगर इन पुराने कानूनों का सहारा लेते हैं, तो दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता आ सकती है. यदि 150 दिनों वाला आपातकालीन टैक्स (सेक्शन 122) लगाया जाता है, तो शेयर बाजार इसे आर्थिक संकट मानकर गिर सकता है. दूसरी ओर, आयातित सामान महंगा होने से अमेरिकी जनता पर महंगाई की मार पड़ सकती है.
भारत के लिए क्या है संकेत?
भारत जैसे देशों के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ जहां ट्रंप की शक्तियां कम हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ 'सेक्शन 301' के तहत नई जांच शुरू होने से भारत के कपड़ा, आईटी और फार्मा निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है. ट्रंप प्रशासन अब "जैसे को तैसा" (Reciprocal Tariff) की नीति अपनाने के लिए और अधिक आक्रामक तरीके अपनाएगा.
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