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जस्टिस रंजना देसाई को चुना गया 8वां वेतन आयोग का अध्यक्ष, क्या होगा कमीशन का अगला कदम?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की रिटायर जस्टिस देसाई को 8वें वेतन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है.

8th Pay Commission
8वां वेतन आयोग (सांकेतिक तस्वीर Getty Images)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : October 29, 2025 at 7:27 PM IST

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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए टर्म ऑफ रिफ्रेंस (ToR) को मंजूरी दी. इसके साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और भत्तों में नए सिरे से संशोधन का रास्ता साफ हो गया है. साथ ही केंद्र ने जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को 8वें वेतन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है.

वेतन आयोग में एक सदस्य पार्ट टाइम और एक सदस्य-सचिव शामिल होगा. साथ ही IIM बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष को सदस्य होंगे, जबकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पंकज जैन को सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट की रिटायर जस्टिस देसाई को इससे पहले 2020 में परिसीमन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और फिर 2022 में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (UCC) समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया था. फरवरी 2025 में उन्हें गुजरात यूसीसी पैनल का प्रमुख भी नियुक्त किया गया था.

क्या होगा अगला कदम?
रिटायर जस्टिस रंजना देसाई के नेतृत्व में आठवां वेतन आयोग केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले सभी हितधारकों से मुलाकात करेगा. सिफारिशों में वेतन और पेंशन में संशोधन के लिए फिटमेंट फैक्टर और अन्य तौर-तरीकों पर उसके प्रस्ताव शामिल होंगे.

18 महीने में रिपोर्ट सौंपेगा आयोग
कैबिनेट बैठक के बाद जारी एक प्रेस नोट में कहा गया कि आठवां वेतन आयोग लगभग 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. आमतौर पर वेतन आयोगों की सिफारिशें हर दस साल के अंतराल के बाद लागू की जाती हैं. इस प्रवृत्ति के अनुसार आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं."

इससे पहले जुलाई 2016 में सातवां वेतन आयोग लागू किया गया था, लेकिन कर्मचारियों को जनवरी 2016 से शुरू होने वाली छह महीने की अवधि के लिए बकाया राशि का भुगतान किया गया था. उस समय, पैनल ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी. लेकिन वास्तविक वृद्धि कम थी, क्योंकि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत को शून्य कर दिया गया था.

इस बार भी डीए और डीआर 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद शून्य कर दिया जाएगा. वर्तमान में डीए और डीआर मूल वेतन का 58 फीसदी है.

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