PM मोदी ने पहली तिमाही में 7.8% GDP विकास दर को सराहा, इसे देश की 'सामूहिक शक्ति' का परिणाम बताया
पीएम मोदी ने वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में भारत की 7.8% जीडीपी विकास दर को जनता की सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया.

Published : September 1, 2026 at 10:23 AM IST
नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वास्तविक जीडीपी विकास दर दर्ज की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन आंकड़ों का स्वागत करते हुए इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास, दृढ़ संकल्प और कड़े परिश्रम का परिणाम बताया है.
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "7.8 प्रतिशत की विकास दर. मजबूत आंकड़े, उससे भी मजबूत हौसला. पूरी दुनिया संकटों और युद्ध जैसी स्थितियों से घिरी हुई है, लेकिन भारत इस विपरीत परिस्थिति में भी तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है."
7.8% growth.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2026
Strong numbers.
Even stronger confidence. pic.twitter.com/ZVPpnAXrVU
प्रमुख आर्थिक संकेतक और वैश्विक तुलना
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है. भारत की विकास दर ने दुनिया के कई बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है:
- भारत: 7.8%
- मलेशिया: 6.0%
- सिंगापुर: 5.9%
- इंडोनेशिया: 5.29%
- चीन: 4.3%
- अमेरिका: 2.1%
- यूरोपीय देश: 1% या उससे कम
इस अवधि के दौरान देश की नॉमिनल जीडीपी में 10.3 प्रतिशत और वास्तविक ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. कुल जीडीपी (स्थिर मूल्यों पर) 81.36 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है. सेक्टर्स की बात करें तो सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत की तेजी देखी गई, जिसमें वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और आईटी क्षेत्र 12.1 प्रतिशत की विकास दर के साथ सबसे आगे रहे. इसके अलावा, पूंजी निर्माण में भी 11.9 प्रतिशत का उछाल आया है, जो देश में बढ़ते निवेश को दर्शाता है.
'स्वदेशी' और आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने देश की आर्थिक गति को बनाए रखने और स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों से वित्तीय संयम और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया. उन्होंने मध्यम वर्ग से देश का पैसा देश के भीतर रखने की अपील करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:
- 1. घरेलू पर्यटन को बढ़ावा: अनावश्यक रूप से विदेशों में छुट्टियां बिताने के बजाय देश के पर्यटन स्थलों की यात्रा करें.
- 2. 'वेड इन इंडिया': विदेशों में होने वाली डेस्टिनेशन शादियों के चलन को रोककर देश के भीतर ही विवाह समारोह आयोजित करें
- 3. सोने के आयात में कमी: विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, सोना खरीदने से बचें.
- 4. स्थानीय ब्रांड्स का समर्थन: आगामी त्योहारों के दौरान देश भर में स्वदेशी मेलों का आयोजन किया जाए और हर घर में भारतीय ब्रांड्स को प्राथमिकता दी जाए.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
जीडीपी के इन शानदार आंकड़ों पर देश में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है. प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि इन आंकड़ों ने देश में निराशा और झूठ फैलाने वाले तत्वों को बेनकाब कर दिया है. सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे सरकार के आर्थिक सुधारों और कुशल प्रबंधन की जीत बताया है और देश के हर शहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस उपलब्धि को जनता तक पहुंचाने की योजना बनाई है.
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दलों ने इन आंकड़ों को "अधूरा सच" करार दिया है. विपक्ष का सवाल है कि यदि जीडीपी इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो आम परिवारों की आय, घरेलू बचत और रोजगार के अवसरों में उस अनुपात में सुधार क्यों नहीं दिख रहा है?
वित्त मंत्रालय ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार आर्थिक सुधारों को जारी रखने और निवेश व सेवा क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिससे समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंच सके.
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