Explainer: बिहार निवेशकों को लुभाने के मामले में सबसे पीछे क्यों?
नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि बिहार निवेशकों को लुभाने के मामले में सबसे पीछे हैं. जानें वजह.. रिपोर्ट- बृजम पांडे

Published : September 2, 2026 at 8:10 PM IST
पटना: बिहार के उद्योग के लिए बुरी खबर है. नीति आयोग ने अपने इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में बिहार को पिछले पायदान पर रखा है. 100 अंकों के पैमाने पर बिहार को महज 41.2 अंक ही प्राप्त हो सके हैं. देश के बड़े 17 राज्यों की सूची में बिहार सबसे निचले 17वें पायदान पर है, जबकि कुल 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे 26वां स्थान मिला है. इसी तरह पेटेंट के मामले में भी बिहार फिसड्डी रहा है.
नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार फिसड्डी: नीति आयोग की इस रिपोर्ट में राज्यों की रैंकिंग तय करने के लिए 8 मानकों को आधार बनाया गया था, जिसमें आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, संसाधनों की उपलब्धता, सरकारी नीतियां, विनियामक सुगमता, राज्यों की वित्तीय सेहत, संस्थागत वातावरण और पर्यावरणीय लचीलापन शामिल था. इन सभी पैमानों पर बेहतर काम ना कर पाने की वजह से बिहार सबसे पिछले पायदान पर आया है.

यह सूचकांक इसलिए बनाया गया था, क्योंकि यह सभी राज्यों में एक रिसर्च कर सके कि कहां कारोबारी माहौल बेहतर है यानी कि इन्वेस्टमेंट का तौर तरीका और सरकारी नीतियां उनके मुताबिक है या नहीं? इन बातों को रखते हुए यह सूचकांक तैयार किया गया है जिसमें बिहार फिसड्डी साबित हुआ है.
निवेशकों को लुभाने में पीछे
रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2026 निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार में 36 राज्यों की सूची में 26वें और 17 बड़े राज्यों में 17वें स्थान पर है. आधारभूत संरचना, कारोबार माहौल और जमीन आवंटन की जटिलताओं के कारण 100 में से महज 41.2 अंक मिले हैं.

बिहार में वित्तीय वर्ष 2024 25 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सिर्फ 0.16 मिलियन डॉलर ही रहा, जबकि इसी वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र में 15116 मिलियन डॉलर, दिल्ली में 6523 मिलियन डॉलर, कर्नाटक में 6571 मिलियन डॉलर रहा है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को एफडीआई भी कहते हैं.
पूरे देश के एफडीआई का 85% हिस्सा तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र राज्यों को जाता है. इसमें भी बिहार पूरी तरह से फिसड्डी साबित हुआ है. पूरे देश में बड़े राज्यों का औसत पेटेंट दाखिल करने का दर 3.6 फ़ीसदी रही है जबकि बिहार मात्र 0.48 फीसदी दाखिल हो सका है.
रिपोर्ट में क्या है सुझाव?
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के मामले में प्रदर्शन ठीक नहीं रहा है, यहां बिजनेस के माहौल और वित्तीय स्थिति में सुधार की बड़ी गुंजाइश है. देश के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.9% हिस्सा होने के बावजूद, बिहार में देश के कुल नेशनल हाईवे का 4%, ग्रामीण सड़कों का 8% और रेल ट्रैक की लंबाई का 5.7% हिस्सा है.
बिहार के बिजनेस माहौल में सुधार की काफी गुंजाइश है. प्रति व्यक्ति GSDP सिर्फ ₹44,000 है. जिससे पता चलता है कि आर्थिक उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है. वहीं, इंडस्ट्री को दिया जाने वाला बैंक क्रेडिट GSDP का लगभग 6.7% है, जिससे पता चलता है कि बिजनेस के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट बढ़ाने जरूरत है.

