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अनुमान से बेहतर रहे जून तिमाही के आंकड़े, पीएम मोदी कहा, 'खिल उठा भारत, निराशावादी हुए नाकाम'

जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था अनुमान से बेहतर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी.

GDP
जीडीपी (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 31, 2026 at 5:20 PM IST

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नई दिल्ली : भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में अनुमान से बेहतर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी. यह अमेरिका-ईरान युद्ध और इसकी वजह से उपजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच घरेलू आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाता है. पीएम मोदी ने जीडीपी के आंकड़ों की तारीफ की.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि की सराहना की और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा, ''निराशावादी नाकाम हुए और भारत एक बार फिर खिल उठा.''

प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि एक 'असाधारण उपलब्धि है.

मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ‘‘वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में झटकों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं के बावजूद हमारे लोगों की सामूहिक ताकत ने भारत को इतनी मजबूत वृद्धि दर्ज करने में सक्षम बनाया.’’

उन्होंने कहा, ''निराशावादी नाकाम हुए और भारत खिल उठा... एक बार फिर!"

हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर जनवरी-मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत के मुकाबले कम रही है. लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने और ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल के बाद लगाए गए अनुमानों से भारत की जीडीपी वृद्धि अधिक रही है.

सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जीडीपी वृद्धि दर जून तिमाही में बढ़कर 7.8 प्रतिशत रही जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत थी.

पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सात प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है. इस तरह भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (नेशनल अकाउंट्स डिवीन) सिद्धार्थ कुंडू ने कहा, "फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजों पर बात करते हैं, जिसमें रियल GDP अनुमानों में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई. यह मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में लगातार ग्रोथ की वजह से हुआ. इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में नॉमिनल GDP में 10.3% की ग्रोथ हुई. नॉमिनल और रियल ग्रोथ के बीच का अंतर मुख्य रूप से PPI में तेज महंगाई के कारण है, खासकर प्राइमरी सेक्टर और ट्रेड सर्विस के मामले में."

ईरान संघर्ष से ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई के दबाव और वैश्विक मांग कमजोर होने की आशंका पैदा हुई थी. ऐसे में उम्मीद से बेहतर वृद्धि दर से संकेत मिलता है कि बाहरी झटकों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि की गति अब तक कायम रही है.

यह आंकड़ा नीति-निर्माताओं के लिए कुछ राहत लेकर आया है, क्योंकि वे वृद्धि को बनाए रखने के प्रयासों के साथ भू-राजनीतिक तनाव और जिंस बाजारों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले जोखिमों के बीच संतुलन बनाने में जुटे हैं.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 81.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये था.

मंत्रालय ने कहा, ‘‘वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में वृद्धि की गति बनाए रखी है.’’

वहीं, मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 88.27 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 80 लाख करोड़ रुपये था. इस तरह मौजूदा कीमतों पर जीडीपी में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

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