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Agri Loans पर मंडराया अल नीनो का खतरा, लेकिन इस वजह से रॉकेट की रफ्तार से भागेगी बैंकों की कमाई; देखें रिपोर्ट

अल नीनो के बावजूद भारतीय बैंकिंग क्रेडिट ग्रोथ 12-15% मजबूत रहेगी और कॉर्पोरेट-MSME लोन के सहारे बैंकों की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी रहेगी.

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सांकेतिक फोटो (ani)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 29, 2026 at 2:41 PM IST

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नई दिल्ली: अल नीनो के प्रभाव के बावजूद देश के बैंकिंग सेक्टर में लोन देने की रफ्तार मजबूत बनी रहेगी. ब्रोकरेज फर्म 'यस सिक्योरिटीज' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम के कारण कृषि लोन और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र पर थोड़ा असर जरूर पड़ सकता है, लेकिन इससे बैंकिंग सेक्टर में किसी बड़े संकट या व्यवधान की आशंका नहीं है. वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में बैंकों की कुल क्रेडिट लागत भी पूरी तरह स्थिर रहने का अनुमान है.

क्रेडिट ग्रोथ और कमाई में बंपर सुधार की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में बैंकों की लोन ग्रोथ करीब 17 प्रतिशत के उच्च स्तर पर चल रही है. आने वाले समय में इसमें थोड़ी नरमी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद यह 12 से 15 प्रतिशत की बेहद मजबूत रेंज में बनी रहेगी. इसके अलावा, बैंकों की मुख्य कमाई यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भारी उछाल आने की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में बैंकों की एनआईआई ग्रोथ जहां 5.3 प्रतिशत थी, वहीं वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में इसके तेजी से बढ़कर 16.1 प्रतिशत होने का अनुमान है. यह मजबूत रफ्तार वित्त वर्ष 2028 और 2029 में भी क्रमशः 16.1% और 15.1% पर बरकरार रह सकती है.

कृषि और अनसिक्योर्ड लोन की स्थिति
मौसम में हो रहे बदलावों के कारण कृषि लोन पर नजर रखना जरूरी है. रिपोर्ट कहती है कि अल नीनो का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती-किसानी पर पड़ता है, जिससे किसान समय पर लोन नहीं चुका पाते. हालांकि, पुराना अनुभव बताता है कि यह स्थिति बहुत ज्यादा नुकसानदेह नहीं होगी. इसके साथ ही, बिना गारंटी वाले लोन की लागत, जो पहले घरेलू आर्थिक सुस्ती के कारण बढ़ गई थी, अब घटने लगी है. हालांकि, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ की धीमी रफ्तार और अल नीनो के कारण माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में यह लागत कुछ समय के लिए थोड़ी अटक सकती है.

इन क्षेत्रों से मिल रहा है मजबूत सहारा
बैंकिंग सेक्टर को इस समय सबसे बड़ा सहारा कॉर्पोरेट लोन में सुधार से मिल रहा है. इसके साथ ही छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) और रिटेल लोन (होम लोन, कार लोन आदि) की मांग भी लगातार बढ़ रही है. एमएसएमई सेक्टर पर पश्चिम एशिया के तनाव और व्यापार शुल्कों का थोड़ा असर दिख सकता है, लेकिन सरकार की आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) जैसी नीतियां छोटे कारोबारियों और बैंकों को किसी भी बड़े नुकसान से बचाए रखेंगी.

बैंकिंग सेक्टर के लिए 3 बड़ी चुनौतियां
यस सिक्योरिटीज ने बैंकों के बेहतर प्रदर्शन के बीच तीन मुख्य जोखिमों या चुनौतियों की पहचान की है, जिन पर लगातार नजर रखने की जरूरत है:

  • पश्चिम एशिया का संकट: इसके कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है.
  • अल नीनो का प्रभाव: यदि सूखा या मौसम की मार 'सुपर अल नीनो' में बदलती है, तो ग्रामीण संकट बढ़ सकता है.
  • व्यापार शुल्क: वैश्विक स्तर पर लगने वाले शुल्कों का असर देश के व्यापार और एमएसएमई पर पड़ सकता है.

अच्छी बात यह है कि भविष्य में लागू होने वाले नए नियमों से भी बैंकों पर कोई अचानक एकमुश्त बड़ा वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे भारतीय बैंकों का भविष्य सुरक्षित नजर आ रहा है.

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