हाल के समय में बीएसई सेंसेक्स की बड़ी बढ़त ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, देखें कब-कब बढ़ा सेंसेक्स
सेंसेक्स में 2,946 अंकों की ऐतिहासिक बढ़त से निवेशकों की संपत्ति ₹16 लाख करोड़ बढ़ी,जिसने वैश्विक शांति संकेतों के बीच पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए.

Published : April 9, 2026 at 9:54 AM IST
हैदराबाद: बीते कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने इतिहास के पन्नों को बार-बार पलटा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स, 'सेंसेक्स', निवेशकों के लिए न केवल वेल्थ क्रिएशन का जरिया बना है, बल्कि इसने वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण भी दिया है. हाल के दिनों में सेंसेक्स ने कई बार 2,000 से अधिक अंकों की ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जो बाजार के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाती है.
ऐतिहासिक बढ़त के प्रमुख मील के पत्थर
हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो 8 अप्रैल 2026 की तारीख बाजार के इतिहास में दर्ज हो गई है. इस दिन सेंसेक्स में 2,946 अंकों (3.95%) की विशाल बढ़त देखी गई. इस तेजी के पीछे का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का फिर से खुलना था. इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद जगाई, जिससे भारतीय बाजार 'बुल रन' की सवारी पर निकल पड़ा.
इससे पहले 12 मई 2025 को भी बाजार ने 2,975 अंकों की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की थी. तब भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में कमी ने निवेशकों के सेंटिमेंट को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था.
राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत फैसले
भारतीय शेयर बाजार हमेशा से राजनीतिक स्थिरता का समर्थक रहा है. जून 2024 में जब एग्जिट पोल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की भविष्यवाणी की, तब 3 जून को सेंसेक्स 2,507 अंक उछला. हालांकि चुनावी नतीजों के दिन उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन जैसे ही 5 जून को एनडीए (NDA) गठबंधन की स्थिरता सुनिश्चित हुई, बाजार ने फिर से 2,303 अंकों की रिकवरी दिखाई.
इसी तरह, फरवरी 2026 की शुरुआत में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18% करने की घोषणा की, तो सेंसेक्स ने 2,072 अंकों की छलांग लगाकर इस आर्थिक कूटनीति का स्वागत किया.
संकट में भी मिली बढ़त
इतिहास गवाह है कि संकट के समय भी सेंसेक्स ने वापसी की है. 7 अप्रैल 2020 को जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी, तब संक्रमण के मामलों में मामूली कमी की खबरों के बीच सेंसेक्स 2,476 अंक (करीब 9%) उछला था. वहीं 1 फरवरी 2021 को पेश किए गए केंद्रीय बजट ने निवेशकों को इतना उत्साहित किया कि बाजार ने 2,314 अंकों की रैली की.
सेंसेक्स की ये विशाल बढ़त दर्शाती है कि भारतीय शेयर बाजार अब केवल घरेलू कारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक नीतियों पर भी त्वरित प्रतिक्रिया देता है. 2025-26 के दौरान सेंसेक्स ने जिस तरह 85,000 के स्तर को छुआ, वह भारतीय कंपनियों की मजबूत अर्निंग और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) के निरंतर प्रवाह का नतीजा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक व्यापार संबंध इसी तरह सुधरते रहे, तो सेंसेक्स जल्द ही 1,00,000 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को भी पार कर सकता है.
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