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भारतीय LNG शेयरों में 10% तक की भारी गिरावट, कतर संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

मिडिल ईस्ट संकट और कतर में उत्पादन ठप होने से गैस कीमतें बढ़ीं, Petronet LNG और MGL के शेयरों में 9.6% तक भारी गिरावट आई.

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सांकेतिक फोटो (getty image)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 4, 2026 at 1:12 PM IST

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नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन गैस सेक्टर की कंपनियों के लिए बेहद निराशाजनक रहा. मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण घरेलू एलएनजी (LNG) कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखी गई. बाजार में यह गिरावट तब आई जब वैश्विक स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस की कीमतें साल 2023 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं.

शेयरों में मची अफरा-तफरी
बुधवार को कारोबार के दौरान पेट्रोनेट एलएनजी के शेयरों में सबसे ज्यादा 9.6% की गिरावट आई और यह गिरकर 279.45 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. इसी तरह, महानगर गैस (MGL) के शेयरों में 8.2% की कमजोरी दर्ज की गई और यह 1,110.45 रुपये पर आ गया. सेक्टर की दिग्गज कंपनी गेल इंडिया (GAIL) और इंद्रप्रस्थ गैस (IGL) भी इससे अछूती नहीं रहीं और इनके शेयरों में क्रमशः 6% और 5% तक की गिरावट दर्ज की गई.

कतर और हॉर्मुज स्ट्रेट का संकट
गैस सेक्टर में आई इस सुनामी का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट का मौजूदा संघर्ष है. दरअसल, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग गतिविधियों में भारी रुकावट आई है. तनाव को देखते हुए कतर ने अपनी प्रमुख एक्सपोर्ट फैसिलिटीज को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है. बता दें कि कतर दुनिया की कुल एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा नियंत्रित करता है. कतर के इस शटडाउन का सीधा असर भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े खरीदारों पर पड़ रहा है.

आसमान छूती कीमतें और शिपिंग लागत
आपूर्ति बाधित होने के कारण एशियाई स्पॉट एलएनजी की कीमतें बढ़कर $25.40 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) तक पहुंच गई हैं. यह पिछले तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके अलावा, युद्ध के जोखिमों के कारण समुद्री माल ढुलाई (Shipping) की लागत में भी भारी उछाल आया है. टैंकरों के दैनिक किराए में 40% से अधिक की वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय आयातकों के लिए लागत का बोझ कई गुना बढ़ गया है.

भारत और चीन पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कतर के इस संकट से भारत और चीन सबसे अधिक प्रभावित होंगे क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक आयातित गैस पर टिकी हैं. फिलहाल कंपनियां महंगे स्पॉट कार्गो खरीदने के बजाय कोयले जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख कर सकती हैं. हालांकि, यदि यह संकट लंबे समय तक चला, तो भारत की गैस आधारित अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों को बड़ा झटका लग सकता है. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कतर से आपूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक इन शेयरों में अस्थिरता बनी रहेगी.

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