इसके अलावे MSME बेस में मीडियम और छोटे उद्यमों की हिस्सेदारी के मामले में बिहार 32वें स्थान पर है, जो एक ज्यादा डायनामिक और मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम विकसित करने जरूरत है. 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औसत कुल बकाया GSDP से लगभग 500 bps अधिक होना, फाइनेंशियल हेल्थ के मामले में सुधार की गुंजाइश को दिखाता है.
इन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार ने बिजली और पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में काफी तरक्की की है. इन जरूरी सेवाओं की उपलब्धता और भरोसेमंद होने में भी काफी सुधार हुआ है. बिहार ने पर्यावरण मंज़ूरी की प्रक्रिया को आसान बना दिया है, जिससे अफसरशाही की रुकावटें कम हुई हैं और प्रोजेक्ट को तेजी से मंजूरी मिल रही है.
क्या कहते है एक्सपर्ट?
एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट से जुड़े अर्थशास्त्री विद्यार्थी विकास कहते हैं कि बिहार में अभी किसी खास इंडस्ट्रियल पार्क या अच्छी तरह से स्थापित इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. यह बड़े पैमाने पर निवेश लाने, एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने और राज्य में आर्थिक विकास करने में एक बड़ी रुकावट है. एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम न होने से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट जैसे अहम सेक्टर के विकास में बाधा आती है, जिससे राज्य की आर्थिक क्षमता सीमित हो जाती है.

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर करना होगा काम
कनेक्टिविटी, कम्युनिकेशन और कुल मिलाकर डिजिटल इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए बिहार के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सकता है. सुरक्षा और संरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण बिहार में निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है, जिससे संभावित निवेशक राज्य में निवेश करने से हिचकिचाते हैं.
विद्यार्थी विकास कहते हैं कि कानून-व्यवस्था की कमी की धारणा, साथ ही अपराध और अशांति की घटनाओं से एक ऐसा माहौल बनता है, जहां लोग जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे बिहार के लिए चुनौतियाँ पैदा होती हैं. बिहार में स्किल्ड नौकरी के सीमित मौकों का यहां के लोगों के जीवन की कुल गुणवत्ता पर काफी असर पड़ता है. बिहार में जमीन आवंटन की प्रक्रिया अक्सर जटिल और चुनौतीपूर्ण होती है, जिसमें लंबी प्रक्रियाएं और अफसरशाही की रुकावटें शामिल होती हैं.
"निवेशक कई पैमानों को देखते हुए निवेश करते हैं. चाहे वह आधारभूत संरचना हो, बिजली हो सरकार की नीतियां हो, अब बिहार में बिजली की स्थिति संतोषजनक है लेकिन 24/7 भरोसेमंद और बिना रुकावट बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए और सुधार की जरूरत है."- विद्यार्थी विकास, अर्थशास्त्री
विद्यार्थी विकास कहते हैं, 'पूरे भारत का 8 फीसदी ग्रोथ होता है तो उसमें बिहार का भी ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत चाहिए. वह सभी मामलों में होना चाहिए. बिहार का भी 8% ग्रोथ रेट होगा, तभी भारत एक विकसित राज्य बनेगा.

