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वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट; सेंसेक्स और निफ्टी साप्ताहिक आधार पर 1.5% टूटे

वैश्विक तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता में अनिश्चितता के कारण सेंसेक्स और निफ्टी 1.5% गिरे. मजबूत जीडीपी के बावजूद बाजार में भारी बिकवाली रही.

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सांकेतिक फोटो (getty image)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 28, 2026 at 1:06 PM IST

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नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही गिरावट के साथ बंद हुए. अगर पूरे हफ्ते की बात करें, तो बाजार करीब 1.5% नीचे गिर गया. शुक्रवार, 27 फरवरी को बाजार में भारी बिकवाली देखी गई. सेंसेक्स 961 अंक गिरकर 81,287 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 317 अंक टूटकर 25,178 के स्तर पर आ गया. निवेशकों में इस बात को लेकर डर है कि वैश्विक स्तर पर चल रही खींचतान का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

गिरावट के मुख्य कारण
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ हुई बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. इससे तेल की कीमतों और वैश्विक स्थिरता को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है. अकेले शुक्रवार को ही उन्होंने भारी बिकवाली की, जिससे बाजार संभल नहीं पाया.

वैश्विक संकेत: अमेरिका में ब्याज दरों और व्यापार नीतियों को लेकर जारी असमंजस ने भी निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया है.

किन सेक्टरों में रही हलचल?
बाजार की इस गिरावट में सबसे ज्यादा मार ऑटो, बैंकिंग, रियल्टी और मेटल सेक्टर पर पड़ी. इन सेक्टरों के शेयर 1 से 2 फीसदी तक टूट गए. हालांकि, IT (आईटी) और मीडिया शेयरों में थोड़ी मजबूती देखी गई, जिससे गिरावट की रफ्तार को कुछ हद तक रोकने में मदद मिली.

आगे क्या होगा?
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. मोतीलाल ओसवाल के विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 25,400 का स्तर एक बड़ी बाधा है. जब तक बाजार इस स्तर के ऊपर नहीं जाता, तब तक सावधानी बरतने की जरूरत है. बैंकिंग सेक्टर में भी 60,000 का स्तर काफी महत्वपूर्ण है.

भले ही भारत के जीडीपी (GDP) आंकड़े मजबूती दिखा रहे हैं, लेकिन ग्लोबल मार्केट के दबाव की वजह से निवेशक अभी "देखो और इंतजार करो" की रणनीति अपना रहे हैं. अगले हफ्ते अमेरिका-ईरान वार्ता के अगले दौर पर सबकी नजर रहेगी.

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