'3 दिन में माफी मांगो वरना एक्शन लेंगे!' PM मोदी का वीडियो हटाने पर जुकरबर्ग को चेतावनी; क्या बंद हो जाएंगे फेसबुक, यूट्यूब, X?
मेटा द्वारा पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर संसदीय समिति ने मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन में माफी या सेफ हार्बर खोने की चेतावनी दी.

Published : August 5, 2026 at 3:26 PM IST
नई दिल्ली: फेसबुक द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को अस्थाई रूप से हटाए जाने पर भारत सरकार और सोशल मीडिया दिग्गज 'मेटा' के बीच विवाद गहरा गया है. संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी स्थायी समिति ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है.
यह मामला तब सामने आया जब प्रधानमंत्री का एक वीडियो फेसबुक पर करीब 5 से 6 घंटे तक उपलब्ध नहीं था. इस वीडियो में पीएम मोदी छात्रों को परीक्षा विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई पर संबोधित कर रहे थे. लोकसभा सचिवालय की निदेशक ए. ज्योतिर्मयी द्वारा हस्ताक्षरित पत्र के अनुसार, संसदीय समिति ने इस तकनीकी चूक को बेहद गंभीरता से लिया है.
समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) को निर्देश दिया है कि यदि जुकरबर्ग तय समय सीमा में माफी नहीं मांगते हैं, तो आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मेटा को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (कानूनी सुरक्षा) वापस ले ली जाए. यह सुरक्षा हटने से मेटा एक 'मध्यस्थ' के बजाय 'प्रकाशक' (पब्लिशर) बन जाएगी, जिससे कंपनी पर प्लेटफॉर्म के कंटेंट के लिए सीधे आपराधिक मुकदमे चलाए जा सकेंगे.
क्या है सेफ हार्बर क्लॉज?
भारत में सोशल मीडिया कंपनियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत सेफ हार्बर का संरक्षण मिलता है. इसका मतलब यह है कि फेसबुक, यूट्यूब, एक्स, इंस्टाग्राम या व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर अगर कोई यूजर कोई पोस्ट, वीडियो या फोटो डालता है, तो उसके लिए सीधे कंपनी को जिम्मेदार नहीं माना जाएगा. यानी प्लेटफॉर्म केवल एक माध्यम है और कंटेंट का असली मालिक वह यूजर होता है जिसने उसे पोस्ट किया है. इसी कानूनी सुरक्षा के कारण हर आपत्तिजनक या विवादित पोस्ट के लिए पुलिस सीधे कंपनी पर मुकदमा दर्ज नहीं करती.
क्या यह सुरक्षा हमेशा के लिए होती है?
नहीं, यह सुरक्षा कुछ कड़ी शर्तों के साथ मिलती है. सोशल मीडिया कंपनियों को भारत सरकार और देश के कानून द्वारा तय नियमों का पूरी तरह पालन करना होता है. यदि कोई अदालत या सरकारी एजेंसी किसी गैरकानूनी कंटेंट को हटाने का आदेश देती है, तो कंपनियों को तय समय के भीतर उसे हटाना पड़ता है. इसके अलावा, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), आतंकवाद, हिंसा या महिलाओं को अपमानित करने वाले कंटेंट पर कंपनियों को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी होती है. अगर कोई कंपनी बार-बार नियमों का उल्लंघन करती है या जानबूझकर असहयोग करती है, तो उसका यह संरक्षण खत्म किया जा सकता है.
सेफ हार्बर हटा तो क्या होगा?
बहुत से लोगों को लगता है कि सेफ हार्बर हटते ही फेसबुक, यूट्यूब या एक्स भारत में बंद हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. सेफ हार्बर हटने का सीधा मतलब यह होगा कि कंपनी यह कहकर बच नहीं सकेगी कि वह सिर्फ एक माध्यम है. इसके बाद, प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी गैरकानूनी या भड़काऊ कंटेंट के लिए कंपनी और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सीधे पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज हो सकती है और अदालत में आपराधिक मुकदमा चल सकता है. इससे इन कंपनियों का कानूनी जोखिम और आर्थिक बोझ दोनों काफी बढ़ जाएगा.
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