कोल इंडिया की सभी सब्सिडियरीज 2030 तक शेयर बाजार में लिस्ट होंगी, PMO ने निर्देश दिया
PMO ने कोल इंडिया की सभी 8 सब्सिडियरीज को 2030 तक शेयर बाजार में लिस्ट करने का निर्देश दिया, BCCL और CMPDIL 2026 तक.

Published : December 28, 2025 at 12:39 PM IST
|Updated : December 28, 2025 at 2:51 PM IST
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कोयला मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की सभी 8 सब्सिडियरीज को 2030 तक शेयर बाजार में लिस्ट कराए. इसका उद्देश्य कंपनी की गवर्नेंस को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और एसेट मॉनेटाइजेशन के माध्यम से वैल्यू क्रिएट करना है.
CIL का महत्व
कोल इंडिया लिमिटेड देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है. यह देश की प्रमुख कोयला उत्पादन कंपनी है और भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. CIL नवंबर 2010 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी. इसका IPO 15,199.44 करोड़ रुपये का था और यह 15.28 गुना सब्सक्राइब हुआ था. वर्तमान में इसके शेयर की कीमत BSE पर 401.85 रुपये है और मार्केट कैप 2.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. सितंबर 2025 के अंत तक सरकार के पास 63.13 प्रतिशत हिस्सेदारी थी.
CIL की सब्सिडियरीज
- कोल इंडिया लिमिटेड की कुल 8 सब्सिडियरीज हैं.
- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL)
- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL)
- सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL)
- वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL)
- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL)
- नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL)
- महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL)
- सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL)
BCCL और CMPDIL की शीघ्र लिस्टिंग
सूत्रों के अनुसार, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) को मार्च 2026 तक शेयर बाजार में लिस्ट किया जाएगा. इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. BCCL के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रोडशो भी पूरे हो चुके हैं. लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है और इसमें किसी प्रकार की देरी नहीं होने की जानकारी है.
निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा
सरकार का मानना है कि सभी सब्सिडियरीज को लिस्ट कराने से CIL का कामकाज अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और व्यावसायिक दृष्टिकोण से मजबूत होगा. इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और एसेट्स के माध्यम से वैल्यू क्रिएट करने में मदद मिलेगी. यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करने और कोयला क्षेत्र में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.
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