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ईरान युद्ध की दोहरी मार: वैश्विक शिपिंग और एयर कार्गो ठप, अब सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि कई चीज होगी महंगी

ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट और हवाई मार्ग बंद होने से दवाओं, चिप्स व खाद्यान्न की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है.

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सांकेतिक फोटो (AP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 4, 2026 at 4:12 PM IST

3 Min Read
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न्यूयॉर्क: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब केवल कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रह गया है. इस युद्ध ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है, जिससे भारत की जीवन रक्षक दवाओं से लेकर एशिया के सेमीकंडक्टर (चिप्स) और मिडिल ईस्ट के खाद तक सब कुछ संकट में है.

समंदर में थमी रफ्तार: 3,200 जहाज फंसे
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह बंद हो गई है. क्लार्कसन रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3,200 मालवाहक जहाज वर्तमान में फारस की खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं. यह दुनिया की कुल शिपिंग क्षमता का लगभग 4% है.

हालाँकि यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका 'डोमिनो इफेक्ट' पूरी दुनिया में दिखेगा. जब एक बंदरगाह पर जहाज रुकते हैं, तो उसका असर अगले और पिछले सभी बंदरगाहों पर पड़ता है, जिससे वैश्विक स्तर पर माल की भारी कमी हो सकती है.

अफ्रीका का लंबा चक्कर और बढ़ता खर्च
दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी 'मर्स्क' (Maersk) समेत कई कंपनियों ने स्वेज नहर और लाल सागर का रास्ता छोड़ दिया है. अब जहाज अफ्रीका के दक्षिणी कोने (केप ऑफ गुड होप) से होकर लंबा चक्कर लगा रहे हैं.

  • अतिरिक्त समय: इस नए रास्ते से सामान पहुँचने में 10 से 14 दिन ज्यादा लग रहे हैं.
  • भारी खर्च: एक चक्कर में लगभग 10 लाख डॉलर (करीब 8.3 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त ईंधन खर्च हो रहा है.
  • नया टैक्स: कंपनियां अब ग्राहकों से 'वॉर रिस्क सरचार्ज' (युद्ध जोखिम शुल्क) वसूल रही हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा.

हवाई माल ढुलाई (Air Cargo) पर संकट
केवल समंदर ही नहीं, आसमान में भी रास्ते बंद हैं. यूएई (दुबई/अबू धाबी), कतर और कुवैत जैसे देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने से एयर कार्गो पूरी तरह ठप है. एमिरेट्स, कतर एयरवेज और एतिहाद जैसी बड़ी एयरलाइंस के विमान खड़े हैं.

भले ही हवाई मार्ग से केवल 1% माल ढोया जाता है, लेकिन इसकी वैल्यू कुल वैश्विक व्यापार की 35% है. इसमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर चिप्स और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं.

भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा दवा निर्यातक है. भारतीय दवाएं अक्सर इन्हीं खाड़ी देशों के रास्ते यूरोप और अमेरिका जाती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो दुनिया भर में दवाओं की कमी हो सकती है. इसके अलावा, मिडिल ईस्ट से आने वाले नाइट्रोजन उर्वरकों की कमी से खेती और खाद की कीमतों पर भी असर पड़ेगा.

ट्रंप की नई योजना
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई योजना पेश की है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना को तेल टैंकरों को सुरक्षा (Escort) देने का निर्देश दिया है. साथ ही, कंपनियों को 'पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस' देने की घोषणा की है ताकि समुद्री व्यापार को फिर से शुरू किया जा सके.

सप्लाई चेन विशेषज्ञों का मानना है कि शिपिंग इंडस्ट्री को संकटों की आदत है, लेकिन ईरान का यह मामला 'अभूतपूर्व' है. आने वाले हफ्तों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कार और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है.

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