निवेशकों को क्यों नहीं है रुचि?
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान कहते हैं कि बिहार बहुत बड़ा बाजार है. यहां हर चीज की आवश्यकता है. गरीब राज्य होने के साथ-साथ हमारे यहां संसाधन सीमित है. बिहार सरकार ने अच्छी नीति बनाई है. एक रुपये में जमीन दी जा रही है, ऐसा हिंदुस्तान में कहीं भी नहीं है. पिछले साल जो बिजनेस कनेक्ट हुआ था, उनमें में से कुछ इन्वेस्टर यहां आए हैं. उस समय जब आए होंगे तो उनकी विचारधारा कुछ रही होगी, बहुत सारे लोग ऐसे ही घोषणा कर देते हैं. MOU का कोई आधार नहीं होता है.
वे कहते हैं कि असल में एमओयू एक समझौता होता है. जिसमें आपको लगता है कि मुझे यह काम करना चाहिए और मेरा विचार बदल जाता है. फिर कहीं अच्छी अपॉर्चुनिटी मिली तो वहां चले जाते हैं. जितना एमओयू होता है, वह हंड्रेड परसेंट कहीं भी नहीं आता है लेकिन भारत के अन्य राज्यों के लिहाज से यहां इन्वेस्टमेंट कम है.
रामलाल खेतान आगे कहते हैं, 'बिहार में जो नीति बनी है उसका असर है कि लोग यहां आ रहे हैं. अब यहां केंद्र सरकार के स्पेशल पैकेज की जरूरत है. बड़े औद्योगिक घरानों को बिना केंद्र सरकार के सहमति से यहां नहीं लाया जा सकता है.'
वह ये भी बताते हैं कि नीति आयोग की रिपोर्ट से पता चलता है कि कई मामलों में बिहार अग्रणी भी रहा है लेकिन जहां तक उद्योग का मामला है, उसमें हम लोगों को जितनी सफलता मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिल पाई है. उसमें नीतियों में कुछ कमियां रही होगी, उन नीतियों में सरकार लगातार बदलाव कर रही है.
"ऐसी बात नहीं है कि निवेशक इंटरेस्ट नहीं ले रहे हैं लेकिन यह भी सच है कि जितनी रुचि लेनी चाहिए, वैसा इंटरेस्ट वह ले नहीं रहे हैं. हाल के दिनों में काफी इन्वेस्टमेंट आया है आगे भी और आएगा."- रामलाल खेतान, अध्यक्ष, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
क्यों नहीं हो रहा सुधार?
वहीं, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम अग्रवाल कहते हैं नीचे से हम लोग टॉप पर हैं, यह अच्छी बात नहीं है. हम लोग देश की 11% आबादी हैं. हमारे यहां टैलेंट है लेकिन उसका पूरा उपयोग नहीं हो पाया है. उद्योग में हमारे यहां जितनी नीतियां बनी हैं, 2011 की जो पॉलिसी थी, वह बहुत अच्छी थी. उस समय कुछ उद्योग आए भी. इंप्लीमेंटेशन में कुछ कमियां रही, जिसके कारण जो होना चाहिए वह नहीं हो पाया है.
पुरुषोत्तम अग्रवाल बताते हैं उद्योग लगाने के लिए जमीन चाहिए, पूंजी निवेश चाहिए. बैंक भी इसको लेकर उत्साहित नहीं है. बैंक अपने पैसे को बहुत सिक्योर बनाना चाहती हैं. जबकि बैंकों को हर सुविधा मिल रही हैं लेकिन, बैंक अपने नॉर्म्स पूरा नहीं कर पा रही हैं. ऐसा भी नहीं है जो लोग अहर्ता रखते हैं, उनको लोन मिल भी रहा है. सरकार की पॉलिसी सारी चीजों पर डिपेंड करती है. आज के डेट में काफी अच्छी पॉलिसी है.
"लगातार हम लोग प्रयासरत हैं, सरकार प्रयासरत है. सरकार के साथ मिलकर हम लोग पूरा करेंगे. ऐसा हम लोग समझते हैं कि अगले चार-पांच साल में हम लोग बेहतर परफॉर्म करेंगे. यदि हम लोग मिलजुलकर इस पर काम करेंगे तो अगले चार-पांच सालों में हम लोग बेहतर रिजल्ट दे सकते हैं."- पुरुषोत्तम अग्रवाल, उपाध्यक्ष, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

क्या है निवेश अनुकूल सूचकांक?
निवेश अनुकूल सूचकांक (इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स) असल में डेटा आधारित मूल्यांकन प्रणाली है, जो यह मापती है कि निवेश के लिए विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कितना अनुकूल माहौल प्रदान करते हैं. निवेश अनुकूल सूचकांक नीति आयोग जारी करता है. इसके तहत 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है.
8 स्तंभों के आधार पर मूल्यांकन
निवेश अनुकूलता सूचकांक का मूल्यांकन आठ स्तंभों के आधार पर किया जाता है. इसके तहत अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर), कारोबारी वातावरण, संसाधन, सरकारी नीति, नियामकीय सुगमता (रेगुलेटरी इज), संस्थागत वातावरण, वित्तीय सुदृढ़ता और पर्यावरणीय लचक (एनवायरमेंटल रेसिलिएंस) शामिल है.
ये भी पढ़ें:
बिहार में 51,600 करोड़ के निवेश के लिए MoU, 'स्टील हब' बनाने पर सरकार का जोर
सड़क और पुल के लिए मिलेगा 21000 करोड़ लोन, CM सम्राट की मौजूदगी में नाबार्ड से MoU
बिहार में बसेंगे 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप, सम्राट सरकार का HUDCO के साथ MOU
11 लाख की कंपनी के साथ 22,500 करोड़ का MoU, तेजस्वी ने सम्राट सरकार पर लगाये घोटाले का आरोप

