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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, 99% समझौता तैयार, कानूनी मसौदे पर चर्चा जारी

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता नई दिल्ली में शुरू हुई; अधिकारी नए अमेरिकी नियमों के तहत अंतिम कानूनी ढांचा तय कर रहे हैं.

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 2, 2026 at 3:27 PM IST

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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है. यह बैठक 2 जून से 4 जून 2026 तक चलेगी. इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच होने वाले 'द्विपक्षीय व्यापार समझौते' (BTA) के पहले चरण को अंतिम रूप देना है.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बातचीत को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बताया कि इस समझौते की लगभग 99 प्रतिशत बातचीत पूरी हो चुकी है. अब केवल कुछ छोटी-मोटी कानूनी बातें तय करना बाकी रह गया है.

बैठक में कौन-कौन शामिल हैं?
इस तीन दिवसीय बैठक में दोनों देशों के बड़े अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं. अमेरिकी टीम की अगुवाई वहां के मुख्य वार्ताकार ब्रैंडन लिंच कर रहे हैं. वहीं, भारत की तरफ से वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पन जैन कमान संभाल रहे हैं. इस बैठक में दोनों देश व्यापार को आसान बनाने, निवेश बढ़ाने और सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) से जुड़े नियमों को सरल करने पर चर्चा कर रहे हैं.

वार्ता में नया मोड़ क्यों आया?
इस समझौते का मुख्य ढांचा फरवरी में ही तैयार हो गया था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में अमेरिका के नियमों में बड़े बदलाव हुए हैं, जिसके कारण इस समझौते को दोबारा देखना पड़ रहा है:

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ पुराने टैरिफ नियमों को रद्द कर दिया था.

10% नया टैक्स: इस फैसले के बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से सभी देशों से आने वाले सामानों पर 150 दिनों के लिए 10% का एक समान टैक्स (टैरिफ) लगा दिया. यह नियम 23 जुलाई को खत्म होने वाला है.

बैठक में देरी: अमेरिकी टैक्स नियमों में इस अचानक बदलाव की वजह से फरवरी में होने वाली बैठक टल गई थी. इसके बाद अप्रैल में भारतीय अधिकारियों ने अमेरिका का दौरा किया और बातचीत को दोबारा पटरी पर लाए.

भारत की मुख्य चिंताएं क्या हैं?
भारत इस बैठक में अपने व्यापारियों के फायदे के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. चूंकि अमेरिका ने सभी देशों पर एक जैसा 10% टैक्स लगा दिया है, इसलिए भारत चाहता है कि उसे इस समझौते के तहत कुछ विशेष छूट मिले.

भारत का लक्ष्य है कि अमेरिकी बाजार में उसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के मुकाबले कम टैक्स देना पड़े. इससे भारतीय कपड़ा, रत्न, और अन्य सामान अमेरिका में सस्ते मिलेंगे और भारत के निर्यात को फायदा होगा.

'सेक्शन 301' पर विवाद
इस बातचीत के बीच एक छोटा विवाद भी सामने आया है. अमेरिकी व्यापार संगठन (USTR) ने मार्च में भारत सहित कुछ देशों के खिलाफ 'सेक्शन 301' के तहत जांच शुरू की है. अमेरिका का आरोप है कि इन देशों की सप्लाई चेन में कुछ कमियां हैं. भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया है और अमेरिका से इसके पुख्ता सबूत मांगे हैं.

दोनों देशों के बीच व्यापार का हाल
अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. पिछले साल (2025-26) भारत ने अमेरिका को 87.3 अरब डॉलर का सामान बेचा, जबकि अमेरिका से 52.9 अरब डॉलर का सामान खरीदा. इस तरह भारत व्यापार के मामले में फायदे में है.

आगे की योजना
इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों, बादाम, अखरोट, सेब और सोयाबीन तेल पर टैक्स कम कर सकता है. इसके बदले में भारत अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के हवाई जहाज, ऊर्जा उत्पाद (तेल-गैस) और नई टेक्नोलॉजी खरीदेगा. इस हफ्ते की बातचीत सफल रहने के बाद, अमेरिकी व्यापार प्रमुख भी भारत आएंगे और अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

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