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LIC OFS सुपरहिट, सरकार ने बेचे 82.23 करोड़ शेयर, खजाने में आए ₹31,552 करोड़

सरकार ने एलआईसी के 82.23 करोड़ शेयर बेचकर ₹31,552 करोड़ जुटाए, जिससे पब्लिक हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 10% हो गई है.

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निवेशकों के धमाकेदार रिस्पॉन्स के साथ बंद हुआ एलआईसी ओएफएस, सरकार को मिले ₹31,552 करोड़ (ani)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 6, 2026 at 9:55 AM IST

2 Min Read
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नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) के शेयर बेचकर ₹31,552 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस प्रक्रिया को 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) कहा जाता है. सरकार के निवेश विभाग (DIPAM) के सचिव ने सोशल मीडिया पर इस बड़ी कामयाबी की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बाजार के बड़े निवेशकों और आम जनता दोनों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

निवेशकों के भारी उत्साह को देखते हुए सरकार ने अपने पास सुरक्षित रखे अतिरिक्त शेयर भी बाजार में बेच दिए. इस बिक्री के बाद अब एलआईसी में आम जनता और अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है. इसके साथ ही एलआईसी ने शेयर बाजार के उस जरूरी नियम को समय से पहले पूरा कर लिया है, जिसके तहत हर लिस्टेड कंपनी में कम से कम 10% हिस्सेदारी पब्लिक की होनी जरूरी है.

देश का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस ऑफर के तहत कुल 82,23,33,558 शेयर बेचे गए हैं. पैसों के मामले में यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर बन गया है. विभाग के सचिव ने एलआईसी पर भरोसा जताने के लिए सभी छोटे-बड़े निवेशकों का धन्यवाद किया है.

जब शेयर बाजार बंद हुआ, तब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर एलआईसी का एक शेयर 393 रुपये पर बंद हुआ. सरकार ने इस बिक्री के लिए शुरुआती कीमत (फ्लोर प्राइस) 382 रुपये तय की थी. यानी निवेशकों को पहले ही दिन प्रति शेयर करीब 11 रुपये का फायदा देखने को मिला. पहले सरकार सिर्फ 2.5% शेयर बेचने वाली थी, लेकिन भारी मांग के कारण 4% अतिरिक्त शेयर भी बेचे गए.

मुख्य बातें:

  • कुल कमाई: सरकार को ₹31,552 करोड़ की बड़ी रकम मिली.
  • शेयरों की संख्या: बाजार में कुल 82.23 करोड़ से ज्यादा शेयर बेचे गए.
  • तय कीमत: शुरुआती कीमत ₹382 थी, जो बढ़कर ₹393 पर बंद हुई.
  • नियम पूरा: सरकारी नियम के मुताबिक पब्लिक की हिस्सेदारी 10% पहुंच गई है.

यह बिक्री पहले दिन बड़े निवेशकों के लिए और दूसरे दिन आम जनता के लिए खुली थी. दोनों ही दिन इसे उम्मीद से कहीं ज्यादा खरीदार मिले. इस कामयाबी से सरकार के विनिवेश (सरकारी कंपनियों के शेयर बेचने) के लक्ष्य को बड़ी मजबूती मिली है. इस पैसे का इस्तेमाल देश के विकास कार्यों में किया जाएगा.

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