2026 में महंगाई से राहत के संकेत, GST सुधारों से रिटेल इंफ्लेशन घटने की उम्मीद: SBI
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक जीएसटी सुधारों से 2026 में रिटेल महंगाई 35 बेसिस प्वाइंट तक घट सकती है, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी.

Published : December 13, 2025 at 3:44 PM IST
नई दिल्ली: नवंबर महीने में महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को भले ही झटका लगा हो, लेकिन आने वाला साल राहत लेकर आ सकता है. SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में देश की रिटेल महंगाई (CPI) में करीब 35 बेसिस प्वाइंट तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. इस गिरावट में वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े सुधारों की अहम भूमिका रहने वाली है.
GST सुधारों से महंगाई पर असर
SBI रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि GST दरों के युक्तिकरण और प्रक्रिया सुधारों से महंगाई पर सकारात्मक असर पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह आकलन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली अतिरिक्त छूट को शामिल किए बिना किया गया है. GST दरों में कमी के चलते ऑनलाइन बिक्री पर छूट और बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव और कम हो सकता है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में CPI महंगाई कुल मिलाकर करीब 35 बीपीएस तक घट सकती है.
केरल में महंगाई सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर महीने में केरल की महंगाई दर 8.27% दर्ज की गई. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 9.34% और शहरी इलाकों में 6.33% रही. SBI रिसर्च का कहना है कि राज्य में सोना, चांदी और तेल व वसा (Oil & Fats) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इसकी बड़ी वजह हो सकती है, क्योंकि इन वस्तुओं की खपत केरल में अपेक्षाकृत अधिक है.
महंगाई के रुझान में बदलाव
रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में CPI महंगाई की चाल में हाल के महीनों में बदलाव आया है. अक्टूबर 2025 में 0.25% रही महंगाई नवंबर में बढ़कर 0.71% हो गई. हालांकि, मार्च 2026 तक इसके 2.7% तक पहुंचने का अनुमान है.
रुपये में गिरावट को देखते हुए आगे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. SBI रिसर्च ने FY26 के लिए महंगाई 1.8% और FY27 के लिए 3.4% रहने का अनुमान जताया है.
RBI की ब्याज दरों पर क्या असर?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई के इन अनुमानों के बावजूद फरवरी की मौद्रिक नीति बैठक में RBI के ब्याज दरों के रुख में बदलाव की संभावना कम है.
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का आकलन
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल रिसर्च ने भी GST दरों में कटौती को समय पर उठाया गया कदम बताया है. बैंक के मुताबिक, इससे GDP में 0.1 से 0.16 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी और सालाना महंगाई में 40–60 बीपीएस की कमी आ सकती है. साथ ही, प्रक्रिया सुधारों से कारोबार करना आसान होगा और मध्यम अवधि में आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी.
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